एक तरफ जहां CNG कार खरीदारों की पहली पसंद बन रही है, वहीं दूसरी तरफ सीएनजी पर चलने वाले टू-व्हीलर्स को बाजार में वजूद बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. आंकड़े बता रहे हैं कि 2026 में 10 लाख से ज्यादा सीएनजी कारें बिकीं. अब कुल पैसेंजर व्हीकल में सीएनजी कारों की हिस्सेदारी 21.7 प्रतिशत हो गई है. यह आंकड़ा सबूत है कि भारत के लोग सीएनजी कार तो खूब पसंद कर रहे हैं, लेकिन बात जब मोटरसाइकिल की आती है तो वे दूरी बना लेते हैं.
दुनिया की पहली सीएनजी मोटरसाइकिल बजाज फ्रीडम 125 का उदाहरण सबसे सटीक है. बजाज ऑटो ने 5 जुलाई 2024 को बड़े जोर-शोर से फ्रीडम 125 को लॉन्च किया था. लॉन्च के समय इसे डेली कम्यूटर्स के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ उत्पाद माना जा रहा था. शुरुआती दिनों में ग्राहकों की उत्सुकता और नई तकनीक को आजमाने की चाहत ने इस बाइक को अच्छी शुरुआत भी दी. कंपनी ने डीलरशिप पर बड़ी संख्या में वाहन भेजे, जिससे शुरुआत में बिक्री के आंकड़े भी काफी उत्साहजनक लगे. लेकिन यह शुरुआती चमक ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी और जल्द ही बाजार की असलियत सामने आ गई.
गेम-चेंजर साबित नहीं हुई
बिक्री के सटीक आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि बजाज फ्रीडम 125 से ग्राहकों ने दूरी सी बना ली है. वित्त वर्ष 2025 में जहां इस सीएनजी बाइक की 74,730 यूनिट्स बिकी थीं, वहीं वित्त वर्ष 2026 में इसकी बिक्री में 76 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई. यह आंकड़ा सीधे धड़ाम होकर मात्र 17,959 यूनिट्स पर आ गया है. यह गिरावट यहीं नहीं रुकी, बल्कि नए वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में स्थिति और भी खराब हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में केवल 644 यूनिट्स और मई 2026 में मात्र 550 यूनिट्स ही बिक सकीं.
बिक्री के आंकड़ों में भारी गिरावट
इंडस्ट्री के जानकार इसके पीछे दो वजह बताते हैं. फिजिक्स के हिसाब से देखें तो कारों और मोटरसाइकिलों की बनावट में जमीन-आसमान का अंतर होता है. कारों में जगह की कोई कमी नहीं होती. मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां अपनी कारों में बड़े अंडर-फ्लोर सीएनजी टैंक लगा रही हैं, जो एक बार फुल होने पर 300 किलोमीटर से अधिक की शानदार रेंज देते हैं. वहीं, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियों ने डुअल-सिलेंडर टेक्नोलॉजी पेश की है, जिससे कार में बूट स्पेस भी सुरक्षित रहता है और सीएनजी का फायदा भी मिलता है. इसके उलट, एक बाइक में बड़े सीएनजी टैंक लगाने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जगह की भारी कमी होती है.
कारों को स्पेस और तकनीक का मिला फायदा
बाइक में सीएनजी टैंक लगाने की इसी सीमा के कारण बजाज फ्रीडम 125 जैसी बाइक्स में बहुत छोटा टैंक दिया जा सकता है. इसका सीधा असर गाड़ी की रेंज पर पड़ता है. छोटा टैंक होने का मतलब है कि सवार को बार-बार सीएनजी भरवाने के लिए पंप के चक्कर लगाने पड़ेंगे. भारत में सीएनजी पंपों पर आमतौर पर लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. एक कार चालक तो अपनी गाड़ी के एसी में बैठकर लाइन में 15-20 मिनट इंतजार कर सकता है, लेकिन एक बाइक सवार के लिए चिलचिलाती धूप या बारिश में लंबी लाइन में खड़ा होना बेहद कष्टदायक होता है. टू-व्हीलर का मुख्य उद्देश्य ही ट्रैफिक से बचकर कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है, लेकिन सीएनजी भरवाने का यह झंझट इसकी पूरी उपयोगिता और सहूलियत को ही खत्म कर देता है.
इकोनॉमिक्स भी सीएनजी मोटरसाइकिलों के खिलाफ काम कर रहा है. कारों के मामले में सीएनजी का गणित बहुत सीधा और मुनाफे वाला है. एक सीएनजी कार, अपने पेट्रोल वेरिएंट की तुलना में आमतौर पर लगभग 1 लाख रुपये महंगी होती है. लेकिन, सीएनजी और पेट्रोल की कीमतों और माइलेज में अंतर के कारण कार चालक को रनिंग कॉस्ट में प्रति किलोमीटर लगभग 3 रुपये की भारी बचत होती है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना 50-60 किलोमीटर भी कार चलाता है, तो वह बहुत जल्द सीएनजी कार पर खर्च किए गए अतिरिक्त 1 लाख रुपये की भरपाई कर लेता है. टैक्सी चालकों और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए तो यह बचत और भी ज्यादा मायने रखती है, इसलिए उनके लिए सीएनजी कार खरीदना आर्थिक रूप से सबसे समझदारी भरा फैसला होता है.
कम रेंज और लंबी लाइनों का झंझट
लेकिन जब हम यही फार्मूला बाइक पर लागू करते हैं, तो गणित पूरी तरह से बदल जाता है. आमतौर पर 100cc से 125cc सेगमेंट की पेट्रोल बाइक्स पहले से ही 60 से 70 किलोमीटर प्रति लीटर का बेहतरीन माइलेज देती हैं. ऐसे में पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी बाइक चलाने पर प्रति किलोमीटर होने वाली बचत चंद पैसों में सिमट कर रह जाती है. दूसरी ओर, सीएनजी किट और विशेष तकनीक के कारण सीएनजी बाइक की शुरुआती कीमत पेट्रोल बाइक की तुलना में काफी ज्यादा होती है. इस अतिरिक्त कीमत को वसूलने में एक आम बाइक सवार को कई साल लग जाएंगे, जो आर्थिक रूप से बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है. यही कारण है कि ग्राहक शोरूम में सीएनजी बाइक देखने तो जाते हैं, लेकिन खरीदते अपनी पुरानी और भरोसेमंद पेट्रोल बाइक ही हैं.
कारों के लिए CNG का अर्थशास्त्र
बाजार के रुझान भी इसी बात की ओर इशारा करते हैं. पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट में सीएनजी की मांग इतनी ज्यादा है कि मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई लगातार अपने नए मॉडल्स के सीएनजी वेरिएंट लॉन्च कर रही हैं. इन कंपनियों के इसी पोर्टफोलियो विस्तार ने ही सीएनजी कारों की बाजार हिस्सेदारी को रिकॉर्ड 21.7% तक पहुंचाया है. इसके ठीक उलट, टू-व्हीलर सेगमेंट में बजाज फ्रीडम 125 की बिक्री की दुर्दशा देखने के बाद कोई भी अन्य दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी सीएनजी मोटरसाइकिल बाजार में उतरने का जोखिम नहीं उठा रही है. न तो नए मॉडल लॉन्च हो रहे हैं और न ही इस दिशा में कोई बड़ा निवेश किया जा रहा है. कंपनियों ने यह भली-भांति समझ लिया है कि टू-व्हीलर के लिए पेट्रोल या फिर इलेक्ट्रिक (EV) ही भविष्य का सही रास्ता है, सीएनजी नहीं.