क्या आप दूसरों को बदलने की कोशिश में थक गए हैं? हितअम्ब्रीश गुरु ने बताया इसका समाधान!

सतीश कुमार
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आज के समय में ये बात काफी कड़वी लग सकती है, लेकिन हितअम्ब्रीश गुरु ने जो कहा है, वह भावुकता पर नहीं, बल्कि वास्तविकता पर आधारित है. हम सभी अपने में एक गलतफहमी पाल लेते हैं, कि सामने वाला अगर हमारी बात नहीं मान रहा है, तो वह जिद्दी स्वभाव का है, अज्ञानी और गलत है. लेकिन असल में सच्चाई इससें काफी गहरी है.

गुरु हितअम्ब्रीश की बातों का मुख्य केंद्र है प्रारब्ध और संस्कार. प्रत्येक इंसान इस दुनिया में खाली स्लेट लेकर नहीं आता है, वह अपने साथ लाता है पू्र्व जन्म के कर्मों, संस्कारों और मानसिक प्रवृ्त्तियों को उसके सोचने का तरीका, उसके निर्णय लेने का तरीका सब कुछ पहले से ही बना हुआ है.

आप बाहर से चीजों को कितना भी समझाने का क्यों न प्रयास कर लें, वह अंदर उसी दिशा में खिंचता रहेगा, जहां उसका स्वभाव और कर्म उसे ले जा रहे हैं.

गुरु हितअम्ब्रीश ने बताए कठोर नियम

यही वजह है कि, माता-पिता बच्चों से, पति-पत्नी एक-दूसरे से या दोस्तों को समझाकर थक जाते हैं, लेकिन कुछ परिवर्तन नहीं होता. लोग इसे जिद या नासमझी कहते हैं, लेकिन असल में यह आंतरिक मजबूरी है. इंसान अगर आपकी बातों को समझ भी ले, तभी भी वह अपने संस्कारों के खिलाफ चल नहीं पाता है, जैसे किसी बहती नदी को हाथ से मोड़ने का प्रयास किया जा रहा हो.

गुरु हितअम्ब्रीश यहां एक बेहद ही कठोर लेकिन सच्चे नियमों को बता रहे हैं-

आप किसी को बदल नहीं सकते,
न अपने बच्चे को, न अपने पार्टनर को और न ही अपने भाई-बहन को.

तो इसका मतलब क्या हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें? बिल्कुल भी नहीं! जिस भगवान ने समस्या दी है, उन्होंने ने समाधान भी दिया है, प्रार्थना और सद्भाव. जब आप किसी में परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं, तो अहंकार काम कर रहा होता है, मैं सही हूं, तुम गलत हो, जिस कारण टकराव पैदा होता है, लेकिन जब आप उसके लिए प्रार्थना करते हैं, तो आप उसके रास्ते में बाधा नहीं बनते, बल्कि उसे अंदर से परिवर्तन का मौका देते हो.

सबसे बड़ा और गहरा वाक्य यह है –
समझाना मात्र अपने मन को चाहिए.

यही असल मायनों में साधना है. बाहर की दुनिया को सुधारने में हम अपनी ऊर्जा बर्बाद कर देते हैं, जबकि असली अव्यवस्था हमारे मन में होती है. हमारी अपेक्षाएं, हमारा गुस्सा, हमारा दुख अगर आपका मन शांत है, तो दूसरे जैसी भी हो, आपको अस्थिर नहीं कर सकते हैं.

रिश्ते स्थायी नहीं है, यह बात गुरु ने बहुत साफ कही. प्रत्येक आत्मा कुछ समय के लिए आपके जीवन में आती है और फिर अपने रास्ते पर चली जाती है. इसलिए बुद्धिमानी कहते हैं कि, जबतक साथ हैं झगड़े नहीं, बल्कि शांति रखें.

कुल मिलाकर उनकी बातें यही शिक्षा देती है कि, दूसरों को सुधारने की जिद छोड़ो, आज मन को साधो यही असली सुख है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.