भारत में Tesla Model Y की बिक्री में कीमत और कस्टम ड्यूटी बनी बाधा

नई दिल्ली. Elon Musk की Tesla ने पिछले साल यानी 2025 में इंडियन ऑटो मार्कट में एंट्री मारी थी. एक समय तो लोकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की संभावना भी जताई गई थी. हालांकि, भारतीय बाजार में आने में आने के एक साल से भी कम समय में टेस्ला की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि इम्पोर्टेड प्रीमियम कारों को यहां बेचना काफी मुश्किल है.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Tesla को भारत में पिछले साल आयात की गई शुरुआती खेप का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बेचने में दिक्कत हो रही है. करीब 300 यूनिट Model Y डिस्पैच किए जाने के चार महीने बाद भी लगभग 100 गाड़ियां बिना बिके पड़ी हैं. इन वाहनों का स्टॉक कम करने के लिए कंपनी चुनिंदा Model Y वेरिएंट्स पर 2 लाख रुपये तक की छूट दे रही है. हालांकि, टेस्ला ने इसको लेकर कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है.

Model Y ने बिगाड़ा खेल

भारत में टेस्ला की रणनीति फिलहाल एक ही कार Model Y पर टिकी है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत लगभग 60 लाख रुपये है, जो इसे अपने सेगमेंट की सबसे महंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में शामिल करती है. ब्लूमबर्ग के अनुसार, भारत में मॉडल Y के लिए करीब 600 बुकिंग मिली थीं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या अभी तक डिलीवरी में नहीं बदली. ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन डेटा बताता है कि 2025 में पूरे साल टेस्ला ने भारत में केवल 227 गाड़ियां रजिस्टर की हैं.

कस्टम ड्यूटी ने बढ़ाए दाम

टेस्ला की सबसे बड़ी चुनौती कीमत है. भारत में CBU यूनिट पर कस्टम ड्यूटी 110% तक लग सकती है, जिससे गाड़ियों की कीमत दोगुने से ज्यादा हो जाती है. टेस्ला ने सोचा था कि उसका ब्रांड आकर्षण इन लागतों की भरपाई कर देगा, लेकिन अब तक यह रणनीति कारगर साबित नहीं हुई. भारतीय ईवी खरीदार, यहां तक कि प्रीमियम सेगमेंट में भी, कीमत और वैल्यू को लेकर बेहद सजग हैं. टेस्ला को ग्राहक न मिलने की यह भी एक बड़ी वजह है.

ग्राहकों का भरोसा नहीं मिला

कीमत के अलावा टेस्ला की सीमित फिजिकल मौजूदगी भी समस्या है. गिने-चुने शोरूम और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग की कमी के कारण ब्रांड की विजिबिलिटी कम है. सर्विस नेटवर्क भी सीमित है, जिससे मेंटेनेंस और ऑनरशिप को लेकर ग्राहक थोड़े से चिंतित रहते हैं. कंपनी कोशिश तो कर रही है, लेकिन भरोसा बनाने में समय लगेगा.

मार्केट से उलट परफॉरमेंस

दिलचस्प बात ये है कि टेस्ला की सुस्ती ऐसे समय में दिख रही है, जब भारत का ईवी बाजार तेज रफ्तार से बढ़ रहा है. 2025 में कुल ईवी रिटेल बिक्री 16% बढ़कर 22.7 लाख यूनिट पहुंच गई, जबकि इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों की बिक्री 77% उछलकर 1.76 लाख यूनिट हो गई है. टाटा मोटर्स और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर जैसी कंपनियां किफायती कीमतों और बेहतर लोकल ऑफरिंग्स के दम पर बाजार में आगे हैं. वहीं, टेस्ला अपने पैर जमाने में नाकामयाब रही.

फ्यूचर प्लान

टेस्ला भारत में लंबी अवधि के लिए इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रही है, जिसमें होम चार्जिंग, मॉल और होटलों में चार्जिंग पॉइंट्स और सुपरचार्जर शामिल हैं. साथ ही, कंपनी को कॉस्ट ऑफ ओनरशिप को लेकर भी ग्राहकों का भरोसा जीतना पड़ेगा भविष्य में अगर कस्टम ड्यूटी घटती है या फिर टेस्ला लोकल प्रोडक्शन शुरू करती है, तो कंपनी की स्थिति मजबूत होगी.

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