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ऑटोमैटिक गाड़ियों का बढ़ रहा क्रेज, फिर भी 71% SUV खरीदारों ने चुना मैनुअल! जानें क्यों

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On September 4, 2026
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शहरों में बढ़ते ट्रैफिक और ऑटोमैटिक कारों की बढ़ती पॉपुलरिटी के बावजूद भारतीय खरीदारों का भरोसा अभी भी मैनुअल गियरबॉक्स पर कायम है. 2026 की पहली छमाही के आंकड़े बताते हैं कि मिड-साइज SUV सेगमेंट में 71.4% लोगों ने थ्री-पेडल मॉडल चुना, जबकि ऑटोमैटिक का हिस्सा काफी पीछे रहा. आखिर सुविधा के बावजूद खरीदार ऑटोमैटिक से दूरी क्यों बना रहे हैं? जानें कीमत, EMI और बाजार के पूरे आंकड़े.

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ऑटोमैटिक गाड़ियों का बढ़ रहा क्रेज, फिर भी 71% SUV खरीदारों ने चुना मैनुअल!Zoom

ऑटोमैटिक से ज्यादा मैनुअल SUV खरीद रहे लोग.

मिड-साइज एसयूवी मार्केट में मैनुअल गियरबॉक्स अभी भी खरीदारों की पहली पसंद बना हुआ है. बढ़ते ट्रैफिक और ऑटोमैटिक वेरिएंट्स की उपलब्धता के बावजूद ज्यादातर लोग दो-पेडल वाली कारों की जगह थ्री-पेडल मॉडल चुन रहे हैं. Jato Dynamics के आंकड़ों के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में इन एसयूवी की कुल बिक्री में मैनुअल मॉडल का हिस्सा 71.4 प्रतिशत रहा, जबकि ऑटोमैटिक का सिर्फ 28.6 प्रतिशत.

कीमत का अंतर मुख्य वजह है. पेट्रोल मैनुअल और पेट्रोल ऑटोमैटिक के बीच औसतन डेढ़ लाख रुपये का फर्क पड़ता है. मिड-साइज सेगमेंट में पहले से ही बजट खींचकर आने वाले खरीदार इस अतिरिक्त खर्च को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते. फाइनेंस पर खरीदने वालों के लिए ये अंतर मासिक EMI भी बढ़ा देता है. सुविधा के बावजूद कीमत का बोझ अभी भी भारी पड़ रहा है.

कीमत का अंतर और बजट का दबाव

मिड-साइज एसयूवी खरीदने वाले ज्यादातर लोग पहले से ही अपनी क्षमता की सीमा पर होते हैं. ऐसे में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के लिए डेढ़ लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करना कई लोगों के लिए मुश्किल साबित होता है. खरीदार को ये भी तय करना पड़ता है कि अतिरिक्त पैसे गियरबॉक्स में लगाए जाएं, बेहतर फीचर्स वाले हाइयर वेरिएंट में या किसी दूसरे पावरट्रेन में. लोन पर खरीदने वालों के लिए ऊंची कीमत सीधे ईएमआई बढ़ा देती है, जिससे मासिक बजट और प्रभावित होता है.

ट्रैफिक के बावजूद कम मांग

शहरों में बढ़ता जाम सैद्धांतिक रूप से ऑटोमैटिक कारों की मांग बढ़ा सकता है. क्लच से निजात मिलने से थकान कम होती है. फिर भी आंकड़े बताते हैं कि सुविधा अकेली कीमत के अंतर को पार नहीं कर पाई है. कई खरीदार लंबे समय से मैनुअल गाड़ियां चला रहे हैं और बदलाव के लिए पर्याप्त वजह नहीं देखते. खासकर छोटे शहरों और कस्बों में मैनुअल मॉडल को सिंपल और रखरखाव में सस्ता माना जाता है.

अलग-अलग ऑटोमैटिक तकनीकें

ऑटोमैटिक बाजार में कई विकल्प मौजूद हैं. एएमटी अपेक्षाकृत सस्ती होती है और कीमत का अंतर कम कर सकती है. वहीं सीवीटी, टॉर्क कन्वर्टर और ड्यूल-क्लच सिस्टम ज्यादा महंगे पड़ते हैं. ये तकनीकी अंतर भी खरीदारों के फैसले को प्रभावित करते हैं.

भविष्य का अनुमान और पावरट्रेन मिश्रण

क्रिसिल के सीनियर प्रैक्टिस लीडर हेमल एन ठक्कर का कहना है कि बाजार बदल रहा है और 2030 तक एसयूवी में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का हिस्सा पचास प्रतिशत से ऊपर जा सकता है. पावरट्रेन के मामले में 2026 की पहली छमाही में पेट्रोल का हिस्सा 50.8 प्रतिशत, डीजल का 31.3 प्रतिशत, सीएनजी का 10.8 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक का 7.1 प्रतिशत रहा है.

About the Author

Ram Mohan MishraSenior Sub Editor

राम मोहन मिश्र डिजिटल मीडिया के ऑटोमोटिव जगत में एक जाना-पहचाना नाम हैं, जो 2021 से लगातार इसी फील्ड में एक्टिव हैं. वर्तमान में न्यूज़18 हिंदी में बतौर सीनियर सब-एडिटर ऑटो डेस्क संभालते हुए, वे कार, बाइक और स्…

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।