सैमसंग गैलेक्सी फोन में दो छेद क्यों बने होते हैं? यूज जानकर कहेंगे- वाह जी वाह, क्या दिमाग लगाया है!


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  • सैमसंग गैलेक्सी फोन में दो छोटे छेद, एक माइक और दूसरा एयर वेंट.
  • एयर वेंट से गर्मी बाहर, गोर-टेक्स झिल्ली से पानी अंदर नहीं.
  • कुछ फोन में तीन छेद, बेहतर नॉइस कैंसिलेशन के लिए उपयोग.
  • आईफोन प्रो मॉडल में LiDAR सेंसर, AR और फोटो क्वालिटी के लिए.

Samsung Galaxy Phone Hidden Features: अगर आप हाल ही में लॉन्च हुए Samsung Galaxy S26 Ultra को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि इसके ऊपर दो बहुत छोटे होल बने हुए हैं. दिखने में ये छेद बिल्कुल एक जैसे हैं, लेकिन इन दोनों का काम अलग-अलग है. Galaxy S26 Ultra के अलावा कंपनी के कई दूसरे गैलेक्सी फोन में भी ऐसे छेद बने होते हैं. Galaxy S25 सीरीज में भी आपको ऐसे छेद देखने को मिल जाएंगे. Galaxy S23 सीरीज की बात करें तो इसमें एक होल ऊपर बना होता था, जबकि दूसरा नीचे था. अब लेटेस्ट फोन में दोनों ही होल ऊपर हो गए हैं. आइए आज जानते हैं कि इन दो होल का काम क्या है.

Galaxy Phone में क्यों बने होते हैं छेद?

अगर Galaxy S26 Ultra की बात करें तो इसके एक होल में माइक्रोफोन लगा है और दूसरा एयर वेंट का काम करता है. राइट साइड वाला एयर वेंट का काम करता है, जबकि लेफ्ट वाले में माइक लगा होता है. बता दें कि सैमसंग ने अपने मॉडल को वाटर रजिस्टेंस बनाने और नॉइस-कैंसिलेशन का फीचर देने के लिए मल्टी-होल कॉन्सेप्ट को शुरू किया था. एयर वेंट वाले होल से पानी अंदर न जा पाए, इसके लिए सैमसंग गोर-टेक्स जैसी मेंब्रेन यूज करती है. यह पानी को अंदर जाने से रोक लेती है, लेकिन फोन में जनरेट हुई हीट को बाहर निकाल देती है. 

कई फोन में तीन होल क्यों बने होते हैं?

कुछ फोन की बॉटम में आपको तीसरा होल भी मिल जाएगा. इसे भी माइक्रोफोन के लिए यूज किया जाता है. बता दें कि फोन में कई होल होना असामान्य नहीं है. Google Pixel 9 Pro के ऊपर, रियर कैमरा के बीच में और चार्जिंग पोर्ट के पास एक-एक कुल तीन होल बने हुए हैं. नॉइस कैंसिलेशन को बेहतर करने के लिए यह डिजाइन अप्रोच अपनाई गई है. चार्जिंग पोर्ट वाला होल यूजर की वॉइस को कैप्चर करता है, जबकि दूसरे होल एम्बिएंट साउंड को कैप्चर करते हैं. इस कारण कई फोन में बेहतर नॉइस कैंसिलेशन मिलता है. 

iPhone में ब्लैक डॉट का क्या काम?

आईफोन प्रो मॉडल्स के कैमरा के पास एक ब्लैक डॉट होती है. आईफोन रखने वाले ज्यादातर लोगों को इसका यूज पता नहीं होता है. असल में यह ब्लैक डॉट एक LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) सेंसर होता है. इससे आईफोन अपने सराउंडिंग का पता लगाता है, जिससे फोटो क्वालिटी बेहतर करने, ऑगमेंटेड रिएलिटी ऐप्स चलाने और ऑब्जेक्ट को मेजर करने जैसे काम किए जाते हैं. ऐप्पल ने इसकी शुरुआत 2020 में आईफोन 12 प्रो से की थी.

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