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अमेरिका से लेकर भूटान तक, E20 Petrol में कहां मिलाया जा रहा कितना एथेनॉल? देखिए पूरी लिस्ट

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By Aman Shanti .In On July 14, 2026
1 min read 1.2k views
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दुनिया भर में फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए बायोएथेनॉल ब्लेंडिंग तेजी से बढ़ रही है.पेट्रोल में बायोएथेनॉल मिलाने से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, बल्कि किसानों की आय बढ़ती है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है. वैश्विक स्तर पर विभिन्न देश अपनी-अपनी जरूरतों, संसाधनों और नीतियों के अनुसार एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य तय कर रहे हैं. भारत इस क्षेत्र में काफी बेहतर कर रहा है. यहां वर्तमान में E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) लागू है और 2030 तक E30 का लक्ष्य रखा गया है.

ब्राजील तो इस मामले में वर्ल्ड लीडर है, जहां E30 के साथ-साथ E100 (प्योर एथेनॉल) का भी व्यापक उपयोग होता है. अमेरिका, यूरोपीय संघ और एशिया के कई देश भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं. हालिया आंकड़ों के अनुसार, कई विकासशील देश भी E10 या इससे ऊपर के स्तर पर पहुंचने की दिशा में काम कर रहे हैं.

भारत की प्रगति

भारत सरकार के सतत प्रयासों के फलस्वरूप E20 ब्लेंडिंग पहले ही लागू हो चुकी है. इससे पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम हुई है और किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है. 2030 तक E30 पहुंचने का लक्ष्य देश को ऊर्जा स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. भारत की ये नीति वैश्विक स्तर पर उदाहरण बन रही है.

ब्राजील: दुनिया में नंबर-1

ब्राजील बायोएथेनॉल ब्लेंडिंग में सबसे आगे है. यहां E30 के साथ E100 (प्योर एथेनॉल) का यूज़ भी आम है. ब्राजील की सफलता की वजह उसकी विशाल गन्ना उत्पादन क्षमता और लंबे समय से चली आ रही मजबूत पॉलिसी है. देश ने जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) की जगह स्वदेशी ईंधन को बढ़ावा देकर ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति लाई है.

अमेरिका और यूरोप की स्थिति

अमेरिका में E10 और E15 लेवल तक की ब्लेंडिंग होती है. ये देश अपनी कृषि उत्पादकता का लाभ उठाते हुए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं. यूरोपीय संघ (EU) के 19 सदस्य देशों में E10 उपलब्ध है. ब्रिटेन में भी E10 लागू किया जा चुका है. यूरोप पर्यावरण मानकों को सख्ती से लागू करते हुए ब्लेंडिंग टार्गेट हासिल कर रहा है.

एशिया और अन्य क्षेत्र

जापान ने 2030 तक E10 और 2040 तक E20 का लक्ष्य रखा है. नेपाल में E10 पहले से लागू है. थाईलैंड, फिलीपींस और वियतनाम में भी E10 या इससे ऊपर के लेवल पर पॉलिसी बनाई जा रही हैं. इंडोनेशिया गैसोलिन आयात में E3 की अनुमति देता है.

लैटिन अमेरिका में कोलंबिया, उरुग्वे, पेरू, अर्जेंटीना और पैराग्वे अलग-अलग लेवल (E7.8 से E30) पर ब्लेंडिंग कर रहे हैं. अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया, अंगोला, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे और मलावी में भी E10 या E20 के लक्ष्य हैं. कनाडा में प्रांतों के अनुसार E5 से E12 तक ब्लेंडिंग होती है.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।