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Delhi-NCR में हाल ही में लॉन्च हुई VinFast सपोर्टेड Green SM EV टैक्सी सर्विस मुश्किलों में फंसती दिख रही है. कई ड्राइवरों ने आरोप लगाया है कि भर्ती के समय किए गए ₹35,000-40,000 मासिक आय के वादे पूरे नहीं हो रहे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ड्राइवर अपनी सैलरी की मांग करते नजर आ रहे हैं. आखिर क्या है पूरा विवाद, कंपनी का पक्ष क्या है और इससे EV टैक्सी सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है? जानिए पूरी कहानी.
Green SM Driver Salary Controversy: जानिए पूरा मामला.
दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर हाल ही में लॉन्च हुई वियतनाम की विनफास्ट सपोर्टेड इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस कंपनी Green SM विवादों में घिर गई है. कंपनी ने ड्राइवरों को आकर्षक ₹35,000 से ₹40,000 मासिक सैलरी का वादा करके भर्ती किया था, लेकिन अब कई ड्राइवरों का आरोप है कि सैलरी समय पर नहीं मिल रही या बहुत कम दी जा रही है.
एक वायरल इंस्टाग्राम रील में ड्राइवर चिल्लाते नजर आ रहे हैं- “सेलेरी दे दो हमारी, हमारा हक का पैसा है, कोई भीख नहीं मांग रहे.” ये विवाद दिल्ली-एनसीआर में कंपनी की शुरुआती सफलता पर सवाल उठा रहा है. ड्राइवरों का कहना है कि न्यूनतम बिजनेस गारंटी (MBG) आय के वादे पूरे नहीं हो रहे, जबकि कंपनी ने कम फेयर (₹8 प्रति किमी) और EV फ्लीट के साथ बाजार में दस्तक दी थी. यह मामला Ola-Uber जैसे प्लेटफॉर्म्स के बीच नए प्लेयर की चुनौतियों को उजागर कर रहा है.
मामला क्या है?
ग्रीन एसएम (Green and Smart Mobility) विनफास्ट की मोबिलिटी आर्म है, जो दिल्ली-एनसीआर में लगभग 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियों के साथ शुरू हुई. कंपनी ने ड्राइवरों को फिक्स्ड सैलरी, इंसेंटिव्स और स्थिर आय का लालच देकर भर्ती अभियान चलाया. कई ड्राइवरों ने इसे Ola-Uber की कमीशन-बेस्ड सिस्टम से बेहतर विकल्प माना. लेकिन लॉन्च के कुछ दिनों बाद ही पेमेंट्स में समस्या सामने आई. ड्राइवरों का आरोप है कि शुरुआती वादे के मुताबिक ₹1,346 प्रतिदिन या ₹35,000 मासिक गारंटी नहीं दी जा रही. एक ड्राइवर ने दावा किया कि उसे पूरे हफ्ते में सिर्फ ₹1,064 मिले.
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