रुपया @91: सान्याल बोले-डरने की बात नहीं, चीन-जापान का दिया उदाहरण

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने गुरुवार को कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये में आई बड़ी गिरावट को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं है और इसे आर्थिक परेशानी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि जो देश तेज़ी से बढ़ रहे होते हैं, वहां अक्सर विनिमय दर में कमजोरी देखी जाती है, और ऐसा पहले जापान और चीन के साथ भी हुआ है.

सान्याल ने एक कार्यक्रम में कहा कि 1990 के दशक के बाद से रुपये को काफी हद तक बाजार के हिसाब से ही चलने दिया गया है. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है. उन्होंने कहा, मैं रुपये को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हूं. रुपये की मौजूदा कमजोरी को किसी आर्थिक चिंता से जोड़ना सही नहीं है. इतिहास बताता है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं अक्सर विनिमय दर की कमजोरी के दौर से गुजरती हैं.

चीन-जापान की मुद्रा भी रही हैं कमजोर

सान्याल ने कहा, जब जापान की अर्थव्यवस्था बहुत तेज़ी से बढ़ रही थी, तब उसकी विनिमय दर को काफी कमजोर रखा गया था. चीन में भी 1990 और 2000 के दशक में ऐसा ही देखा गया था. रुपया मंगलवार को पहली बार 91 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार करते हुए अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इस पर सान्याल ने कहा, रुपये का कमजोर होना अपने आप में कोई नकारात्मक संकेत नहीं है, जब तक इससे घरेलू महंगाई न बढ़े. अभी ऐसा नहीं हो रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, इस साल दो अप्रैल को अमेरिका द्वारा शुल्क बढ़ाने के बाद से रुपया डॉलर के मुकाबले 5.7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे खराब प्रदर्शन है. हालांकि, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की उम्मीदों से बीच-बीच में रुपया मजबूत भी हुआ है.

ट्रेड डील में राष्‍ट्रीय हित सर्वोपरी

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर सान्याल ने कहा कि भारत यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, लेकिन इसमें राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर रहेगा. उन्होंने कहा, कुछ मामलों में समझौते के लिए कुछ समझौते करने पड़ेंगे, लेकिन हम यह सुनिश्चित करेंगे कि फैसले देश के हित में हों. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के मामले में भारत ने किसी भी मुद्दे को बढ़ाया नहीं है. हमने सावधानी बरती है, लेकिन झुके नहीं हैं. सान्याल ने कहा कि चीन और भारत ही ऐसे दो देश हैं जो अमेरिकी दबाव के आगे सच में नहीं झुके हैं.

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