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क्या Gen AI बच्चों की क्रिएटिविटी पर लगा रहा ब्रेक? स्कूलों में बैन पर बहस

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On September 14, 2026
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  • शोध में पाया गया AI उपयोग से परीक्षा अंक कम हो रहे हैं.

बच्चे आज किताबों के साथ AI टूल्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. मैथ्स के सवाल हों, साइंस की तैयारी हो या किसी प्रोजेक्ट के लिए आइडिया चाहिए, Gen AI कुछ ही सेकंड में जवाब दे देता है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि हर चीज का तुरंत जवाब मिलने से बच्चों की खुद सोचने और समस्या हल करने की क्षमता बढ़ती है या कम हो सकती है.

इसी बहस के बीच न्यूयॉर्क सिटी ने स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए जनरेटिव AI के इस्तेमाल पर बड़ा फैसला लिया है. न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने छात्रों के लिए ज्यादातर स्टूडेंट-फेसिंग जनरेटिव AI टूल्स पर एक साल की रोक की घोषणा की है. तो आइए जानते हैं कि क्या सच में Gen AI बच्चों की क्रिएटिविटी पर ब्रेक लगा रहा है.

न्यूयॉर्क के स्कूलों में बच्चों के लिए AI पर रोक

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने 2 सितंबर को पब्लिक स्कूलों में कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए ज्यादातर स्टूडेंट-फेसिंग जनरेटिव AI टूल्स पर एक साल की रोक की घोषणा की. इस फैसले के तहत AI ट्यूटर और ऐसे सॉफ्टवेयर, जिनमें छात्रों के लिए जनरेटिव AI फीचर्स मौजूद हैं, इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे. ChatGPT और Claude जैसे चैटबॉट्स भी इस रोक के दायरे में होंगे. स्कूल डिस्ट्रिक्ट पहले से इस्तेमाल हो रहे 38 से ज्यादा प्रोग्राम्स के AI फीचर्स को बंद करेगा या हटा देगा, अगर वे नए सुरक्षा और निगरानी मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं. 

क्यों लिया ऐसा फैसला?

ममदानी का मानना है कि बच्चों के लिए टीचर और दूसरे छात्रों के साथ जुड़कर सीखना जरूरी है. हर सवाल का जवाब AI से तुरंत मिल जाने के बजाय बच्चों को खुद सोचने और जवाब खोजने का मौका मिलना चाहिए. इस फैसले का मकसद बच्चों की क्रिटिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम-सॉल्विंग और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देना है. मेयर ने यह भी सवाल उठाया कि स्कूलों में AI का इस्तेमाल सच में जरूरी है या टेक इंडस्ट्री इसे जरूरत से ज्यादा जरूरी बना रही है. 

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क्या सच में Gen AI बच्चों की क्रिएटिविटी पर ब्रेक लगा रहा है?

Gen AI से बच्चे अपना होमवर्क जल्दी पूरा कर सकते हैं, लेकिन इससे उनकी सीखने की क्षमता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के शोधकर्ताओं की एक स्टडी में पाया गया कि करीब छह महीने तक AI का इस्तेमाल करने वाले छात्रों के होमवर्क स्कोर 18 प्रतिशत बढ़े, लेकिन उनके क्लोज्ड-बुक एग्जाम स्कोर 20 प्रतिशत कम हो गए. 

क्या भारत में भी AI पर बैन जरूरी है?

भारत में स्कूलों में जनरेटिव AI के इस्तेमाल को लेकर नीतियां अभी विकसित हो रही हैं. ऐसे में न्यूयॉर्क का फैसला यहां भी बहस का विषय बन सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक तरफ कम उम्र के बच्चों को AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होने से बचाने की चिंता है, तो दूसरी तरफ बच्चों को बदलती टेक्नोलॉजी और उसके सही इस्तेमाल के बारे में समझाना भी जरूरी है. 

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।