NA vs Turbo Engine: कौन सा बेहतर? माइलेज, पावर और मेंटेनेंस का पूरा सच


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कार खरीदते समय NA और टर्बो इंजन के बीच चुनाव करना सबसे मुश्किल फैसला होता है. क्या आपको स्मूद और कम खर्च वाला NA इंजन लेना चाहिए या पावरफुल और मजेदार टर्बो? शहर के ट्रैफिक, हाईवे ड्राइविंग, माइलेज और मेंटेनेंस. हर पहलू को ध्यान में रखते हुए यहां जानिए कौन सा इंजन आपकी जरूरतों के लिए परफेक्ट है.

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NA और टर्बो इंजन में क्या अंतर? ज्यादा माइलेज कौन देगा, जानिएZoom

NA और टर्बो इंजन में क्या अंतर? जानिए

कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) इंजन लें या टर्बोचार्ज्ड? भारत में बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों, शहर के ट्रैफिक और हाईवे पर लंबी ड्राइविंग के बीच ये फैसला आसान नहीं है. NA इंजन पुराने जमाने का सरल और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है, जबकि टर्बो इंजन छोटे इंजन से भी ज़्यादा पावर निकालकर परफॉर्मेंस लवर्स को लुभाता है.

दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं. अगर आप रोज़ाना 20-30 किलोमीटर शहर में घूमते हैं या हाईवे पर तेज़ गाड़ी चलाना पसंद करते हैं, तो समझना ज़रूरी है कि कौन सा इंजन आपकी ज़रूरत के हिसाब से सही रहेगा. इस लेख में हम दोनों इंजनों के तकनीकी अंतर, फायदे-नुकसान और खरीदारी का सही फैसला बताएंगे.

NA इंजन

NA यानी Naturally Aspirated इंजन में हवा प्राकृतिक रूप से intake manifold के जरिए अंदर आती है. पिस्टन नीचे जाते समय सिलिंडर में वैक्यूम बनता है और वातावरण की हवा खुद-ब-खुद चली जाती है. इसमें कोई अतिरिक्त पंप या टरबाइन नहीं होता. इससे रिस्पॉन्स तुरंत मिलता है, गाड़ी सुबह-शाम ठंडी-गर्म किसी भी मौसम में आसानी से स्टार्ट होती है. टॉर्क और पावर इंजन के साइज पर निर्भर करती है. उदाहरण के तौर पर मारुति स्विफ्ट या हुंडई ग्रैंड i10 के 1.2 लीटर NA पेट्रोल इंजन शहर की रफ्तार में बहुत सहज चलते हैं.

टर्बोचार्ज्ड इंजन

टर्बोचार्ज्ड इंजन एग्जॉस्ट गैसों से चलने वाली टरबाइन का इस्तेमाल करता है. ये टरबाइन कंप्रेसर को घुमाती है, जो इंजन में ज़्यादा एयर और फ्यूल दबाकर जलाती है इससे छोटा 1.0 या 1.2 लीटर इंजन भी 100-120 bhp पावर और भरपूर टॉर्क देता है. टाटा नेक्सन, किआ सोनेट या महिंद्रा XUV300 के टर्बो इंजन हाईवे पर ओवरटेकिंग और लोड लेने में मजेदार लगते हैं. लेकिन इसमें ‘टर्बो लैग’ की समस्या होती है. कम RPM पर पावर अचानक आती है, जिससे शहर की स्टॉप-गो ट्रैफिक में थोड़ी अजीब लगती है.

मेंटेनेंस और कॉस्ट

रखरखाव और लागत की बात करें तो NA इंजन सस्ता और सरल होता है. सर्विसिंग आसान है, पार्ट्स सस्ते हैं और टूटने का खतरा कम होता है. टर्बो में टर्बोचार्जर, इंटरकूलर और ज्यादा सेंसर्स होने से सर्विसिंग महंगी पड़ती है. अगर आपकी सालाना ड्राइविंग 10-12 हजार किलोमीटर से कम है और ज्यादातर शहर में है, तो NA इंजन ईंधन की बचत और कम खर्चे में बेहतर रहेगा.

अगर आप हाईवे पर 120-140 km/h की रफ्तार से चलते हैं, फैमिली के साथ लंबी ट्रिप करते हैं या गाड़ी में सामान लोड रहता है, तो टर्बो इंजन ज़्यादा फन और पावर देगा. टर्बो वाले छोटे इंजन अक्सर NA वाले बड़े इंजन से बेहतर माइलेज भी देते हैं.

आपकी ज़रूरत के हिसाब से सही चुनाव-

  • शहर, कम बजट, कम रखरखाव- NA इंजन (स्विफ्ट, बलेनो, आई10)
  • परफॉर्मेंस, हाईवे, ओवरटेकिंग- टर्बो इंजन (नेक्सॉन, सोनेट, वेन्यू)
  • माइलेज और बैलेंस- 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल सबसे स्मार्ट विकल्प

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Ram Mohan MishraSenior Sub Editor

न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें





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