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Car Tyre care Tips : कार हो या बाइक, सड़क पर आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा टायर ही तय करते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग टायर तब बदलते हैं, जब वह पूरी तरह घिस जाए या पंचर होने लगे. अब ऑटो एक्सपर्ट्स एक खास “5 ईयर रूल” की चर्चा कर रहे हैं, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. यह नियम बताता है कि सिर्फ टायर की मोटाई देखना काफी नहीं है, क्योंकि कई बार ऊपर से फिट दिखने वाला टायर अंदर से कमजोर हो चुका होता है. ऐसे में प्रयागराज के बाईक-कार मैकनिक सलीम ने टायर के सही उपयोग का नियम बताया है.
मैकनिक सलीम के मुताबिक अगर किसी टायर को इस्तेमाल करते हुए 5 साल पूरे हो जाएं, तो उसकी नियमित जांच कराना बेहद जरूरी हो जाता है. भले ही टायर नया जैसा दिखे और उसकी ग्रिप भी ठीक लगे, लेकिन समय के साथ रबर की गुणवत्ता कमजोर होने लगती है. धूप, गर्मी, बारिश और सड़क की गर्म सतह धीरे-धीरे टायर के रबर को सख्त बना देती है. इससे टायर में बारीक दरारें आने लगती हैं, जो अक्सर आंखों से दिखाई भी नहीं देतीं.
ऑटो मैकेनिक बताते हैं कि कई लोग सिर्फ ट्रेड डेप्थ देखकर खुश हो जाते हैं. यानी अगर टायर की पकड़ ठीक दिख रही है, तो उसे सुरक्षित मान लेते हैं. लेकिन 5 साल के बाद अंदरूनी परत कमजोर हो सकती है, जिससे चलते समय टायर फटने का खतरा बढ़ जाता है. खासकर हाईवे पर तेज रफ्तार में पुराने टायर ज्यादा जोखिम पैदा कर सकते हैं.
टायर की उम्र जानने का तरीका भी बेहद आसान है. हर टायर के किनारे DOT कोड लिखा होता है. इसके आखिरी चार अंक बताते हैं कि टायर किस हफ्ते और किस साल बना था. जैसे अगर कोड में “3922” लिखा है, तो इसका मतलब टायर 2022 के 39वें हफ्ते में बना था. इसी से आप उसकी उम्र का अंदाजा लगा सकते हैं.
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एक और जरूरी बात यह है कि सिर्फ चलने वाले टायर ही नहीं, गाड़ी की स्टेपनी भी पुरानी होकर खराब हो सकती है. कई लोग सालों तक स्पेयर टायर चेक ही नहीं करते, जबकि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि उसका रबर भी समय के साथ कमजोर पड़ता रहता है.
सोशल मीडिया और ऑटो फोरम्स पर भी लोग पुराने टायरों को लेकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि कम चलने वाली गाड़ियों में भी 5-6 साल बाद टायरों में क्रैक आने लगते हैं. वहीं कुछ लोग सलाह देते हैं कि अगर टायर 6 से 10 साल पुराने हो जाएं, तो उन्हें बदल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है.
<br />अगर आपकी गाड़ी के टायर पुराने हो चुके हैं, तो सिर्फ बाहर देखकर भरोसा न करें. समय-समय पर प्रोफेशनल से जांच करवाना और जरूरत पड़ने पर टायर बदलना ही सुरक्षित ड्राइविंग की सबसे बड़ी कुंजी माना जाता है.