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Supreme Court Ruling on Car Bike Insurance: बिना इंश्योरेंस दौड़ रहीं 56% गाड़ियां, सुप्रीम कोर्ट ने बदला नियम, बढ़ जाएगा कार-बाइक खरीदने का खर्च

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By Aman Shanti .In On August 4, 2026
1 min read 1.2k views
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क्या आप नई कार या बाइक खरीदने की सोच रहे हैं? तो पहले यह खबर पढ़ लीजिए. सुप्रीम कोर्ट ने वाहन मालिकों के लिए एक बड़ा आदेश दिया है, जिससे नई गाड़ी खरीदने का खर्च बढ़ सकता है. हालांकि इस आदेश से सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि अब नई कार खरीदने वाले ग्राहकों को चार साल और नए टूव्हीलर खरीदने वालों को छह साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस एक साथ लेना अनिवार्य होगा. इससे पहले यह अवधि कारों के लिए तीन और बाइक के लिए पांच साल थी. अदालत का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में भारी दिक्कत आती है.

बिना इंश्योरेंस दौड़ रहीं लाखों गाड़ियां

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की बेंच ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया. कोर्ट ने कहा कि आठ साल पहले दिए गए आदेश के बावजूद हालात में उम्मीदों के मुताबिक सुधार नहीं हुआ और आज भी लाखों वाहन बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के चल रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि बीमा नियामक आईआरडीएआई (IRDAI)और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने अनिवार्य बीमा अवधि न बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन सड़क सुरक्षा और आम लोगों के हित को देखते हुए अदालत ने अवधि में एक साल की बढ़ोतरी करना जरूरी समझा. कोर्ट ने आईआरडीएआई को इस संबंध में तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का भी आदेश दिया.

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा. फैसले में कहा गया कि देश की सड़कों पर चलने वाले करीब 56 प्रतिशत वाहन बिना किसी वैध इंश्योरेंस के हैं. अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इससे मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है.

क्यों जरूरी है थर्ड पार्टी इंश्योरेंस?

कोर्ट ने यह भी माना कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले या घायल होने वाले लोगों और उनके परिवारों को मुआवजा पाने के लिए अक्सर वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है. ऐसे में मजबूत और प्रभावी बीमा व्यवस्था समय की जरूरत है.

हालांकि, सुनवाई के दौरान आईआरडीएआई और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने दलील दी कि बीमा अवधि बढ़ाने से प्रीमियम भी बढ़ जाएगा और इससे बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आएगी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से सहमति नहीं जताई और कहा कि व्यापक जनहित तथा सड़क सुरक्षा सर्वोपरि है.

4 स्टेज मोटर इंश्योरेंस फ्रेमवर्क को मंजूरी

अदालत ने निजी वाहनों के लिए चार-स्तरीय मोटर इंश्योरेंस ढांचे को भी मंजूरी दी. इसमें अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के अलावा वाहन में सवार यात्रियों और पिलियन राइडर के लिए वैकल्पिक कानूनी दायित्व कवर, मालिक-चालक और यात्रियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना कवर और वाहन को हुए नुकसान (ओन-डैमेज) का वैकल्पिक कवर शामिल होगा.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब हर ग्राहक को, चाहे वह ऑनलाइन बीमा खरीदे या ऑफलाइन, ‘कस्टमर ऑप्शन फॉर्म’ दिया जाएगा. इस फॉर्म के जरिए ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बीमा कवर का चयन कर सकेंगे.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।