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V2X Technology भारत में लागू? अब गाड़ियां खुद देंगी एक्सीडेंट से पहले अलर्ट, TRAI का बड़ा प्लान

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By Aman Shanti .In On May 5, 2026
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V2X Technology: भारत में अब सड़क परिवहन को ज्यादा सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. Telecom Regulatory Authority of India ने 30 अप्रैल को एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर Vehicle-to-Everything यानी V2X कम्युनिकेशन का ढांचा पेश किया है. इस तकनीक का मकसद वाहनों, सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, पैदल यात्रियों और नेटवर्क के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग को संभव बनाना है. फिलहाल यह प्रस्ताव विचार-विमर्श के दौर में है लेकिन इससे साफ संकेत मिलता है कि देश एक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ओर बढ़ रहा है.

सड़क सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है V2X

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सड़क हादसे एक बड़ी समस्या बने हुए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2023 में करीब 1.73 लाख लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई जिनमें से कई हादसे इंसानी गलती जैसे देर से रिएक्शन देना, दूरी का गलत अनुमान लगाना या कम विजिबिलिटी के कारण होते हैं. V2X तकनीक का उद्देश्य इन इंसानी कमियों को कम करना है ताकि गाड़ी खुद ही आसपास की स्थिति समझकर समय रहते चेतावनी दे सकें.

V2X कैसे करता है काम

V2X एक ऐसा सिस्टम है जिसमें वाहन लगातार अपने आसपास की जानकारी साझा करते रहते हैं जैसे उनकी स्पीड, लोकेशन और मूवमेंट. यह डेटा सिर्फ दूसरे वाहनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रैफिक सिग्नल, सड़क किनारे लगे सेंसर, पैदल चलने वाले लोगों और क्लाउड सिस्टम तक भी पहुंचता है. इसका मकसद एक ऐसा नेटवर्क बनाना है जिसमें सड़क पर मौजूद हर चीज एक-दूसरे की एक्टिविटी से वाकिफ रहे.

इस तकनीक के चार मुख्य हिस्से होते हैं. पहले, वाहन एक-दूसरे से बात कर सकते हैं ताकि टक्कर से बचा जा सके. दूसरे, वे ट्रैफिक लाइट और टोल सिस्टम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़कर ट्रैफिक को बेहतर बना सकते हैं. तीसरे, यह पैदल यात्रियों को खतरे की स्थिति में अलर्ट भेज सकता है. और चौथे, वाहन मोबाइल नेटवर्क के जरिए क्लाउड से जुड़कर रियल-टाइम अपडेट और ट्रैफिक जानकारी हासिल कर सकते हैं.

टेलीकॉम नेटवर्क की भूमिका क्यों अहम है

आज की आधुनिक कारों में कैमरा, रडार और LiDAR जैसे सेंसर होते हैं, लेकिन ये सिर्फ वही देख सकते हैं जो सामने नजर आता है. V2X इस सीमा को खत्म करता है और दूर तक की जानकारी भी उपलब्ध कराता है. यही वजह है कि इसमें टेलीकॉम नेटवर्क की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

यह तकनीक अब Cellular V2X यानी C-V2X की ओर बढ़ रही है जो 4G और 5G नेटवर्क पर आधारित है. इससे न सिर्फ वाहनों के बीच सीधा संपर्क संभव होता है बल्कि नेटवर्क के जरिए लंबी दूरी तक कम समय में डेटा ट्रांसफर भी हो पाता है.

दुनिया के अलग-अलग देशों का नजरिया

V2X को अपनाने का तरीका हर देश में अलग है. यूरोप में पुराने DSRC सिस्टम के साथ नई तकनीकों को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है जिससे कई बार इंटरऑपरेबिलिटी की दिक्कत आती है. चीन ने शुरुआत से ही C-V2X को अपनाकर तेजी से इस सिस्टम को लागू किया है और वहां बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल शुरू हो चुका है.

अमेरिका ने भी धीरे-धीरे C-V2X की ओर रुख किया है जहां इसे पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है. ऑटोमोबाइल कंपनियां जैसे Ford और Audi इस तकनीक पर काम कर रही हैं. वहीं Tesla ने अलग रास्ता अपनाते हुए अपने वाहनों में सेंसर और क्लाउड डेटा पर ज्यादा भरोसा किया है.

भारत का प्लान क्या है

भारत के पास इस तकनीक को अपनाने का एक बड़ा फायदा यह है कि यहां पुराने सिस्टम का बोझ नहीं है. सरकार सीधे नई और एडवांस तकनीक की ओर बढ़ सकती है. देश में C-V2X को अपनाने की दिशा में काम चल रहा है और इसके लिए 5.9 GHz स्पेक्ट्रम बैंड के इस्तेमाल की योजना बनाई जा रही है.

शुरुआत में ध्यान वाहनों के बीच कम्युनिकेशन पर रहेगा जिससे तुरंत सुरक्षा से जुड़े फायदे मिल सकें. बाद में ट्रैफिक सिग्नल, सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरों में स्मार्ट सिस्टम के साथ इसे जोड़ा जाएगा. वाहन में लगे डिवाइस को लाइसेंस फ्री रखने का प्रस्ताव है जबकि सड़क किनारे लगने वाले सिस्टम के लिए अनुमति जरूरी होगी.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։