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सरकार की सस्ते वॉइस प्लान की तैयारी पूरी, लेकिन क्या अब डेटा होगा महंगा?

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On April 25, 2026
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  • TRAI ने 2026 तक वॉइस/SMS-ओनली प्लान अनिवार्य किए।
  • इन प्लान्स की कीमत डेटा प्लान के अनुपात में कम होगी।
  • यह बुजुर्गों, ग्रामीण व कम आय वालों के लिए राहत।
  • आशंका है कि डेटा प्लान महंगे हो सकते हैं।

TRAI: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक अहम डेडलाइन तय की है. 28 अप्रैल 2026 तक सभी ऑपरेटरों को अपने टैरिफ सिस्टम में बदलाव करते हुए हर वैलिडिटी के लिए वॉइस और SMS-ओनली प्लान उपलब्ध कराने होंगे. इन प्लान्स को वेबसाइट, मोबाइल ऐप और रिटेल आउटलेट्स पर साफ तौर पर दिखाना भी जरूरी होगा. यानि उपभोक्ता के लिए जितने भी डाटा, वॉइस और SMS के bundle प्लान होते हैं उतने ही प्लान सिर्फ वॉइस कॉल के भी हों.

सस्ते होंगे प्लान?

TRAI के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब जितने भी मौजूदा डेटा वॉइस+SMS वाले बंडल प्लान हैं उन्हें उसी वैलिडिटी के बराबर अलग से वॉइस ओनली प्लान देना होगा. इन प्लान्स की कीमत भी लार्जली प्रोपोर्शनल रिडक्शन यानी डेटा के हिसाब से कम रखनी होगी.

सरकार की सस्ते वॉइस प्लान की तैयारी पूरी, लेकिन क्या अब डेटा होगा महंगा?

यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि TRAI के अनुसार, बड़ी संख्या मे ऐसे  उपभोक्ता हैं, खासतौर पर बुजुर्ग, ग्रामीण और कम आय वर्ग, जिन्हें डेटा की जरूरत नही होती है लेकिन उन्हें मजबूरी में महंगे डेटा प्लान लेने पड़ते हैं.

क्या डेटा प्लान होंगे महंगे?

अब TRAI के नए प्रस्ताव ने टेलीकॉम सेक्टर में एक नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ जहां सिर्फ वॉइस कॉल के प्लान का कदम उन उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आ सकता है जो सिर्फ कॉल और SMS का इस्तेमाल करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह आशंका भी बढ़ रही है कि आने वाले समय में डेटा प्लान महंगे हो सकते हैं.

20 साल बाद टैरिफ में सीधा हस्तक्षेप

भारत में 2004 से टेलीकॉम सेक्टर में “टैरिफ फॉरबियरेंस” की नीति लागू है जिसके तहत कंपनियों को खुद अपने प्लान तय करने की आजादी दी गई थी. इसी वजह से भारत दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा बाजारों में शामिल रहा है. लेकिन अब इतने सालों बाद TRAI का यह कदम अलग है. पहली बार इतने वर्षों बाद रेगुलेटर सीधे तौर पर टैरिफ स्ट्रक्चर में बदलाव की दिशा तय करता दिख रहा है जहां कंपनियों को हर वैलिडिटी के लिए voice और SMS-ओनली प्लान देना अनिवार्य किया जा रहा है.

कंज्यूमर के लिए क्या राहत ?

TRAI का तर्क साफ है, देश में बड़ी संख्या में ऐसे यूजर्स हैं जिन्हें डेटा की जरूरत नहीं है लेकिन उन्हें मजबूरी में डेटा वाले महंगे प्लान लेने पड़ते हैं. अगर यह नियम लागू होता है तो,

  • उपभोक्ता अपनी जरूरत के हिसाब से सस्ता प्लान चुन पाएंगे
  • बुजुर्ग, ग्रामीण और फीचर फोन यूजर्स को राहत मिलेगी
  • “जबर्दस्ती डेटा खरीदने” की समस्या कम होगी

बढ़ सकती है जेब पर मार

लेकिन यहीं पर कहानी पलटती है. टेलीकॉम इंडस्ट्री का मॉडल “बंडल प्राइसिंग” पर चलता है जहां डेटा से होने वाली कमाई वॉइस सर्विस को सस्ता बनाए रखती है. अगर वॉइस और डेटा पूरी तरह अलग हो जाते हैं तो कंपनियां डेटा प्लान की कीमत बढ़ा सकती हैं. ज्यादातर यूजर्स जो डेटा + कॉल दोनों इस्तेमाल करते हैं उनके लिए कुल खर्च बढ़ सकता है. सस्ता प्लान कुछ लोगों के लिए राहत बनेगा लेकिन बहुसंख्यक यूजर्स के लिए महंगा सौदा भी साबित हो सकता है.

फॉरबियरेंस मॉडल पर भी उठे सवाल

TRAI का यह कदम उस नीति से अलग माना जा रहा है जिसने भारत को दुनिया के सबसे सस्ते टेलीकॉम बाजारों में शामिल किया. अब सवाल उठ रहा है कि क्या ज्यादा रेगुलेशन से

  • कंपनियों की प्राइस तय करने की आजादी कम होगी
  • मार्केट में इनोवेशन पर असर पड़ेगा
  • और लंबी अवधि में कीमतें स्थिर रहने के बजाय बढ़ सकती हैं

अब एक्सपर्ट्स के मुताबिक चिंता यह है कि अगर डेटा प्लान महंगे होते हैं तो इसका असर देश के डिजिटल विस्तार पर पड़ सकता है. ऐसे में अगर कंपनियों की कमाई पर दबाव आता है तो नेटवर्क निवेश और विस्तार की रफ्तार धीमी हो सकती है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։