आज 2 मार्च 2026 की दोपहर ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है. अभी-अभी आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय और तेल अवीव स्थित सैन्य मुख्यालय पर दर्जन भर ‘हाइपरसोनिक’ मिसाइलों से प्रहार किया है.
धमाके इतने भीषण थे कि यरूशलेम की धरती कई किलोमीटर तक कांप उठी. यह सीधा प्रतिशोध 28 फरवरी को इजरायली एयरस्ट्राइक में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का बताया जा रहा है.
तेहरान की जामकरान मस्जिद पर ‘इंतकाम’ का लाल झंडा लहरा रहा है. दूसरी ओर, व्हाइट हाउस से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ की सफलता का दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने ईरान के नटान्ज़ (Natanz) और फोर्डो (Fordow) परमाणु केंद्रों को मलबे के ढेर में बदल दिया है. युद्ध की यह आग अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है. यह एक ऐसी खगोलीय पटकथा की ओर बढ़ रही है, जिसके समापन के संकेत कल 3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण (Blood Moon) के दौरान मिल रहे हैं.
3 मार्च 2026: चंद्र ग्रहण का ‘कालचक्र’
ज्योतिष विज्ञान में ‘खग्रास’ यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण को हमेशा से बड़े राजनैतिक उलटफेर का प्रतीक माना गया है. पंचांग के अनुसार कल की गणना रोंगटे खड़े करने वाली है:
सूतक काल: सुबह 09:39 AM से शुरू (इस दौरान शुभ कार्य वर्जित और नकारात्मक ऊर्जा चरम पर होती है).
ग्रहण का स्पर्श: दोपहर 03:21 PM.
खग्रास (पूर्ण ग्रहण) प्रारंभ: शाम 04:35 PM.
परमग्रास (शिखर काल): शाम 05:04 PM (यही वह समय है जब चंद्रमा पूरी तरह ‘खूनी लाल’ दिखेगा).
मोक्ष (समाप्ति): शाम 06:46 PM.
नक्षत्र का खेल: कल चंद्रमा मघा और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में विचरण करेगा. मघा ‘पितरों’ और ‘सिंहासन’ का नक्षत्र है, जबकि पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी शुक्र है, जो विनाशकारी अग्नि और बड़े बदलावों का कारक है. मंगलवार को इस ग्रहण का होना युद्ध की विभीषिका को ‘अग्नि’ में घी डालने जैसा बना रहा है.
सिंह राशि में ‘राजभंग’ और तख्तापलट
आचार्य वराहमिहिर ने ‘बृहत संहिता’ में स्पष्ट लिखा है, सिंहे नृपविनाशः. अर्थात, जब सिंह राशि में ग्रहण लगता है, तो वह सीधे तौर पर ‘राजा’ या देश के सर्वोच्च शासक के अंत का संकेत है.
कल चंद्रमा सिंह राशि में केतु के साथ ग्रसित हो रहा है. ज्योतिष में केतु ‘विच्छेद’ और ‘ध्वज-भंग’ का कारक है. खामेनेई की मौत इस ग्रह दशा की पहली भौतिक सिद्धि है. लेकिन खेल यहां खत्म नहीं होता. सिंह राशि में केतु का यह ग्रहण संकेत दे रहा है कि आने वाले 41 दिनों में ईरान के भीतर कोई भी नेता सुरक्षित नहीं रहेगा. वहां की सैन्य परिषद (IRGC) और नियमित सेना के बीच खूनी संघर्ष छिड़ने वाला है, जो ईरान को कई टुकड़ों में बांट सकता है.
राहु का मायाजाल और अमेरिका का अहंकार
इस समय आकाश मंडल में एक और भयानक स्थिति बनी हुई है, कुंभ राशि में सूर्य, राहु और बुध की युति बनी है. मेदिनी ज्योतिष में राहु को ‘विदेशी शक्ति’ और ‘छद्म युद्ध’ का कारक माना जाता है. सूर्य (सत्ता) के साथ राहु का होना यह दर्शाता है कि अमेरिका (राहु) ईरान की आत्मा (सूर्य) को कुचलने के लिए किसी भी हद तक जाएगा.
बुध संवाद का ग्रह है. राहु के साथ इसकी युति ने कूटनीति का गला घोंट दिया है. यही कारण है कि आज 2 मार्च को शांति की हर कोशिश नाकाम हो गई और यरूशलेम पर मिसाइलें गिरने की खबरें आ रही हैं.
मीन में शनि-शुक्र: अर्थव्यवस्था पर खतरा
कुंडली के अंतिम भाव यानी मीन राशि (12) में शनि और शुक्र की युति है. शुक्र ‘कच्चे तेल’ और ‘वैभव’ का कारक है, जबकि शनि ‘दंड’ और ‘सीमा’ का. मीन राशि ‘मोक्ष’ और ‘व्यय’ की राशि है. शनि-शुक्र का यहां होना वैश्विक तेल बाजार (Oil Market) के ध्वस्त होने का संकेत है. कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और शिपिंग कंपनियों ने ‘रेड सी’ से अपने जहाज हटा लिए हैं.
मीन राशि धर्म की भी राशि है. शनि का यहां न्याय ईरान की उस 45 साल पुरानी मजहबी व्यवस्था का ‘अंतिम लेखा-जोखा’ कर रहा है, जो अब इतिहास बनने वाली है.
इजरायल और अमेरिका
कुंडली में मंगल अपनी स्वराशि वृश्चिक राशि में बैठा है. वृश्चिक राशि गुप्त हमलों और गहरे षड्यंत्रों की राशि है. मंगल का स्वराशि में होना इजरायल को अदम्य साहस दे रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय पर हमला होने के बावजूद, इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत तेहरान के रिहायशी इलाकों में छिपे IRGC कमांडरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
अमेरिका का ‘ट्रंप कार्ड’: राहु के प्रभाव में अमेरिका इस युद्ध को ‘लिमिटेड’ नहीं रखेगा. ट्रंप का लक्ष्य ईरान को आर्थिक रूप से 100 साल पीछे ले जाना है, ताकि ‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) स्थायी हो सके.
क्या 1979 खुद को दोहरा रहा है?
मेदिनी ज्योतिष में ‘कालचक्र’ की थ्योरी सबसे सटीक बैठती है. 1979 की इस्लामी क्रांति के समय भी राहु और शनि का प्रभाव इसी तरह की उग्र युतियों में था. आज 47 साल बाद, नियति ने फिर से वही स्थितियां पैदा की हैं, लेकिन इस बार ‘रक्त’ का रंग गहरा है. 3 मार्च का ‘ब्लड मून’ उस व्यवस्था पर पूर्णविराम लगाने आ रहा है जो 1979 में शुरू हुई थी.
आने वाले 41 दिन, क्या होगा विश्व का भविष्य?
ग्रहण का प्रभाव केवल 3 मार्च तक सीमित नहीं रहेगा. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, अगले 41 दिन (13 अप्रैल 2026 तक) अत्यंत संवेदनशील हैं:
- सत्ता का कब्रिस्तान: ईरान में ‘अंतरिम नेतृत्व’ के बीच खूनी तख्तापलट होगा.
- यरूशलेम संकट: प्रधानमंत्री कार्यालय पर हमले के बाद इजरायल अब ईरान के ‘नेवल पोर्ट्स’ (बंदरगाहों) को डुबो सकता है.
- भारत पर असर: कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत पर इसका प्रभाव पड़ेगा, और बड़े बदलाव जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं.
नियति का अंतिम हस्ताक्षर
कल 3 मार्च की रात जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में छिपकर ‘खूनी लाल’ होगा, तो वह केवल एक खगोलीय दृश्य नहीं होगा. वह उन हजारों मासूमों के लहू का प्रतिबिंब होगा जो इस सत्ता की लड़ाई में बलि चढ़ रहे हैं. ज्योतिष के अनुसार, जब मंगलवार को सिंह राशि का चंद्रमा ग्रसित होता है, तो वह एक ‘अहंकारी साम्राज्य’ की बलि लेकर ही शांत होता है.
यह भी पढ़ें- US-Israel Iran War Live: ईरान के IRGC का बड़ा दावा, इजरायल के पीएम नेतन्याहू के ऑफिस पर सुबह दागी मिसाइल
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

