Child Education: सावधान! आपका घर ही बन रहा है बच्चे की तरक्की में रुकावट? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

सतीश कुमार
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Home Environment And Child Education: आपके बच्चे की पढ़ाई में सफलता सिर्फ क्लासरूम में ध्यान देने तक सीमित नहीं होती रिसर्च बताती है कि जिस घर में बच्चा रहता है, उसका सीधा असर उसकी पढ़ाई और परीक्षा के नतीजों पर पड़ता है. भीड़भाड़ वाला घर, सीलन, नमी और ठीक से गर्मी की व्यवस्था न होना, ये सब चीजें बच्चों की सेहत के साथ-साथ उनकी पढ़ाई को भी प्रभावित करती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि रिसर्च में क्या निकला है. 

क्या निकला है रिसर्च में?

हाल ही में Journal of Epidemiology and Community Health में पब्लिश एक स्टडी में सामने आया है कि खराब आवासीय परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की स्कूल से गैरहाजिरी ज्यादा होती है और उनके ग्रेड्स भी कमजोर रहते हैं, खासकर इंग्लिश और मैथ्स जैसे अहम विषयों में. रिसर्चर के मुताबिक, बेहतर घर सिर्फ बच्चों को बीमारियों से नहीं बचाते, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को भी सुधारते हैं. स्टडी में पाया गया कि इंग्लैंड में खराब घरों में रहने वाले बच्चे औसतन 15 दिन ज्यादा स्कूल मिस करते हैं. ऐसे बच्चों के टेस्ट स्कोर भी अपने साथियों की तुलना में कम होते हैं.

क्या है बेहतर घर से मतलब?

बेहतर घर का मतलब सिर्फ नया मकान नहीं है. इसमें भीड़भाड़ कम होना, सीलन और नमी से छुटकारा, सही हीटिंग सिस्टम और रहने लायक माहौल शामिल है. रिसर्च में यह भी सामने आया कि इंग्लैंड में हर सात में से एक परिवार ऐसे घर में रह रहा है, जो सरकारी डिसेंट होम्स स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरता. इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने Millennium Cohort Study के आंकड़ों का एनालिसिस किया, जिसमें 2000 से 2002 के बीच जन्मे 8,992 बच्चों को शामिल किया गया. सात साल की उम्र में उनके घरों की स्थिति को छह पैमानों पर परखा गया, जिसमें घर का प्रकार, फ्लोर लेवल, गार्डन की उपलब्धता, नमी, हीटिंग की स्थिति और भीड़भाड़  शामिल थे. 

क्या निकला रिजल्ट?

नेशनल पुपिल डेटाबेस के आंकड़ों से पता चला कि जिन बच्चों का घर खराब स्थिति में था, वे औसतन हर साल करीब डेढ़ दिन ज्यादा स्कूल से गैरहाजिर रहे. 11 साल की अनिवार्य पढ़ाई में यह संख्या काफी बढ़ जाती है। साथ ही, इन बच्चों के मैथ्स और इंग्लिश के ग्रेड्स 2 से 5 प्रतिशत तक कम पाए गए. रिसर्चर का कहना है कि भीड़भाड़ वाले घरों में शोर, पढ़ाई की जगह की कमी, नींद पूरी न होना और जिम्मेदारियों का बोझ बच्चों की एकाग्रता को प्रभावित करता है. इससे उनका व्यवहार और सेहत दोनों बिगड़ते हैं, जिसका असर पढ़ाई पर साफ दिखता है. स्टडी में यह भी बताया गया कि अगर घरों की स्थिति सुधारी जाए खासकर नमी और भीड़भाड़ कम की जाए, तो न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च भी घटेगा.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.



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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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