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EV Battery Replacement Cost: खराब हुई बैटरी बदलने में कितना खर्च? जानें Tata, MG, BYD की वारंटी और असली सच

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 8, 2026
5 min read 1.2k views
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क्या इलेक्ट्रिक कार की बैटरी खराब होते ही लाखों रुपये का झटका लगता है? यही डर कई लोगों को EV खरीदने से रोकता है. लेकिन असली तस्वीर कुछ और है. भारत में ज्यादातर कंपनियां 8 साल तक की बैटरी वारंटी दे रही हैं, जबकि कई मामलों में पूरी बैटरी बदलने की जरूरत भी नहीं पड़ती. जानिए Tata, Mahindra, MG और BYD जैसी कंपनियों की बैटरी लागत, लाइफ और रिपेयर का पूरा सच.

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क्या EV की बैटरी खराब होते ही लग जाता है लाखों का चूना? जानिए सच्चाईZoom

क्या EV की बैटरी खराब होने से लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं? जानिए

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती पॉपुलरिटी के साथ सबसे बड़ा सवाल यही है कि बैटरी खराब होने पर खर्च कितना आएगा? क्या सच में नई कार जितना बिल आ जाएगा? कई संभावित खरीदार इसी डर से पीछे हट जाते हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़ों और ब्रांड्स की पॉलिसी को समझने के बाद तस्वीर काफी साफ हो जाती है. भारत में ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर (जो पहले हो) की वारंटी के साथ आती है.

इस दौरान अगर बैटरी की क्षमता 70% से नीचे चली जाए, तो ज्यादातर कंपनियां मुफ्त रिप्लेसमेंट या रिपेयर का प्रावधान रखती हैं. टाटा मोटर्स कुछ प्रीमियम मॉडल्स (जैसे Nexon EV 45 kWh, Curvv EV, Harrier EV) पर 15 साल की लाइफटाइम बैटरी वारंटी (अनलिमिटेड किलोमीटर, पहले मालिक के लिए) दे रही है. महिंद्रा और अन्य ब्रांड्स भी 8 साल/1.6 लाख किमी की स्टैंडर्ड वारंटी देते हैं. MG, Hyundai और BYD जैसी कंपनियों की वारंटी भी इसी के आसपास है.

वारंटी नहीं, तो कितना खर्च?

वारंटी के बाहर रिप्लेसमेंट का खर्च मॉडल और बैटरी साइज पर निर्भर करता है. छोटी कारों (Tata Tiago EV, Punch EV, MG Comet) में 25-30 kWh बैटरी का खर्च ₹3 लाख से ₹5 लाख तक हो सकता है. मिड-साइज SUV जैसे Tata Nexon EV (30-45 kWh) के लिए ₹3.5 लाख से ₹6-7 लाख का अनुमान है. बड़े या प्रीमियम मॉडल्स (MG ZS EV, BYD Atto 3 आदि) में ₹5 लाख से ₹9-12 लाख तक जा सकते हैं. प्रति kWh लागत अभी ₹15,000-20,000 के आसपास है. हालांकि, ग्लोबल स्तर पर बैटरी कीमतें तेजी से गिर रही हैं.

कब खराब होती है बैटरी?

वास्तविकता ये है कि बैटरी अचानक पूरी तरह खराब नहीं होती. मॉडर्न लिथियम-आयन बैटरियां सही इस्तेमाल (30-80% चार्ज रखना, तेज धूप से बचाना, नियमित सर्विसिंग) पर 8-12 साल या 1.5-2 लाख किमी आसानी से चल जाती हैं. रियल-वर्ल्ड डिग्रेडेशन 10-20% तक रहता है. कई केस में पूरी बैटरी बदलने की बजाय कुछ सेल्स रिपेयर से काम चल जाता है, जिसका खर्च ₹50,000-1.5 लाख तक हो सकता है.

बदल रही तकनीक

टाटा, महिंद्रा जैसी कंपनियां बैटरी पैक को मॉड्यूलर बनाती जा रही हैं, जिससे भविष्य में रिपेयर आसान और सस्ता होगा. इंश्योरेंस में बैटरी प्रोटेक्शन ऐड-ऑन लेने से अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है. लंबे समय में पेट्रोल-डीजल की बचत (प्रति वर्ष ₹50,000-1 लाख तक) और कम मेंटेनेंस (ब्रेक, ऑयल चेंज जैसी चीजें नहीं) बैटरी खर्च को ऑफसेट कर देते हैं.

सार: नई EV खरीदते समय बैटरी वारंटी की डिटेल्स, सर्विस नेटवर्क और बैटरी हेल्थ रिपोर्टिंग सिस्टम (BMS) को जरूर चेक करें. सही मॉडल और इस्तेमाल से लाखों का बिल लगने की आशंका बहुत कम है. EV का भविष्य साफ है- बैटरी टेक्नोलॉजी सस्ती और बेहतर हो रही है. डर की बजाय जानकारी के साथ फैसला लें.

About the Author

Ram Mohan MishraSenior Sub Editor

न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें



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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।