बाढ़ या भारी बारिश के दौरान कार या बाइक डैमेज होना आम बात है. भारत में मानसून के मौसम में जलभराव और बाढ़ से हजारों वाहन प्रभावित होते हैं. अगर आपके पास कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस है, तो बाढ़ से हुए नुकसान का क्लेम किया जा सकता है. थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस सिर्फ दूसरों के नुकसान को कवर करता है, अपने वाहन को नहीं.
इसलिए पॉलिसी की जांच जरूरी है. सही प्रोसेस अपनाकर क्लेम आसानी से मिल सकता है. इंजन प्रोटेक्ट एड-ऑन होने पर इंजन की क्षति भी कवर होती है. समय पर सूचना देना और सबूत रखना सबसे महत्वपूर्ण है. देरी या गलत कदम से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. नीचे दिए गए टिप्स से आप जान सकते हैं कि बाढ़ से प्रभावित गाड़ियों के लिए क्लेम कैसे फाइल करें और उस समय किन सावधानियों को बरतें.
वाहन को स्टार्ट न करें
पानी में डूबे वाहन को कभी भी स्टार्ट न करें. इससे इंजन में हाइड्रोस्टेटिक लॉक हो सकता है, जो अतिरिक्त नुकसान माना जाता है और क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. वाहन को वैसे ही छोड़ दें और टोइंग की व्यवस्था करें.
बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें
घटना के 24-48 घंटे के अंदर कंपनी को हेल्पलाइन, ऐप या वेबसाइट से सूचित करें. पॉलिसी नंबर, जगह, तारीख और नुकसान का विवरण दें. देरी करने से क्लेम प्रभावित हो सकता है.
फोटो और वीडियो लें
क्षतिग्रस्त वाहन की अलग-अलग कोणों से तस्वीरें और वीडियो लें. पानी का स्तर, इंजन, डैशबोर्ड, सीटें और बाहरी हिस्से दिखाएं. ये सबूत सर्वे में मदद करते हैं.
जरूरी दस्तावेज तैयार रखें
पॉलिसी कॉपी, आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, क्लेम फॉर्म, फोटो-वीडियो और जरूरत पड़ने पर एफआईआर रखें. अगर वाहन बह गया हो तो पुलिस रिपोर्ट अनिवार्य है.
सर्वेयर से निरीक्षण करवाएं
कंपनी सर्वेयर भेजेगी. निरीक्षण से पहले कोई मरम्मत न कराएं. रिपोर्ट के आधार पर क्लेम मंजूर होता है. कैशलेस सुविधा वाले नेटवर्क गैरेज में मरम्मत करवाएं.
क्लेम सेटलमेंट का इंतजार करें
सर्वे रिपोर्ट के बाद कंपनी क्लेम प्रोसेस करती है. IRDAI नियमों के अनुसार समय पर सेटलमेंट होना चाहिए. अगर वाहन टोटल लॉस घोषित हो तो आईडीवी मिलता है.
इन कदमों से बाढ़ से क्षतिग्रस्त कार या बाइक का इंश्योरेंस क्लेम आसानी से मिल जाता है. हमेशा पॉलिसी की शर्तें जांचें और समय पर कार्रवाई करें. ऐसा करने से क्लेम मिलने की संभावना बढ़ जाती है.