Siddha Kunjika Stotram: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र, वो रहस्यमयी चाबी जो खोलती है ब्रह्मांड, तंत्र और सृष्टि के छिपे राज

सतीश कुमार
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Siddha Kunjika Stotram: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र मां दुर्गा की स्तुति का एक शक्तिशाली और गुप्त तंत्र-आधारित पाठ है. इस स्त्रोत को दुर्गा सप्तशती का ‘हृदय’ या चाबी (कुंजी) माना जाता है, जिसके पाठ से संपूर्ण सप्तशती का फल मिल जाता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है. जो लोग दुर्गा सप्तशती का कठिन पाठ नहीं कर पाते वे सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कर सकते है.

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में दिए मंत्र जैसे ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ चमत्कारिक रूप से लाभकारी माने जाते हैं. इसके पाठ के लिए पाठ के लिए कवच, कीलक या अर्गला स्तोत्र की अलग से जरूरत नहीं होती. इसकी वास्तविक साधना और गूढ़ अर्थ को समझने के लिए परंपरागत गुरु मार्गदर्शन आवश्यक माना जाता है.

इंस्टाग्राम पर Soot ji Bole पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें एक पॉडकास्ट के दौरान इशिता शर्मा बताया गया है कि- सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम सिर्फ़ एक मंत्र नहीं, यह एक आध्यात्मिक चाबी है. साथ ही वीडियो में स्तोत्र की कुछ शक्तिशाली पंक्तियों के पीछे छिपे असली मतलब भी बताए गए हैं, जो हमें सिखाते हैं कि देवी की सच्ची शक्ति पहले से ही हमारे अंदर है. जप करने से ज़्यादा, यह आपकी अंदर की शक्ति को जगाने के बारे में है. अगर इसे गहराई से समझा जाए, तो यह स्तोत्र सुरक्षा, स्पष्टता और कृपा का रास्ता बन जाता है.

कुंजिका स्तोत्र को तंत्र को समझने की एक महत्वपूर्ण ‘चाबी’ माना जाता है.  ‘कुंजिका’ का अर्थ ही चाबी है, ऐसी चाबी जो ब्रह्मांड के रहस्यों को खोलने की क्षमता रखती है. तांत्रिक दृष्टि से यह स्तोत्र सृष्टि की उत्पत्ति, उसके संचालन और अंततः भगवान की तिरोधन शक्ति द्वारा उसके लय या निराकार में विलीन होने की प्रक्रिया को संकेत रूप में बताता है.

जब हम सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और चामुंडा शक्ति की चर्चा करते हैं, तो यह केवल एक स्तुति नहीं बल्कि मंत्र, तंत्र, तत्व और क्रिया के गूढ़ ज्ञान का संक्षिप्त स्वरूप माना जाता है. तंत्र शास्त्र के अनुसार, जब इन मंत्रों को गहराई से समझा जाता है, तो उनसे तत्व (पंचमहाभूत) और तन्मात्राएं प्रकट होती हैं, जिनसे पूरी सृष्टि के विकास की अवधारणा समझाई जाती है.

मंत्रों को समझने के लिए अक्षरों का ज्ञान जरूरी है. संस्कृत वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर को ऊर्जा या शक्ति का प्रतीक माना गया है. अक्षर को ‘ब्रह्म’ की संज्ञा दी गई है, क्योंकि ध्वनि और शब्द से ही सृष्टि की अभिव्यक्ति मानी जाती है. क, ख, ग,घ.. जैसे अक्षरों में अंतर केवल उच्चारण का नहीं बल्कि ऊर्जा और मात्रा (स्वर) के भेद का भी संकेत है.

तांत्रिक परंपरा में मात्रिका और भैरव सिद्धांत महत्वपूर्ण है, जहां स्वर को शक्ति (देवी) और व्यंजन को भैरव (शिव) का प्रतीक माना जाता है. दोनों के संयोग से ध्वनि, शब्द और अंततः सृष्टि की रचना होती है. इसी तरह श्रीचक्र साधना में भी पहले सूक्ष्म शक्तियों, सिद्धियों और मात्रिकाओं का अनुभव बताया गया है,, जो आगे चलकर सृष्टि के तत्वों की समझ तक ले जाता है.

कुंजिका स्तोत्र में अंत में विभिन्न बीज मंत्रों और अक्षरों के माध्यम से आकाश से पृथ्वी तक तत्वों के विकास, नौ वर्गों की संरचना और मातृका शक्तियों के संचालन का संकेत मिलता है. इस प्रकार यह स्तोत्र तंत्र की दृष्टि से सृष्टि, शक्ति और चेतना के गूढ़ रहस्यों को प्रतीकात्मक रूप में प्रकट करता है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.