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मैसेजिंग ऐप्स के लिए राहत! SIM Binding को लेकर डेडलाइन बढ़ा सकती है सरकार, जानिए क्या है वजह

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 31, 2026
1 min read 1.2k views
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SIM Binding : भारत सरकार मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए लागू किए जा रहे SIM-बाइंडिंग नियम की समयसीमा को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है. तकनीकी दिक्कतों के चलते कंपनियों ने अतिरिक्त समय मांगा है जिसके बाद अब नई डेडलाइन दिसंबर 2026 तक बढ़ाई जा सकती है.

क्या है SIM-बाइंडिंग नियम?

सरकार ने नवंबर 2025 में एक नया नियम लागू किया था जिसके तहत WhatsApp, Telegram और Arattai जैसे ऐप्स को यूजर के मोबाइल नंबर को उसी SIM कार्ड से जोड़ना अनिवार्य किया गया था जो फोन में मौजूद हो. इसका मतलब साफ है अगर आपके फोन में रजिस्टर्ड SIM नहीं है तो आप उस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इस कदम का मकसद फर्जी अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड पर रोक लगाना है खासकर उन मामलों में जहां विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है.

वेब वर्जन पर भी सख्ती

सरकार ने सिर्फ मोबाइल ऐप तक ही नहीं बल्कि वेब वर्जन पर भी नियम लागू करने की बात कही थी. उदाहरण के तौर पर, WhatsApp Web जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर को हर 6 घंटे में लॉगआउट किया जा सकता है. फिर से लॉगिन करने के लिए दोबारा वेरिफिकेशन करना जरूरी होगा जिससे अकाउंट की सुरक्षा और मजबूत हो सके.

क्यों बढ़ सकती है डेडलाइन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियों ने सरकार को बताया कि इस सिस्टम को लागू करना इतना आसान नहीं है. टेक्निकल टेस्टिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट और अलग-अलग डिवाइस पर काम करने जैसी चुनौतियों के कारण कंपनियां तय समयसीमा में इस नियम को लागू नहीं कर पाईं. इसी वजह से सरकार अब इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है.

Android और iOS में अलग-अलग चुनौती

बताया जा रहा है कि सबसे पहले Android डिवाइस पर यह फीचर लागू किया जाएगा. वहीं, iPhone यानी iOS प्लेटफॉर्म पर कुछ तकनीकी बाधाएं हैं जिन्हें दूर करने पर काम जारी है. Apple और अन्य कंपनियां मिलकर इस सिस्टम को सुचारू बनाने की कोशिश कर रही हैं.

WhatsApp और अन्य कंपनियों की तैयारी

WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta इस दिशा में सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है. फिलहाल Android यूजर्स के लिए SIM-बाइंडिंग फीचर बीटा टेस्टिंग में है. वहीं, भारतीय ऐप Arattai भी जल्द जरूरी अपडेट लाने की तैयारी में है ताकि वह इस नियम का पालन कर सके.

क्यों जरूरी है यह नियम?

सरकार का मानना है कि SIM-बाइंडिंग से साइबर अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2024 में साइबर फ्रॉड से देश को 22,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था. ऐसे में KYC-वेरीफाइड SIM को सीधे डिवाइस से जोड़ने से अकाउंट की पहचान पुख्ता होगी और धोखाधड़ी के मामलों को ट्रैक करना आसान बनेगा.

यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?

अगर यह नियम पूरी तरह लागू होता है तो यूजर्स को अपने मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने के लिए उसी SIM का इस्तेमाल करना होगा जिससे अकाउंट बनाया गया है. हालांकि, डेडलाइन बढ़ने से फिलहाल यूजर्स और कंपनियों दोनों को राहत मिल सकती है.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।