Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद सरकार भारतीय सेना की एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है. 2026-27 के लिए बनाए गए केंद्रीय बजट में डिफेंस सेक्टर को 7.85 लाख करोड़ रुपये अलॉट किए गए. इनमें भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़, विमान और एयरो इंजन के लिए 63,733 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
इसी क्रम में सेना ने एयर सर्विलांस और जंग में लड़ने की तैयारी को मजबूत करने के अपने प्रयासों को भी तेज कर दिया है. 30 लो-लेवल हल्के रडार खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय का रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करना इसी बात का सबूत है.
725 करोड़ रुपये की होगी बड़ी डील
यह डील लगभग 725 करोड़ रुपये में होने का अनुमान है. जरूरी ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए रडार फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट (FTP) रूट से खरीदे जाएंगे. अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रह गई कमियों को दूर करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में दुश्मन की गतिविधियों और ड्रोन हमलों की पहचान भारतीय सेना के रडार सिस्टम ने दुश्मनों के नापाक मंसूबो पर पानी फेर दिया था. रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) भारत में डिफेंस सेक्टर के लिए किसी भी तरह की खरीद की प्रक्रिया में एक अहम शुरुआती कदम है, जिसके जरिए रक्षा मंत्रालय संभावित वेंडर्स से बोली मंगवाता है, जिसमें उपकरण खरीदने के लिए टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स और कमर्शियल शर्तें बताई जाती हैं.
नए रडार का इस्तेमाल?
नए रडार का इस्तेमाल पहाड़ों, ऊंची जगहों, मैदानों, अर्ध-रेगिस्तानों, रेगिस्तानों और तटीय इलाकों सहित कई तरह के इलाकों में किया जाएगा. अलग-अलग ऑपरेशनल थिएटरों में तैनाती के लिए ये जरूरी होंगे, जिससे हवाई खतरों की निगरानी करने और उन पर प्रतिक्रिया देने की सेना की क्षमता बढ़ेगी. इससे दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स, मिसाइलों का पता लगाना आसान होगा.
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