Mahakal Bhasm Aarti: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती काफी प्रसिद्ध है. भस्म आरती बाबा महाकाल को जगाने के लिए की जाती है. आमतौर पर भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त तड़के सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच की जाती है. लेकिन विशेष अवसरों खासकर महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि के दौरान इसका समय बदल जाता है.
महाशिवरात्रि के 9 दिन पहले से ही महाकालेश्वर (mahakaleshwar jyotirlinga) में शिव नवरात्रि के आयोजन की शुरुआत हो जाती है और महाशिवरात्रि के अगले दिन इसका समापन होता है. बता दें कि, एकमात्र महाकालेश्वर में ही महाशिवरात्रि से नौ दिन पूर्व शिव नवरात्रि (Shiv Navratri) मनाई जाती है. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में चार प्रहर पूजा-अभिषेक की गई और महाकाल को सेहरा अर्पित किया गया. इस अवसर पर भक्तों के दर्शन के लिए महाकाल के पट भी 44 घंटे नॉनस्टॉप खुले रहें. आज 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे भस्म आरती होगी.
दोपहर भस्म आरती का समय (Mahakal Bhasm Aarti Timing)
महाकालेश्वर की भस्म आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में जाती है. लेकिन साल में केवल एक बार ऐसा अद्भत क्षण आता है, जब दोपहर 12 बजे भस्म आरती (Mahakal Noon Bhasm Aarti) संपन्न होती है. साल में एक बार होने वाली महाकाल की दोपहर भस्म आरती में लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं.
आरती से पहले दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और फलों के रस से बाबा महाकाल का स्नान कराया जाता है. इसके बाद विशेष श्रृंगार होता है और पारंपरिक पगड़ी व सेहरा अर्पित किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोपहर की भस्म आरती होती है, जो भक्तों को भाव-विभोर कर देता है. दोपहर भस्म आरती के बाद शिव नवरात्रि संपन्न होती है. मंदिर के 11 पुजारी व ब्राह्मण 9 दिनों तक कठोर व्रत रखने के बाद शिव नवरात्रि व्रत का पारण (Vrat Paran) करते हैं.
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