प्लेटफॉर्म डिजाइन पर उठे सवाल
जूरी ने माना कि इन कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह बनाया जो यूजर्स के लिए जोखिम भरा था. इसके बावजूद उन्होंने संभावित खतरों के बारे में कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं दी. रिपोर्ट के अनुसार, 20 साल की एक युवती जिसे केस में Kaley GM के नाम से पहचाना गया, को इससे काफी नुकसान हुआ.
भरना होगा भारी हर्जाना
इस फैसले के तहत कंपनियों को कुल 3 मिलियन डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है. इसमें Meta को 70% और YouTube को 30% रकम चुकानी होगी. युवती ने अदालत में बताया कि कम उम्र से ही सोशल मीडिया उसकी जिंदगी पर हावी हो गया था जिससे उसे एंग्जायटी, डिप्रेशन और बॉडी इमेज से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा.
टेक कंपनियों के लिए बड़ा झटका
यह फैसला उन बड़ी टेक कंपनियों के लिए झटका माना जा रहा है जिन्हें अब तक अमेरिकी कानून के एक प्रावधान के तहत काफी हद तक सुरक्षा मिलती रही थी. जूरी ने यह भी संकेत दिया है कि कंपनियों पर अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है जिससे उनकी परेशानी और बढ़ सकती है.
अपील की तैयारी में कंपनियां
फैसले के बाद दोनों कंपनियों ने इससे असहमति जताई है. Meta ने कहा है कि वह अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है जबकि YouTube की ओर से साफ किया गया है कि वे इस फैसले को चुनौती देंगे.
केस की पूरी कहानी
यह मामला तब शुरू हुआ जब Kaley और उनकी मां ने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ केस दर्ज किया. उनका आरोप था कि बचपन में ही इन ऐप्स ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया और धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ा. हालांकि, इस केस में कुछ अन्य प्लेटफॉर्म्स ने पहले ही समझौता कर लिया था.
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि Kaley ने बहुत छोटी उम्र से ही वीडियो देखना और सोशल मीडिया इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. ऐप्स के नोटिफिकेशन और लाइक्स- कमेंट्स जैसे फीचर्स उन्हें बार-बार वापस खींचते थे जिससे उनका इस्तेमाल लगातार बढ़ता गया.
आगे क्या हो सकता है?
इस फैसले को सोशल मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. अमेरिका में ऐसे हजारों मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं. अगर इसी तरह के फैसले आगे भी आते हैं तो इन कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और उन्हें अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं.
क्या बदलेंगे सोशल मीडिया ऐप्स?
अब यह सवाल उठता है कि क्या इस फैसले के बाद सोशल मीडिया ऐप्स में बदलाव देखने को मिलेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां अब अपने प्लेटफॉर्म को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठा सकती हैं. इसमें यूजर्स के लिए बेहतर कंट्रोल, स्क्रीन टाइम लिमिट और कम लुभाने वाले फीचर्स शामिल हो सकते हैं.