आज के दौर में सड़कों पर दौड़ने वाले सभी स्कूटर गियरलेस (बिना गियर वाले) होते हैं. एक्टिवा से लेकर जुपिटर तक, बस एक्सीलेटर घुमाइए और गाड़ी चल पड़ती है. लेकिन क्या आपको याद है कि एक जमाना ऐसा भी था जब बजाज चेतक, प्रिया और एलएमएल वेस्पा जैसे स्कूटरों में कार और बाइक की तरह गियर बदलने पड़ते थे?
उस समय गियर वाले स्कूटरों का ही दबदबा था. तो फिर ऐसा क्या हुआ कि ऑटोमोबाइल कंपनियों ने स्कूटरों से गियर हटा दिए दरअसल, ये बदलाव केवल एक फैशन नहीं, बल्कि राइडर्स की सहूलियत, ट्रैफिक की बदलती जरूरतों और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का नतीजा है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर पहले गियर वाले स्कूटर क्यों आते थे और अब वे पूरी तरह से बाजार से गायब क्यों हो गए?
पहले क्यों होते थे स्कूटरों में गियर?
पुराने जमाने के स्कूटरों में मुख्य रूप से मैनुअल गियरबॉक्स का इस्तेमाल किया जाता था. उस समय की तकनीक के अनुसार, कम पावर वाले इंजन से बेहतर माइलेज और भारी वजन खींचने की क्षमता (Torgue) हासिल करने के लिए गियर जरूरी थे.
इन स्कूटरों में गियर बदलने का सिस्टम हैंडल (बाएं हाथ की तरफ) पर क्लच के साथ दिया जाता था. भारी ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाना और गियर बदलना काफी थकाऊ होता था, लेकिन उस समय ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की तकनीक इतनी डेवलप और किफायती नहीं थी.
CVT तकनीक ने बदला गेम!
आज के स्कूटरों में गियर न होने का सबसे बड़ा कारण CVT (कॉन्टिनुअस वेरिएबल ट्रांसमिशन) तकनीक है. इसके बारे में जानिए-
कैसे काम करती है: इसमें पारंपरिक गियरबॉक्स की जगह दो पुली और एक रबर बेल्ट का इस्तेमाल होता है.
बदलाव: जैसे ही आप एक्सीलेटर (थ्रॉटल) बढ़ाते हैं, पुली का आकार अपने आप बदल जाता है और स्पीड के हिसाब से गाड़ी खुद ही सही गियर रेशियो चुन लेती है. इसलिए राइडर को मैन्युअल रूप से गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती.
गियरलेस स्कूटर पॉपुलर होने की वजह
आसान राइडिंग (Easy to Ride): बिना गियर वाले स्कूटर को चलाना बेहद आसान है. आपको सिर्फ एक्सीलेटर और ब्रेक पर ध्यान देना होता है. यही वजह है कि इसे हर उम्र के पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग आसानी से चला लेते हैं.
ट्रैफिक में राहत: आज के समय में शहरों में ट्रैफिक बहुत बढ़ गया है. गियरलेस स्कूटरों के कारण राइडर को बार-बार गियर बदलने और क्लच दबाने के झंझट से मुक्ति मिल गई है, जिससे ड्राइविंग प्रेशर कम होता है.
ज्यादा स्टोरेज और बेहतर डिजाइन: गियरबॉक्स हटने से स्कूटर के इंजन का साइज कॉम्पैक्ट हो गया. इससे कंपनियों को स्कूटर की सीट के नीचे (Under-seat storage) ज्यादा जगह देने और पैर रखने के लिए फ्लैट फ्लोरबोर्ड बनाने में मदद मिली.
सार: समय के साथ ग्राहकों की प्राथमिकताएं बदल गईं. लोग अब मजबूती से ज्यादा सहूलियत और आराम को पसंद करते हैं. इसी मांग को भांपते हुए कंपनियों ने गियर वाले स्कूटरों का प्रोडक्शन बंद कर दिया और ऑटोमैटिक स्कूटरों को बढ़ावा दिया, जो आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं.