Maruti Suzuki India Ltd ने सोमवार को अपने कुछ चुनिंदा कार मॉडल्स की कीमतों में 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. ये बढ़ोतरी सितंबर 2026 से लागू होगी. कंपनी ने इनपुट कॉस्ट में लगातार हो रही वृद्धि और महंगाई के दबाव को इसका मुख्य कारण बताया है. ये मई के बाद से कंपनी की तीसरी कीमत वृद्धि है. पहले की दो बढ़ोतरी पूरे पोर्टफोलियो पर लागू हुई थीं, जबकि इस बार सिर्फ चुनिंदा मॉडल्स पर असर पड़ेगा.
कंपनी ने कहा कि वह लागत कम करने के उपाय लगातार कर रही है, लेकिन महंगाई और बढ़ती लागतों के चलते अब कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है. इस घोषणा के बाद मुंबई बाजार में गिरावट के बावजूद मारुति के शेयर हरे निशान में रहे. इसके साथ ही टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कार कंपनियों ने भी हाल ही में कीमतें बढ़ाई हैं.
प्राइस हाइक का कारण और कंपनी का बयान
मारुति सुजुकी ने नियामकीय फाइलिंग में स्पष्ट किया कि इनपुट कॉस्ट में निरंतर वृद्धि के कारण चुनिंदा मॉडल्स पर 20,000 रुपये तक कीमत बढ़ाई जा रही है. कंपनी पिछले कुछ समय से लागत नियंत्रण के प्रयास कर रही है, लेकिन महंगाई का स्तर ऊंचा बना हुआ है. इसलिए प्रभाव को न्यूनतम रखते हुए कुछ बोझ बाजार पर डालना आवश्यक हो गया है.
शेयर बाजार पर असर
घोषणा के बाद मारुति सुजुकी के शेयर 0.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 12,770 रुपये पर कारोबार कर रहे थे. जबकि सेंसेक्स में लगभग 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. बाजार में नकारात्मक माहौल के बावजूद कंपनी के शेयर में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है.
अन्य कंपनियों की कीमत वृद्धि
इस कदम से कुछ दिन पहले ही टाटा मोटर्स और हुंडई ने भी कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था. टाटा मोटर्स ने 25,000 रुपये तक की वृद्धि का उल्लेख किया है. तीनों प्रमुख कंपनियां इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन संबंधी दबावों का हवाला दे रही हैं.
कंपनी की मॉडल रेंज
मारुति की एरिना रेंज में एस-प्रेसो, ऑल्टो के10, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, ब्रेजा, अर्टिगा और विक्टोरिस शामिल हैं. नेक्सा रेंज में ई-विटारा, इनविक्टो, जिम्नी, एक्सएल6, ग्रैंड विटारा, फ्रोंक्स और बलेनो उपलब्ध हैं. कंपनी ने अभी ये स्पष्ट नहीं किया कि किन-किन मॉडल्स पर नई कीमत लागू होगी.
CEO का स्थानीयकरण पर जोर
मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने हाल में ऑटोमोटिव सप्लाई चेन में गहरे स्थानीयकरण की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के बाद भारत विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है. लागत के साथ-साथ विश्वसनीयता और निरंतरता भी अब महत्वपूर्ण हो गई हैं. स्थानीयकरण से बाहरी व्यवधान कम होंगे और घरेलू क्षमताओं को मजबूत किया जा सकेगा.