Controversy over Masan Holi in Kashi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर दशकों से मनाई जा रही ‘मसान की होली’ इस साल विवादों में घिर गई है. काशी के डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए इस आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है.
उनका कहना है कि, यह परंपरा शास्त्रसम्मत नहीं है, जो श्मशान की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि, यदि आयोजन नहीं रोका गया तो वे महाश्मशान में में दाह संस्कार रोकने को बाध्य होंगे. उनके ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन असमंजस की स्थिति में है.
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क्या है मसान होली की परंपरा?
मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव विवाह के पश्चात रंगभरी एकादशी पर माता गौरी को काशी लाए थे. पौराणिक कथाओं के मुताबिक शिव के गण बारात में नहीं जा सके, जिससे वे आहत हुए. उनकी इच्छा पूरी करने के लिए महाश्मान में चिता की राख से होली खेलने की परंपरा शुरू हुई.
बीतते समय के साथ अघोरी और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा यह आयोजन विस्तार होते चला गया.
साल 2009 के बाद बाबा महाश्मशान मंदिर मैनेजमेंट कमेटी के प्रशासक गुलशन कपूर ने इसे व्यवस्थित रूप दिया, जिसके बाद यग आयोजन देश के साथ विदेश में भी काफी चर्चा में रहा. हर साल हजारों लोग इस भव्य नजारे को देखने के लिए पहुंचते हैं, जिसका पंचांगों में भी उल्लेख है.
मसाना की होली पर विरोध के तर्क
विश्वनाथ चौधरी के मुताबिक, मसाना की होली का स्पष्ट रूप से कोई धार्मिक आधार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, आयोजन के दौरान नशे में धुत लोग हंगामा करते हैं, शवों के समक्ष अनुचित व्यवहार करने के साथ महिलाएं व नाबालिग वीडियो बनाते नजर आते हैं, जिससे श्मशान की पवित्रता भंग होती है.
श्री काशी विधिवत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडे ने इसे शास्त्रों के खिलाफा बताया है. उन्होंने कहा कि, शास्त्रों में महिलाओं और बच्चों को श्माशान घाटों में प्रवेश वर्जित माना गया है.
आयोजकों ने मसाना होली पर क्या कहा?
वहीं आयोजन से जुड़े गुलशन कपूर ने तर्क देते हुए कहा कि, काशी खुद अपने आप में महाश्मशान है, जहां मौत को भी उत्सव के रूप में देखा जाता है. उनके मुताबिक, वेद और शास्त्रों के साथ-साथ तंत्र और अघोर परंपराओं में भी इसकी मान्यताएं हैं, जिस नजरिए से यह आयोजन सही है.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि, जब अन्य घाटों पर होने वाले आयोजनों में डोम राजा परिवार की भागीदारी होती है, तो यहां किस बात का विरोध किया जा रहा है. फिलहाल काशी का प्रशासन दोनों ही पक्षों की दलीलों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है, जबकि मसाना की होली को लेकर बहस तेज होते जा रही है.
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