India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इससे नई दिल्ली को बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 90 अरब डॉलर के पार जा सकता है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भारतीय निर्यात में संभावित उछाल के कारण संभव मानी जा रही है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में टैरिफ में की गई भारी कटौती के बाद अमेरिका को भारत के शीर्ष 15 उत्पादों का निर्यात सालाना 97 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. कुल निर्यात 100 अरब डॉलर का आंकड़ा भी पार कर सकता है. भारतीय उत्पादों पर शुल्क में कमी से अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है.
यूएस के साथ ट्रेड सरप्लस
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष पहले से ही बढ़त के संकेत दे रहा है. वित्त वर्ष 2025 में यह 40 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल से दिसंबर की अवधि के दौरान यह 26 अरब डॉलर रहा. यदि निर्यात में अनुमानित बढ़ोतरी होती है, तो वार्षिक आधार पर ट्रेड सरप्लस 90 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है, जो भारत की जीडीपी का लगभग 1.1 प्रतिशत तक हो सकता है.
वर्तमान में भारत अपने कुल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत अमेरिका को भेजता है, जबकि वहां से आयात सिर्फ 7 प्रतिशत के आसपास है. सेवा क्षेत्र में भी अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अब तक अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं की भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सीमित पहुंच रही है, जबकि भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में मजबूत स्थिति है.
भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर
आयात के संदर्भ में रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. ऐसे में अनुमान है कि अमेरिका से भारत में सालाना करीब 50 अरब डॉलर का निर्यात हो सकता है, जिसमें सेवा क्षेत्र शामिल नहीं है. यदि टैरिफ में और कटौती या छूट दी जाती है, तो अमेरिका से कृषि और अन्य उत्पादों का निर्यात बढ़कर 55 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
कुल मिलाकर, एसबीआई की रिपोर्ट संकेत देती है कि यह ट्रेड डील भारत के लिए निर्यात विस्तार, व्यापार अधिशेष में वृद्धि और जीडीपी पर सकारात्मक प्रभाव के लिहाज से अहम साबित हो सकती है.

