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WhatsApp पर भरोसा पड़ा भारी? Meta पर अरबों यूजर्स को प्राइवेसी के नाम पर गुमराह करने का आरोप

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 24, 2026
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  • बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी Meta पर दबाव

Whatsapp Privacy: Meta की मुश्किलें अमेरिका में एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. कंपनी के लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर यूजर्स को उनकी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर भ्रमित करने का आरोप लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने Meta और WhatsApp के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि कंपनी ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि उनकी चैट पूरी तरह सुरक्षित और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है जबकि हकीकत इससे अलग हो सकती है.

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर उठे सवाल

मुकदमे में दावा किया गया है कि WhatsApp लंबे समय से अपने प्लेटफॉर्म को बेहद सुरक्षित बताता रहा है. कंपनी का कहना था कि यूजर्स के मैसेज केवल भेजने और पाने वाले व्यक्ति ही पढ़ सकते हैं.

लेकिन टेक्सास प्रशासन का आरोप है कि Meta के पास बड़ी मात्रा में निजी कम्युनिकेशन डेटा तक पहुंच थी. केस में यह भी कहा गया कि अरबों यूजर्स को मजबूत प्राइवेसी का वादा किया गया मगर कंपनी उन दावों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरी.

व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट्स का भी जिक्र

कानूनी दस्तावेजों में कुछ रिपोर्ट्स और व्हिसलब्लोअर दावों का भी हवाला दिया गया है. इनमें आरोप लगाया गया कि Meta को कुछ ऐसे WhatsApp मैसेज तक पहुंच मिली जो पूरी तरह एन्क्रिप्टेड नहीं थे. हालांकि, Meta ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. कंपनी के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि WhatsApp यूजर्स के एन्क्रिप्टेड मैसेज पढ़ या एक्सेस नहीं कर सकता और यह मुकदमा पूरी तरह गलत तथ्यों पर आधारित है.

भारत समेत दुनियाभर में बढ़ रही चिंता

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर में बड़ी टेक कंपनियों पर यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी को लेकर दबाव लगातार बढ़ रहा है. भारत जैसे देशों में WhatsApp करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. लोग इसका इस्तेमाल निजी बातचीत, बिजनेस और डिजिटल पेमेंट तक के लिए करते हैं. ऐसे में इस तरह के आरोप यूजर्स के बीच नई चिंताएं पैदा कर रहे हैं कि आखिर टेक कंपनियां पर्दे के पीछे कितना डेटा इकट्ठा करती हैं.

टेक्सास सरकार ने की सख्त कार्रवाई की मांग

टेक्सास सरकार ने अदालत से मांग की है कि Meta और WhatsApp को बिना यूजर्स की अनुमति उनके संदेशों तक पहुंचने से रोका जाए. इसके अलावा कंपनी पर आर्थिक जुर्माना लगाने की भी मांग की गई है. यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी टेक कंपनी पर प्राइवेसी से जुड़े आरोप लगे हों. इससे पहले टेक्सास प्रशासन Google के खिलाफ भी यूजर डेटा और प्राइवेसी मामलों में कानूनी कार्रवाई कर चुका है.

बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर भी Meta पर दबाव

इसी बीच Meta ने अमेरिका के केंटकी राज्य के एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट द्वारा दायर एक अन्य मुकदमे का समझौता भी किया है. उस केस में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य संकट को बढ़ावा दे रही हैं. बताया जा रहा है कि यह मामला अगले महीने कैलिफोर्निया में ट्रायल के लिए जाने वाला था. इससे पहले YouTube, Snap और TikTok भी ऐसे ही मामलों में समझौता कर चुके हैं.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։