TVS Motor Company केवल देश नहीं, दुनिया में अपनी बेहतर पहचान बना रही है. कंपनी ने हाल ही में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. TVS ने जापानी दिग्गज यामाहा मोटर को पछाड़कर ग्लोबल टू-व्हीलर प्रोडक्शन में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है. अब वैश्विक रैंकिंग में होंडा पहले, हीरो मोटोकॉर्प दूसरे और टीवीएस तीसरे स्थान पर है. ये इंडियन टू-व्हीलर मार्केट के लिए काफी अच्छी बात है, क्योंकि अब टॉप-3 में दो भारतीय कंपनियां शामिल हैं.
आंकड़ों के अनुसार, टीवीएस ने 2025 में कुल 54.6 लाख यूनिट्स की बिक्री की, जो 2024 के 45.2 लाख यूनिट्स से 20.7 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है. वहीं, यामाहा की बिक्री मात्र 50 लाख यूनिट्स के आसपास रही, जो 2024 के 49.6 लाख यूनिट्स से सिर्फ 0.8 प्रतिशत बढ़ी. होंडा ने 2025 में 164.4 लाख यूनिट्स बेचकर अपनी बादशाहत बरकरार रखी, जबकि हीरो मोटोकॉर्प की बिक्री 62.5 लाख यूनिट्स रही. टीवीएस अब भारत में भी तीसरी सबसे बड़ी दोपहिया कंपनी है, जिसकी घरेलू बाजार हिस्सेदारी 19-20 प्रतिशत है.
ग्राहकों ने बनाया ‘हीरो’
टीवीएस की इस सफलता के पीछे कई रणनीतिक कारक हैं. सबसे पहले, भारत में प्रीमियमाइजेशन की लहर ने कंपनी को फायदा पहुंचाया. 150cc से ऊपर के मोटरसाइकिल सेगमेंट में टीवीएस की मजबूत प्रजेंस ने मास मार्केट और प्रीमियम दोनों ग्राहकों को आकर्षित किया. मोपेड्स और स्कूटर्स की वाइड रेंज ने भी घरेलू बिक्री को बढ़ावा दिया. दूसरा बड़ा योगदान निर्यात का है. अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य विदेशी बाजारों में भी टीवीएस को मजबूती मिली है. टीवीएस अब अफ्रीका में बजाज के बाद दूसरी सबसे बड़ी निर्यातक कंपनी बन गई है.
ईवी टू-व्हीलर मार्केट में जलवा
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में टीवीएस का नेतृत्व भी सराहनीय है. कंपनी भारत की ईवी टू व्हीलर बाजार में लगातार टॉप पर है और अपनी उत्पादन क्षमता को 5 लाख यूनिट्स सालाना तक बढ़ाने की योजना बना रही है. प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करने के लिए टीवीएस ने नॉर्टन ब्रांड के साथ साझेदारी की है और प्रीमियम बाइक्स जैसे मैनक्स व अटलस लॉन्च किए हैं. लीडरशिप में भी बदलाव हुआ है. सुधर्शन वेणु को चेयरमैन बनाया गया और जगुआर लैंड रोवर के पूर्व इंजीनियरिंग हेड निक रोजर्स को शामिल किया गया, जो ग्लोबल ब्रांड्स को मजबूत करेगा.
यामाहा कहां पिछड़ गई?
दूसरी ओर, यामाहा का फोकस विकसित बाजारों (यूरोप, अमेरिका) और नीश (Niche) सेगमेंट्स पर रहा, जहां मांग धीमी है. उभरते बाजारों में उत्पादन की बाधाएं और लागत बढ़ने से उसकी वृद्धि सीमित रही. टीवीएस की तुलना में यामाहा की औसत प्रति यूनिट कीमत ज्यादा है, इसलिए रेवेन्यू में यामाहा आगे हो सकती है, लेकिन वॉल्यूम में टीवीएस ने बाजी मारी है.
कंपनी का फ्यूचर प्लान
भविष्य में टीवीएस प्रीमियमाइजेशन, ईवी और ग्लोबल विस्तार (यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व) पर भरोसा कर रही है. ये उपलब्धि न सिर्फ टीवीएस के लिए माइलस्टोन है, बल्कि इंडियन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बढ़ती ताकत का प्रतीक भी है. आने वाले सालों में टीवीएस यामाहा से और आगे निकल सकती है, लेकिन ग्लोबल कंपटीशन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट जैसी चुनौतियां आगे भी बनी रहेंगी.