Տեխնիկական նորություններ

कम सोलर पैनल से बनेगी ज्यादा बिजली, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला नया तरीका

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 21, 2026
2 min read 1.2k views
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  • टैंडम सोलर सेल परोव्स्काइट-सिलिकॉन को मिलाकर अधिक ऊर्जा सोखते हैं।
  • वैज्ञानिकों ने परोव्स्काइट लेयर बनाने की नई, तेज़ विधि खोजी।
  • यह क्लोज-स्पेस सब्लिमेशन विधि 10 मिनट में परत तैयार करती है।
  • नई तकनीक से 34% तक दक्षता वाले पैनल संभव होंगे।

High Efficiency Solar Panel: सोलर पावर इस समय दुनिया के लिए क्लीन एनर्जी का सबसे जरूरी सोर्स बना हुआ है. इसे ज्यादा से ज्यादा यूटिलाइज करने के लिए साइंटिस्ट लगातार सोलर पैनल को एफिशिएंट और किफायती बनाने में जुटे हुए हैं. इस दिशा में perovskite–silicon tandem solar cell टेक्नोलॉजी को सबसे कारगर माना जा रहा है. इसमें अलग-अलग लाइट एब्जॉर्बिंग मैटेरियल मिलकर सनलाइट से ज्यादा एनर्जी कैप्चर कर लेते हैं. ये सिलिकॉन सोलर पैनल के मुकाबले काफी एफिशिएंट माने जाते हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका ढूंढा है, जिससे इनका मास लेवल प्रोडक्शन आसान हो जाएगा. 

कैसे काम करते हैं ये पैनल?

Perovskite–silicon tandem cells सनलाइट को अलग-अलग एनर्जी रेंज में डिवाइड कर लेती हैं. perovskite से बनी टॉप लेयर हाई-एनर्जी वाली ब्लू और अल्ट्रा वायलेट लाइट को सोख लेती है, जबकि इसके नीचे लगी सिलिकॉन लेयर कम एनर्जी वाली रेड और इंफ्रारेड लाइट को सोखती है. इस तरह ये दोनों लेयर मिलकर ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस कर पाती हैं. बेशक इनकी एफिशिएंसी ज्यादा है, लेकिन इन्हें बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चर करना काफी मुश्किल रहा है और सबसे बड़ी दिक्कत सिलिकॉल सरफेस को perovskite की एकदम पतली लेयर से कोट करने में इसमें लगने वाले समय को लेकर आई है.

साइंटिस्ट ने निकाल लिया नया तरीका

मैन्युफैक्चरिंग में आने वाली दिक्कत को दूर करने के लिए साइंटिस्ट ने नया तरीका निकाल लिया है. उन्होंने क्लोज-स्पेस सबलिमेशन की प्रोसेस को इंप्रूव किया है. इसमें सॉलिड प्रीकर्सर मैटेरियल को तब तक गर्म किया जाता है, जब तक वह भाप नहीं बन जाता. भाप बनने के बाद यह थोड़ी ही दूर लगे सिलिकॉन सरफेस पर जाकर चिपक जाता है. यहां केमिकल रिएक्शन कर यह perovskite की लेयर बना लेता है. इस प्रोसेस में लिक्विड सॉल्वेंट की जरूरत नहीं पड़ती. यह प्रोसेस एकदम क्लीन और किफायती भी है.

प्रोसेस में लगने वाला समय भी हुआ कम

रिसर्चर ने बताया कि यह प्रोसेस काफी तेज है और इसकी रफ्तार ने उन्हें भी चौंका दिया. perovskite लेयर को पूरी तरह बनने में सिर्फ 10 मिनट का समय लगा, जो इस टेक्निक के लिए बड़ी सफलता है. साथ ही यह प्रोसेसर सिलिकॉन के अलग-अलग सरफेस जैसे स्मूद, नैनो-टेक्सचर्ड और माइक्रो टेक्सचर्ज समेत सब पर काम कर सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सेल्स की एफिशिएंसी 34 प्रतिशत तक जा सकती है, जो आज मार्केट में कमर्शियली मौजूद पैनल के मुकाबले बहुत ज्यादा है. इसका फायदा यह होगा कि कम पैनल से ज्यादा एनर्जी जनरेट की जा सकेगी. 

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։