नई दिल्ली. शराब पीने वाले लोगों के लिए किसी पार्टी से निकलकर घर पहुंचना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता. कई लोगों को एक डेजिगनेटेड ड्राइवर रखना पड़ता है तो कइयों को टैक्सी करनी पड़ती है. क्योंकि नशे में गाड़ी चलाई तो अपने साथ-साथ दूसरों की जान में भी खतरे में डालेंगे. इसके अलावा भारी-भरकर चालान का तो डर रहता ही है. लेकिन लड़कियों के लिए तो नशे में टैक्सी यूज करना भी सुरक्षा कारणों से एक बड़ा चैलेंज होता है. ऐसे में लगता है कि दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की रोबोटैक्सी इन सभी समस्याओं का सामाधान है. मस्क ने सेल्फ ड्राइविंग कारों के बाजार में बड़ा दांव लगाया है. टेस्ला ने अमेरिका के टेक्सास स्थित ऑस्टिन की सड़कों पर दर्जनों साइबरकैब उतारी हैं. खास बात यह है कि इन कारों में न स्टीयरिंग व्हील है और न ही ब्रेक पैडल. यानी सफर के दौरान यात्री के पास जरूरत पड़ने पर खुद कार को चलाने या रोकने का कोई सीधा तरीका नहीं होगा.
टेस्ला की इन कारों को साइबरकैब और रोबोटैक्सी कहा जा रहा है. इनका मकसद बिना ड्राइवर के यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है. यानी गाड़ी में बैठे सारे लोग बिना कार ड्राइव करने की चिंता के एक-दूसरे बातचीत कर सकते हैं. नशे की हालात में इस कैब से बिना सेफ्टी और चालान की चिंता किए घर पहुंच सकते हैं कंपनी इन टैक्सियों की सर्विस अन्य शहरों में भी शुरू करने की तैयारी कर रही है. हालांकि, इस तकनीक के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कार को खुद चलाना नहीं, बल्कि यात्रियों का भरोसा जीतना भी है.
टेस्ला ने खुद कहा, न स्टीयरिंग, न ब्रेक
साइबरकैब की पेशकश से पहले टेस्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, “कोई स्टीयरिंग व्हील नहीं, कोई ब्रेक पैडल नहीं.” इसका मतलब साफ है कि कार के अंदर बैठे यात्री के पास इमरजेंसी की स्थिति में ड्राइविंग कंट्रोल अपने हाथ में लेने का विकल्प नहीं होगा. अभी यह साफ नहीं है कि मस्क इस सर्विस को कितनी तेजी से दूसरे शहरों तक पहुंचाना चाहते हैं. हालांकि, टेस्ला पर इस तकनीक को तेजी से बाजार में उतारने का दबाव है.
शेयरों में भी आया उछाल
टेस्ला के वाहनों की बिक्री में गिरावट के बीच कंपनी के शेयरों पर दबाव देखा गया था. लेकिन साइबरकैब की लॉन्चिंग के बाद शेयर में 5% से ज्यादा की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि सेल्फ ड्राइविंग और रोबोटैक्सी टेस्ला के कारोबार को नई दिशा दे सकती है. मस्क लंबे समय से सेल्फ ड्राइविंग को टेस्ला के भविष्य का अहम हिस्सा बताते रहे हैं. कंपनी की कोशिश है कि कार बेचने के बजाय एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाए, जिसमें टेस्ला की कारें खुद यात्रियों को ले जाएं और कमाई करें.
वेमो से सीधा मुकाबला
रोबोटैक्सी के बाजार में टेस्ला का सबसे बड़ा मुकाबला वेमो से है. लेकिन फिलहाल टेस्ला वाहनों की संख्या और राइड के मामले में वेमो से काफी पीछे है. टेस्ला को बाजार में बराबरी करने के लिए यह साबित करना होगा कि उसकी सेल्फ ड्राइविंग तकनीक वास्तविक सड़कों पर सुरक्षित तरीके से काम कर सकती है. खासकर पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और अचानक सामने आने वाली परिस्थितियों से निपटना इस तकनीक के लिए बड़ी चुनौती है.
टेस्ला सिर्फ कैमरों पर निर्भर
टेस्ला की सेल्फ ड्राइविंग तकनीक का एक बड़ा अंतर यह है कि कंपनी मुख्य रूप से कैमरों पर आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करती है. वहीं वेमो और अमेजन की जूक्स जैसी दूसरी कंपनियां कैमरों के साथ रडार और लिडार का भी इस्तेमाल करती हैं. लिडार तकनीक लेजर की मदद से आसपास की वस्तुओं और उनकी दूरी का पता लगाने में मदद करती है. यही वजह है कि टेस्ला को अपनी कैमरा आधारित तकनीक की सुरक्षा और क्षमता को लेकर बाजार का भरोसा जीतना होगा.
अमेरिकी यात्रियों को भरोसा दिलाना बड़ी चुनौती
तकनीक काम करने के बावजूद टेस्ला के सामने सबसे बड़ा सवाल लोगों की मानसिकता का है. बिना ड्राइवर वाली कार में बैठने को लेकर अभी भी बड़ी संख्या में अमेरिकी सहज नहीं हैं. फरवरी में प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे में पाया गया कि 10 में से 7 अमेरिकी वयस्क बिना ड्राइवर वाली कार में बैठने को लेकर बिल्कुल सहज नहीं हैं या बहुत कम सहज महसूस करते हैं. यानी मस्क के सामने चुनौती सिर्फ रोबोटैक्सी को सड़क पर उतारने की नहीं है. उन्हें लोगों को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि जिस कार में उनके पास स्टीयरिंग और ब्रेक का कंट्रोल नहीं है, वह जरूरत पड़ने पर इंसान से बेहतर तरीके से फैसला लेकर सुरक्षित मंजिल तक पहुंच सकती है.