Nissan की ई-पावर हाइब्रिड तकनीक ने एक बार फिर ऑटोमोटिव दुनिया में नया मुकाम हासिल किया है. Nissan Qashqai हाइब्रिड एसयूवी ने बिना किसी एक्सटर्नल चार्जिंग या रिफ्यूलिंग के एक ही टैंक पर 1980 किलोमीटर की दूरी तय कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बना ली है. ये उपलब्धि सिर्फ लैब टेस्ट नहीं बल्कि रियल रोड कंडीशन में हासिल की गई. कशकई के 55 लीटर के फ्यूल टैंक के हिसाब से ये एवरेज लगभग 36 किलोमीटर प्रति लीटर बैठता है, जो हाइब्रिड एसयूवी के लिए काफी प्रभावशाली आंकड़ा है.
ये रिकॉर्ड साबित करता है कि मॉडर्न हाइब्रिड सिस्टम न सिर्फ फ्यूल की बचत बल्कि लंबी दूरी की यात्रा में भी भरोसेमंद साबित हो सकते हैं. निसान की इस सफलता ने उन ग्राहकों को नया विकल्प दिया है, जो इलेक्ट्रिक ड्राइविंग का एक्सपीरिएंस चाहते हैं लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की निर्भरता से बचना चाहते हैं. आइए पूरी डिटेल जानते हैं.
कोलंबिया में रिकॉर्ड ट्रिप
ये ऐतिहासिक ड्राइव 14 से 17 जुलाई 2026 के बीच कोलंबिया में हुई. बोगोटा से शुरू होकर कैरेबियन कोस्ट तक पहुंची. बोगोटा समुद्र तल से करीब 2600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए उतरते हुए मार्ग पर रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से एनर्जी को ज्यादा सेव किया जा सका. हाईवे, सिटी ट्रैफिक और अलग-अलग रोड कंडीशन वाले इस रूट पर प्रोफेशनल ड्राइवरों ने सुचारू ड्राइविंग और स्पीड मैनेजमेंट के जरिए ई-पावर सिस्टम की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया.
कैसे काम करता है ई-पावर सिस्टम?
पारंपरिक हाइब्रिड से अलग, ई-पावर सिस्टम में पहिए सिर्फ इलेक्ट्रिक मोटर से चलते हैं. पेट्रोल इंजन पहियों को सीधे पावर नहीं देता, बल्कि सिर्फ जनरेटर की तरह काम करता है और जरूरत पड़ने पर बैटरी चार्ज करता है. इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसा स्मूथ और तुरंत रिस्पॉन्स मिलता है, जबकि रिफ्यूलिंग की सुविधा बनी रहती है. लेटेस्ट जनरेशन में 5-इन-1 मॉड्यूलर पावरट्रेन है, जिसमें मोटर, जनरेटर, इन्वर्टर और अन्य पार्ट्स एक पैकेज में समाहित हैं. रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से भी एफिशियंसी बढ़ती है.
पहले भी दिख चुकी है क्षमता
ये निसान की ई-पावर तकनीक का तीसरा बड़ा लॉन्ग-डिस्टेंस डेमोंस्ट्रेशन है. पहले यूके और तस्मानिया में भी सफल परीक्षण हो चुके हैं. कोलंबिया वाली ड्राइव पहली बार गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज हुई. निसान के कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव रिचर्ड कैंडलर ने कहा कि ये तकनीक ग्राहकों की असली जरूरतों के हिसाब से बनी है, जो एफिशिएंसी, रिफाइनमेंट और ईवी जैसा अनुभव देती है. भारत में फिलहाल ई-पावर उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में आने पर ये चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी वाले मार्केट्स के लिए अच्छा विकल्प बन सकता है.