- GalaxEye को ऑप्टिकल-रडार सिंक्रोनाइज इमेजिंग टेक्नोलॉजी का अमेरिकी पेटेंट मिला.
भारत के स्पेस टेक स्टार्टअप GalaxEye ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने ऐसी सैटेलाइट इमेजिंग टेक्नोलॉजी के लिए अमेरिकी पेटेंट हासिल किया है, जो ऑप्टिकल और रडार सेंसर को एक साथ सिंक्रनाइज करने का काम करती है. कंपनी के मुताबिक, इससे एक ही जगह की दोनों तरह की तस्वीरें एक ही समय पर और सही तरीके से हासिल की जा सकती हैं. तो आइए जानते हैं कि भारत के GalaxEye की नई सैटेलाइट इमेजिंग टेक्नोलॉजी क्यों खास है.
क्या है GalaxEye की नई टेक्नोलॉजी?
GalaxEye का पेटेंट एक ऐसी प्रणाली से जुड़ा है, जिसमें सैटेलाइट के ऑप्टिकल और रडार सेंसर को सिंक्रनाइज किया जाता है. ऑप्टिकल सेंसर कैमरे की तरह काम करता है और सड़क, इमारत, पेड़-पौधे और पानी जैसी चीजों की तस्वीरें ले सकता है. हालांकि, इसकी एक सीमा यह है कि इसे रोशनी की जरूरत होती है और बादल इसके काम में रुकावट डाल सकते हैं. वहीं, Synthetic Aperture Radar यानी SAR माइक्रोवेव सिग्नल की मदद से जमीन का निरीक्षण करता है. यह दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है और बादलों के पार भी जानकारी हासिल कर सकता है.
GalaxEye की नई सैटेलाइट इमेजिंग टेक्नोलॉजी क्यों खास है?
अलग-अलग सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरें कई बार अलग समय या अलग एंगल से ली जाती हैं. ऐसे में दोनों डेटा को सटीक तरीके से मिलाना मुश्किल हो सकता है. GalaxEye की पेटेंटेड टेक्नोलॉजी एक ही प्लेटफॉर्म पर दोनों सेंसर को सिंक्रनाइज करके इसी समस्या को हल करने के लिए डिजाइन की गई है. इससे एक ही जगह की समय और स्थान के हिसाब से बेहतर तरीके से मिलती-जुलती इमेज मिल सकती हैं.
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बढ़ रहा है सैटेलाइट इमेजिंग का मार्केट
इस टेक्नोलॉजी की जरूरत इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल सुरक्षा, खेती, बीमा और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है. SkyQuest Technology के अनुसार, ग्लोबल कमर्शियल सैटेलाइट इमेजिंग मार्केट 2024 में 6.55 अरब डॉलर का था और 2033 तक इसके 20.15 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
30 सैटेलाइट का प्लान
GalaxEye ने अब तक करीब 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. कंपनी अगले पांच साल में 30 सैटेलाइट का कॉन्स्टेलेशन बनाने की योजना पर काम कर रही है. मई 2026 में लॉन्च किए गए मिशन दृष्टि के जरिए कंपनी ने अपनी OptiSAR टेक्नोलॉजी को स्पेस तक पहुंचाया था. GalaxEye ने अगस्त में बेंगलुरु की StarOps कंपनी को खरीदा. इससे सैटेलाइट बनाने और उसके सिस्टम तैयार करने की अपनी क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी.भारत को उम्मीद है कि अगले 10 साल में देश का कमर्शियल स्पेस सेक्टर करीब 44 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
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