अब फोन पर आने वाली हर अनजान कॉल के पीछे इंसान ही हो, ऐसा बिलकुल जरूरी नहीं है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे वॉयस एजेंट तैयार किए जा रहे हैं जो इंसानों की तरह बातचीत कर सकते हैं, सवालों के जवाब दे सकते हैं और सामने वाले से जानकारी हासिल कर सकते हैं. यही तकनीक बैंक, इंश्योरेंस और डिलीवरी कंपनियां भी इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में असली और फर्जी कॉल के बीच अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है.
हर AI कॉल स्पैम नहीं होती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, AI से की गई कॉल को सीधे स्पैम या स्कैम मानना सही नहीं है. मसलन, बैंक किसी ग्राहक को EMI की याद दिलाने, इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी रिन्यू कराने और डिलीवरी कंपनी पता कन्फर्म करने के लिए ऑटोमेटेड वॉयस एजेंट का इस्तेमाल कर सकती है.
यही वजह है कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ऑटोमेटेड बिजनेस कॉल्स को अलग तरीके से पहचानने के लिए नए नियम तैयार कर रही है. इस नई व्यवस्था में कंपनियों को अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को ये बताना होगा कि वे ऑटोमेटेड यानी A2P (Application-to-Person) कॉल कर रही हैं.
AI कैसे पकड़ता है संदिग्ध कॉल?
जानकारी के लिए बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां सिर्फ आवाज नहीं सुनतीं हैं बल्कि कॉलिंग पैटर्न और दूसरे चीजों को भी एनलाइज करती हैं. कोई नंबर बड़ी संख्या में कॉल कर रहा है लगातार ऐसे लोगों को फोन कर रहा है जिनसे उसका कोई स्पष्ट संबंध नहीं है या उसके खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें मिल रही हैं तो उसे संदिग्ध माना जा सकता है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में AI आधारित सिस्टम ने करीब 22.99 अरब इनकमिंग कॉल्स को संभावित स्पैम के तौर पर चिह्नित किया गया है.
नंबर देखकर न करें भरोसा
आपको बता दें कि किसी कॉल के स्क्रीन पर दिखने वाला नंबर असली होने की गारंटी नहीं है. ठग Caller ID को भी स्पूफ कर सकते हैं और कॉल को किसी भरोसेमंद संस्था के नंबर जैसा दिखा सकते हैं. इसलिए अगर कोई कॉल बैंक, पुलिस, सरकारी विभाग या किसी कंपनी के नाम पर आए और आपसे संवेदनशील जानकारी मांगे तो सिर्फ नंबर देखकर उस पर भरोसा न करें.
यह भी पढ़ें: ChatGPT हिस्ट्री डिलीट करने पर डेटा कहां जाता है? समझें AI चैट का पूरा सिस्टम
भारत में अलग-अलग तरह की बिजनेस कॉल के लिए 140 और 1600 सीरीज जैसे नंबरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, इनसे भरोसा बढ़ सकता है लेकिन इन्हें भी सावधानी बरतने का ऑप्शन नहीं माना जाना चाहिए.
AI आवाज और AI स्कैम में फर्क समझें
ये जरूरी नहीं कि AI आवाज का मतलब स्कैम हो. कुछ स्मार्टफोन और Caller ID सर्विसेज ये पहचानने की कोशिश कर रही हैं कि सामने वाला इंसान है या AI-generated voice इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन AI आवाज की पहचान और धोखाधड़ी की पहचान दो अलग चीजें हैं.
फोन उठाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अनजान कॉल पर OTP, UPI PIN, कार्ड नंबर, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा न करें. अगर कॉल करने वाला जल्दबाजी करने, डराने या तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए तो कॉल काटकर संबंधित बैंक या कंपनी के ऑफिशियल नंबर पर खुद संपर्क करें. याद रखें, AI से बनी आवाज सुनकर ही किसी कॉल को असली या फर्जी तय नहीं किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें:
10,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Redmi का नया फोन! जानें फीचर्स और कीमत