Maruti Suzuki Gypsy: ये दशकों से भारतीय सेना की पहचान रही है. 1991 में सेना के बेड़े में शामिल हुई ये 4×4 गाड़ी अपने हल्के वजन, कॉम्पैक्ट डिजाइन और बेहतरीन ऑफ-रोडिंग क्षमता के कारण काफी पॉपुलर रही है. सियाचिन जैसे बेहद ठंडे इलाकों से लेकर थार के तपते रेगिस्तान तक, जिप्सी ने गश्त और ट्रांसपोर्टेशन दोनों मोर्चे पर बड़ी जिम्मेदारी निभाई है. सेना की जरूरतों के अनुसार इसे खास तौर पर तैयार किया जाता था.
Tata Safari Storme GS800: इसको विशेष रूप से भारतीय सेना की कठोर आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है. जिप्सी की जगह लेने वाली ये दमदार एसयूवी 800 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है. इसमें 2.2 लीटर टर्बो-डीजल इंजन और 4×4 ड्राइव ट्रेन दी गई है. कठिन से कठिन रास्तों पर आराम, सुरक्षा और हाई पेलोड क्षमता के साथ ये सेना अधिकारियों की पसंदीदा सवारी थी.
Mahindra Scorpio Classic/Armoured: ये भारतीय सेना और सुरक्षा बलों का एक बेहद भरोसेमंद स्तंभ रही है. सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली स्कॉर्पियो में शक्तिशाली mHawk डीजल इंजन और 4×4 क्षमता होती है. चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों और संकरे पहाड़ी रास्तों पर गश्त लगाने के साथ-साथ सीनियर अधिकारियों के आवागमन में इसका बहुतायत से प्रयोग होता है. इसके कई बुलेटप्रूफ मॉडल्स का इस्तेमाल संवेदनशील सीमावर्ती और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में किया जाता है.
Nissan Patrol Jonga: ये भारतीय सेना के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक गाड़ियों में से एक है. 1969 से 1999 तक सेना में सेवाएं देने वाली ये 4×4 गाड़ी अपनी असीम ताकत के लिए प्रसिद्ध थी. JONGA नाम जबलपुर ऑर्डनेंस एंड गनकैरिज असेंबली के संक्षिप्त रूप से बना था. ऊंचे पहाड़ों, कीचड़ और दुर्गम इलाकों में भारी से भारी वजन खींचने में जोंगा का कोई मुकाबला नहीं था.
Mahindra ALSV (Armored Light Specialist Vehicle): ये भारतीय सेना की आधुनिक सामरिक क्षमताओं को दर्शाने वाला एक बेजोड़ बख्तरबंद वाहन है. इसे युद्धक्षेत्र और गश्ती अभियानों में सैनिकों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है. इसमें शक्तिशाली 3.2-लीटर डीजल इंजन, बैलिस्टिक और ब्लास्ट प्रोटेक्शन तथा सेंट्रलाइज्ड टायर इन्फ्लेशन सिस्टम मिलता है. अत्यधिक खतरनाक सीमावर्ती क्षेत्रों में बारूदी सुरंगों और गोलियों से बचाव के लिए ये वाहन सेना की ताकत बढ़ाता है.
Toyota Fortuner/Hilux: चीन सीमा पर आईटीबीपी और भारतीय सेना द्वारा टोयोटा की 4×4 फॉर्च्यूनर और हिलक्स पिकअप का व्यापक उपयोग किया जाता है. लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से नीचे तापमान और उबड़-खाबड़ रास्तों पर गश्त लगाने के लिए इन्हें खास तौर पर डिजाइन किया गया है.
Tata Sumo: इसने लंबे समय तक भारतीय सेना में MPV के रूप में एक महान सेवा दी है. विशाल केबिन और मजबूत बॉडी फ्रेम के कारण इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों के परिवहन, रसद सामग्री ले जाने और एम्बुलेंस के रूप में किया जाता था. दूर-दराज के सैन्य बेस तक राशन और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में टाटा सूमो ने बेहद विश्वसनीय और सिंपल मेंटेनेंस वाले वाहन का दायित्व निभाया है.
Mitsubishi Pajero: इसका इस्तेमाल भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बलों द्वारा भारत-चीन सीमा के सबसे दुर्गम और बर्फीले इलाकों में गश्त के लिए किया जाता रहा है. 2.8-लीटर टर्बो-डीजल इंजन और बेहतरीन 4WD सिस्टम से लैस ये एसयूवी माइनस डिग्री तापमान और पथरीले ढलानों पर बिना रुके चलती है. इसकी विश्वसनीयता, छत पर हथियार लगाने की सुविधा और मजबूती इसे अत्यधिक कठिन अभियानों में महत्वपूर्ण बनाती है.