आप डेटिंग ऐप पर किसी से मैच करते हैं. बातचीत अच्छी चलती है, केमिस्ट्री बनती है और लगता है कि शायद यह ‘द’ मैच है. कुछ दिनों या हफ्तों बाद सामने वाला किसी इमरजेंसी या इन्वेस्टमेंट की बात करता है. आप भरोसा करके पैसे ट्रांसफर कर देते हैं और फिर वह हो जाता है गायब. फोन बंद, प्रोफाइल डिलीट और आपका बैंक बैलेंस भी जीरो. यह है आज के दौर की तेजी से बढ़ती ऑनलाइन ठगी- रोमांस स्कैम या डेटिंग ऐप फ्रॉड. आखिर ठगी होती कैसे है और आप इससे बच क्यों नहीं पाते…
कैसे काम करते हैं ये ठग?
डेटिंग ऐप पर 5 बड़े तरीकों से ठगी होती है…
1. कैटफिशिंग और फेक प्रोफाइल
यह सबसे आम तरीका है. ठग फर्जी तस्वीरों और झूठी पहचान के साथ प्रोफाइल बनाते हैं. वे खुद को डॉक्टर, इंजीनियर, बिजनेसमैन, फिल्म प्रोड्यूसर या NRI बताते हैं.
मैकफी के सर्वे के मुताबिक, 75% भारतीयों ने डेटिंग ऐप्स या सोशल मीडिया पर AI से बनाई गई फेक प्रोफाइल या तस्वीरें देखी हैं. 46% लोगों को पता चला कि वे AI बॉट या फेक प्रोफाइल से बात कर रहे थे. 33% कैटफिशिंग (किसी और की पहचान चुराना) के शिकार हुए.
दिल्ली पुलिस ने आनंद कुमार नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया, जिसने डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर खुद को डॉक्टर, फिल्म प्रोड्यूसर, वकील और बिजनेसमैन बनाकर 500 से ज्यादा महिलाओं से करीब 2 करोड़ रुपए की ठगी की.
2. इमोशनल मैनिपुलेशन और भरोसा जीतना
ठग पहले हफ्तों या महीनों तक रोज बात करते हैं, इमोशनल कनेक्शन बनाते हैं और पीड़ित का पूरा भरोसा जीत लेते हैं. वे पीड़ित की सोशल मीडिया प्रोफाइल, फैमिली बैकग्राउंड, प्रोफेशन और लाइफस्टाइल की गहराई से स्टडी करते हैं. खासतौर पर वे तलाकशुदा, अलग-अलग रह रहे या भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं.
बेंगलुरु के 42 साल के जगदीश सी नाम के शख्स ने QuackQuack डेटिंग ऐप पर एक महिला से दोस्ती की. महिला मेघना रेड्डी ने उसे बताया कि वह उसके पिता के नाम पर एक वृद्धाश्रम बनाना चाहती है. इस इमोशनल बात ने जगदीश का भरोसा जीत लिया. फिर उसे अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में निवेश का ऑफर दिया गया.
जगदीश ने दो दिनों में कई RTGS और NEFT ट्रांजेक्शन के जरिए 1.29 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए. पैसे जाते ही महिला और उसके साथी गायब हो गए.
3. क्रिप्टो, शेयर और फॉरेक्स से इन्वेस्टमेंट का झांसा
यह सबसे महंगा स्कैम है. भरोसा जीतने के बाद ठग क्रिप्टोकरेंसी, शेयर बाजार या फॉरेक्स ट्रेडिंग में कम समय में बड़ा मुनाफा दिखाने वाले प्लेटफॉर्म पर इन्वेस्ट करने के लिए कहते हैं. वे फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाते हैं जो बिल्कुल असली लगते हैं. शुरू में थोड़ा मुनाफा भी दिखाते हैं ताकि और पैसा डलवा सकें.
फरीदाबाद के एक डॉक्टर ने डेटिंग वेबसाइट पर एक युवती से दोस्ती की. युवती ने खुद को फॉरेक्स ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताया. अप्रैल से जून 2025 के बीच उस डॉक्टर ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 4 करोड़ 43 लाख 68 हजार 974 रुपए इन्वेस्ट कर दिए. जब पैसे निकालने की कोशिश की तो कुछ नहीं निकला.
मुंबई के 52 साल के एक बिजनेसमैन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. डेटिंग ऐप पर दोस्ती करने वाली महिला ने शादी का झांसा देकर उससे 53 लाख रुपए की ठगी की.
4. रेस्टोरेंट या कैफे स्कैम पर हनीट्रैप बिलिंग फ्रॉड
इस स्कैम में ठग पीड़ित को किसी खास कैफे या रेस्टोरेंट में बुलाते हैं. वहां मामूली ऑर्डर (2 कॉफी, 1 हुक्का) का बिल हजारों रुपए का आता है. ठग बीच में ही बहाना बनाकर गायब हो जाता है और पीड़ित को भारी-भरकम बिल चुकाने के लिए मजबूर कर दिया जाता है. कई बार तो कैफे वाले भी ठगों के साथ मिले होते हैं.
कोलकाता के रानीकुठी इलाके में Bumble ऐप पर मिली एक लड़की ने एक युवक को ‘कपल कैफे जोन’ नाम के कैफे में बुलाया. दोनों ने दो कॉफी और एक हुक्का ऑर्डर किया. बिल आया- 8,500 रुपए! लड़के के पैरों तले जमीन खिसक गई और लड़की हंसती हुई वहां से चली गई.
दिल्ली के कड़कड़डूमा में भी ऐसा ही हुआ. Tinder पर मिली डेट ने एक शख्स को कैफे में बुलाया और 50,000 रुपए का बिल चुकाने पर मजबूर कर दिया. बेंगलुरू में भी एक महिला Bumble पर मिले एक शख्स के साथ ऐसे ही स्कैम में फंस गई.
5. ब्लैकमेल और सेक्सटॉर्शन के जरिए अश्लील वीडियो से ठगी
इस तरीके में ठग वीडियो कॉल पर पीड़ित को अश्लील हरकतों के लिए उकसाते हैं, उसे रिकॉर्ड कर लेते हैं और फिर उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं.

तो फिर पीड़ित क्यों नहीं करते शिकायत?
पीड़ित 5 बड़ी वजहों से चुप रहना पसंद करते हैं:
1. शर्म, बदनामी और सामाजिक कलंक
ये तीनों एक ही सिक्के के पहलू हैं और इस चुप्पी की सबसे बड़ी वजह हैं. पीड़ितों को सबसे ज्यादा डर अपनी इज्जत और समाज में रुतबा खोने का डर होता है.
- लोग क्या कहेंगे: रोमांस स्कैम का शिकार होने का मतलब है कि आपने फीलिंग्स में बहकर कोई बेवकूफी भरा काम किया. पीड़ितों को लगता है कि उन्हें ‘लालची’, ‘लापरवाह’ या ‘बेवकूफ’ ठहराएंगे.
- प्रोफेशनल इमेज का खतरा: ये डर सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं है. डॉक्टरों, वकीलों, कंपनी डायरेक्टर्स और हाई-रैंकिंग अधिकारियों जैसे प्रोफेशनल्स को भी इस बात का डर सताता है कि अगर मामला सामने आया तो उनकी प्रोफेशनल इमेज बर्बाद हो जाएगी.
- शादी पर असर: अहमदाबाद पुलिस के एक मामले में शादीशुदा डॉक्टरों और वकीलों ने बदलनामी के डर से शिकायत करने से इनकार कर दिया, एक और मामले में पीड़ित की सगाई हो चुकी महिलाओं ने सोशल स्टिग्मा के डर से शिकायत नहीं की.
- परिवार का डर: कई पीड़ित ठग से भी ज्यादा परिवार के रिएक्शन से डरते हैं. उन्हें डर होता है कि परिवार उन्हें जिम्मेदार ठहराएगा या उन पर भोसा करना बंद कर देगा.
- छिपी पहचान का खतरा: LGBTQ+ यानी क्विर कम्युनिटी के लिए ये डर और भी गहरा है. इन्हें अपनी सेक्शुअलिटी उजागर होने का डर सताता है. इससे भेदभाव या परिवार से बेदखली भी झेलनी पड़ती है. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, 91% पीड़ितों ने इसी डर के चलते हमले की सूचना तक नहीं दी.
2. पुलिस और कानूनी प्रक्रिया का डर
यह डर पीड़ितों को थाने जाने से रोकता है. वे सोचते हैं कि:
- थाने जाकर उनके साथ पूछताछ की जाएगी जैसे कि वे खुद अपराधी हों, न कि पीड़ित.
- पुलिस उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेगी. वे एक से दूसरे चक्कर लगाते रहेंगे.
- ठग अक्सर पीड़ितों को धमकाते हैं, ‘अगर तुमने शिकायत की तो पुलिस तुम्हें भी गिरफ्तार कर लेगी.’
- पीड़ितों को यही नहीं पता होता कि शिकायत कहां और कैसे करनी है. पुलिस थाने जाएं, साइबर सेल जाएं या ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल करें.
3. लगातार पैसे गंवाने का डर
ठग पीड़ित की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं. जब पीड़ित को ठगी का एहसास होता है, तो ठग कहता है, ‘एक आखिरी पेमेंट कर दो, तो हम तुम्हारे सारे पैसे वापस कर देंगे.’ पीड़ित, अपना पैसा वापस पाने की हताशा में और पैसे भेज देता है. इससे उसका नुकसान और बढ़ जाता है.
4. समझ और सही रास्ते की जानकारी न होना
बहुत से लोगों को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 के बारे में पता ही नहीं होता. ऐसे में वे घबराहट में किसी गूगल पर मिले ‘साइबर एक्सपर्ट’ के पास पहुंच जाते हैं. यह अक्सर खुद भी ठग होते हैं और उन्हें और उलझा देते हैं.
5. इस चुप्पी की कीमत
यह चुप्पी सिर्फ पीड़ित को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि:
- ठगों को बढ़ावा: जब पीड़ित शिकायत नहीं करते, तो ठगों के हौसले बुलंद हो जाते हैं और वे और लोगों को निशाना बनाते हैं.
- सबूत नष्ट: शिकायत में देरी से चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और ट्रांजैक्शन डिटेल्स जैसे अहम सबूत मिट जाते हैं.
- पैसे की वसूली मुश्किल: ठग कुछ ही मिनटों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. देरी से शिकायत करने पर उन तक पहुंचना और पैसे वापस पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है.
ठग किसे निशाना बनाते हैं?
- 25 से 34 साल की उम्र के युवा सबसे ज्यादा झांसे में फंसते हैं.
- तलाकशुदा, अलग-अलग रह रहे या भावनात्मक रूप से कमजोर लोग.
- अकेले रहने वाले और सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव लोग.
- 61% पीड़ित 18-35 साल के और 39% 35-65 साल के लोग होते हैं.

अगर फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?
डेटिंग ऐप स्कैम होने पर ये 4 बातों का हमेशा ध्यान रखें:
- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत करें.
- अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं.
- अगर पैसे ट्रांसफर हो गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और ट्रांजेक्शन रोकने की कोशिश करें.
- स्क्रीनशॉट, चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और ट्रांजेक्शन डिटेल सेफ रखें. ये पुलिस जांच में काम आएंगे.