दिल्ली हाई कोर्ट ने जर्मन ऑटोमोबाइल दिग्गज Volkswagen AG की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की एकल पीठ ने 12 मार्च 2026 को ये महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. दरअसल, फोक्सवैगन ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) के ट्रांसफॉर्मोशन (TRANSFORMOTION) ट्रेडमार्क को अपने पॉपुलर 4मोशन (4MOTION) मार्क से मिलता-जुलता बताते हुए रजिस्ट्रेशन का विरोध किया था.
इसको लेकर पहले ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार से शिकायत की गई थी. इसके बाद, VW ने हाई कोर्ट का रुख किया है. कोर्ट ने ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार के 2023 के फैसले को बरकरार रखा और मारुति सुजुकी को राहत दी है. अब मारुति का ये ट्रेडमार्क क्लास 12 (वाहन) में रजिस्टर हो सकेगा. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और कोर्ट ने इस विवाद को लेकर क्या कहा.
मामला क्या है?
मारुति सुजुकी ने 22 जून 2015 को ट्रेडमार्क आवेदन संख्या 2990453 दाखिल किया था. ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार ने इसे विज्ञापित किया. फोक्सवैगन ने नोटिस ऑफ अपोजिशन दायर कर दावा किया कि ‘ट्रांसफॉर्मोशन’ उनके रजिस्टर्ड मार्क ‘4मोशन’ (रजिस्ट्रेशन नंबर 1388469, 2005) से डिसेप्टिवली सिमिलर है. रजिस्ट्रार ने दिसंबर 2023 में फोक्सवैगन की आपत्ति खारिज कर मारुति के आवेदन को मंजूर किया. इसके बाद फोक्सवैगन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी.
फोक्सवैगन का तर्क
कंपनी ने कहा कि मारुति ने उनके ‘4मोशन’ को पूरा कॉपी कर केवल ‘ट्रांस’ प्रीफिक्स जोड़ दिया है. ‘4मोशन’ उनका इंटेलिजेंट ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) सिस्टम है, जो टिगुआन जैसे मॉडल्स में इस्तेमाल होता है. उन्होंने दावा किया कि इससे उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है.
मारुति सुजुकी का जवाब
मारुति ने कोर्ट में कहा कि ‘मोशन’ शब्द ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में आम है. ट्रांसफॉर्मोशन, ट्रांसफॉर्मेशन का वर्डप्ले है, जो उनके वाहनों में एनालॉग से डिजिटल स्पीडोमीटर में टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन को दर्शाता है. उन्होंने 2016 से मार्क के इस्तेमाल का प्रमाण दिया, जबकि फोक्सवैगन ने इसे 2017 में शुरू किया था.
न्यायालय का विश्लेषण
न्यायमूर्ति अरोड़ा ने कहा कि दोनों मार्क्स को पूरे रूप में देखना चाहिए. विजुअली कोई समानता नहीं है. एक में 4 न्यूमेरिक से शुरू होता है दूसरे में ट्रांस अल्फाबेट्स से. फोनेटिकली उच्चारण भी अलग हैं, ट्रांसफॉर्मोशन और फॉर्मोशन. कॉन्सेप्चुअली भी दोनों एक-दूसरे से अलग हैं.
एक AWD सिस्टम और दूसरा टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन को दर्शाता है. कोर्ट ने कहा कि मोशन ऑटो इंडस्ट्री में कॉमन टर्म है. दोनों कंपनियां भारत में स्वतंत्र और मजबूत गुडविल रखती हैं. कारें सोच-समझकर खरीदी जाती हैं, इसलिए भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है.
कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि उपभोक्ता मारुति सुजुकी के सामान को फोक्सवैगन का समझकर नहीं खरीदेंगे. उन्होंने पुराने फैसलों (जैसे कॉर्न प्रोडक्ट्स बनाम शांगरीला) का हवाला देते हुए कहा कि मार्क्स को डिसेक्ट नहीं किया जा सकता. ये फैसला मारुति सुजुकी के लिए बड़ी जीत है.