सेकंड हैंड वाहन खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान, कभी नहीं होगी कानूनी दिक्कत, कोडरमा के अधिवक्ता ने बताया नियम

सतीश कुमार
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कोडरमा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा ने बताया कि वाहन बेचने वाले को भी सावधान रहना चाहिए. पूरे पैसे मिलने के बाद भी तब तक वाहन का हैंडओवर नहीं करना चाहिए जब तक नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी न हो जाए. यदि वाहन का ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप नहीं हुआ और….

कोडरमा: कम बजट के कारण अक्सर लोग सेकंड हैंड दोपहिया या चार पहिया वाहन खरीदते हैं. हालांकि, सस्ती कीमत के लालच में कई बार खरीदार आवश्यक कानूनी और तकनीकी जांच को नजरअंदाज कर देते हैं. जिसका खामियाजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है. कोडरमा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के डिफेंस काउंसिल अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा ने सेकंड हैंड वाहन खरीदते समय बरती जाने वाली कानूनी सावधानियों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

बिना नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के गाड़ी खरीदने से हो सकती है मुसीबत
अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा ने बताया कि किसी भी सेकंड हैंड वाहन को खरीदने से पहले उसके इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन की वैधता की अच्छी तरह जांच करना बेहद आवश्यक है. कई बार वाहन का इंश्योरेंस समाप्त हो चुका होता है या दस्तावेज अपडेट नहीं होते, जिससे दुर्घटना की स्थिति में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

उन्होंने बताया कि यदि वाहन बैंक या किसी फाइनेंस कंपनी से लोन पर लिया गया है तो संबंधित संस्था से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है. बिना एनओसी के वाहन खरीदना भविष्य में कानूनी विवाद का कारण बन सकता है. बैंक की बकाया राशि होने की स्थिति में वाहन जब्त भी किया जा सकता है. जिससे खरीदार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

नाम ट्रांसफर होने से पहले गाड़ी सौंपने पर बढ़ सकती है परेशानी
उन्होंने बताया कि वाहन बेचने वाले को भी सावधान रहना चाहिए. पूरे पैसे मिलने के बाद भी तब तक वाहन का हैंडओवर नहीं करना चाहिए जब तक नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी न हो जाए. यदि वाहन का ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप नहीं हुआ और दुर्भाग्यवस इस बीच वाहन से कोई दुर्घटना या आपराधिक घटना हो जाती है, तो कानूनी जिम्मेदारी वाहन के रजिस्ट्रेशन पर दर्ज व्यक्ति की ही मानी जाती है. उन्होंने कहा कि यदि खरीदार ने वाहन ले लिया लेकिन, नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया लंबित है और इसी दौरान दुर्घटना हो जाती है तो कई मामलों में इंश्योरेंस क्लेम मिलने में भी कठिनाई आती है.

अनुभवी मैकेनिक से कराएं अंदरूनी जांच
उन्होंने सलाह दी कि संभव हो तो सेकंड हैंड वाहन खरीदते समय एक अनुभवी मैकेनिक को साथ लेकर जाएं. गाड़ी के इंजन, आंतरिक सिस्टम, मीटर रीडिंग, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और वाहन के वास्तविक रंग की जांच जरूर करें. कई बार मीटर से छेड़छाड़ या दस्तावेजों में गड़बड़ी भी सामने आती है. उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में किसी भी प्रकार की डील न करें, खासकर तब जब विक्रेता अत्यधिक दबाव बना रहा हो. बिना पूरी जांच और कागजी प्रक्रिया पूरी किए वाहन खरीदना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है. उन्होंने कहा कि बैंक फाइनेंस वाली गाड़ी बिना एनओसी के बिल्कुल न खरीदें. थोड़ी सी सावधानी और कानूनी जानकारी से खरीदार खुद को बड़ी मुसीबत से बचा सकते हैं. सेकंड हैंड वाहन खरीदते समय सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.

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Rajneesh Singh

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.