old smartphone कहां जाता है? जानें पूरा सच

Old Smartphone: अक्सर जब हमारा स्मार्टफोन धीमा पड़ जाता है, बैटरी जवाब देने लगती है या नया फोन आ जाता है तो पुराना डिवाइस हमें बेकार लगने लगता है. कई लोग उसे दराज में रख देते हैं तो कुछ उसे कबाड़ समझकर बेच देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन पुराने स्मार्टफोन्स के साथ आगे क्या होता है? असल में इनका एक तरह से पोस्टमार्टम किया जाता है जहां इनके हर हिस्से की जांच और इस्तेमाल तय किया जाता है.

ई-वेस्ट सेंटर में होता है असली काम

पुराने स्मार्टफोन सबसे पहले ई-वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर तक पहुंचते हैं. यहां एक्सपर्ट्स यह तय करते हैं कि फोन पूरी तरह खराब है या उसमें कुछ पार्ट्स अभी भी इस्तेमाल के लायक हैं. इस प्रक्रिया को ही आम भाषा में पोस्टमार्टम कहा जा सकता है जहां फोन को खोलकर उसकी हर छोटी-बड़ी चीज की जांच होती है.

कौन-कौन से पार्ट्स फिर से काम आते हैं?

जब फोन को खोला जाता है तो उसके कई हिस्से दोबारा इस्तेमाल के लिए अलग कर लिए जाते हैं. जैसे स्क्रीन, कैमरा, स्पीकर, माइक्रोफोन और यहां तक कि मदरबोर्ड के कुछ हिस्से भी काम के निकल आते हैं. इन पार्ट्स को रिफर्बिश्ड डिवाइस बनाने में इस्तेमाल किया जाता है या फिर रिपेयरिंग के काम में लाया जाता है.

कीमती धातुओं का होता है रीसायक्लिंग

स्मार्टफोन के अंदर सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स ही नहीं होते बल्कि सोना, चांदी, तांबा जैसी कीमती धातुएं भी मौजूद होती हैं. ई-वेस्ट सेंटर में इन्हें खास तकनीक के जरिए निकाला जाता है और फिर से इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है. इससे न सिर्फ संसाधनों की बचत होती है बल्कि पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है.

डेटा सुरक्षा भी है बड़ा मुद्दा

पुराने फोन को रीसायक्लिंग से पहले उसमें मौजूद डेटा को पूरी तरह मिटाया जाता है. इसके लिए खास सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है ताकि आपकी निजी जानकारी किसी गलत हाथ में न जाए. यही वजह है कि फोन बेचने या देने से पहले खुद भी डेटा डिलीट करना जरूरी होता है.

पर्यावरण बचाने में आपका योगदान

अगर आप अपने पुराने स्मार्टफोन को सही जगह रीसायक्लिंग के लिए देते हैं तो आप पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान देते हैं. ई-वेस्ट का सही तरीके से निपटान न होने पर यह मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर सकता है. ऐसे में पुराने स्मार्टफोन को हमेशा सही जगह पर ही डिस्पोज करना उचित माना जाता है.