नई कार खरीदना जीवन का बड़ा फैसला होता है, लेकिन आजकल ये फैसला सिर्फ डिजाइन या फीचर्स पर नहीं टिकता. आसमान छू रहे पेट्रोल डीजल के दामों ने लोगों को दूसरे ऑप्शन्स की ओर रुख करने के लिए मजबूर कर दिया है.ऐसे में EVs काफी बेहतर ऑप्शन बनकर उभरी हैं. अगर आप आने वाले दिनों में एक कार खरीदना का प्लान कर रहे हैं और कन्फ्यूज हैं कि पेट्रोल या ईवी कार में से किसे चुनना बेहतर रहेगा, तो ये आर्टिकल आपके काम का है. हमने उदाहरण के तौर पर Nexon ICE और Nexon EV को लिया है.
मौजूदा समय में पेट्रोल की कीमत औसतन ₹94.50 से ₹95.50 प्रति लीटर पहुंच चुकी है, जबकि EV चार्जिंग का खर्च घर पर महज ₹1 प्रति किमी है. हर साल 15,000 किमी चलाने वाले औसत भारतीय खरीदार के लिए 5 साल का रनिंग कॉस्ट गेम-चेंजर साबित हो सकता है? सरकारी EV पॉलिसी, FAME-II के विस्तार और घटते बैटरी दामों के बीच EV की चर्चा जोरों पर है, लेकिन क्या ये वाकई सस्ती पड़ती है? या पेट्रोल कार पुरानी भरोसेमंद साबित होगी? इस लेख में हम इन दोनों के बीच अंतर के बारे में जानेंगे.
Nexon ICE और Nexon EV से समझते हैं गणित
हमने उदाहरण के तौर पर Nexon ICE और Nexon EV को लिया है. इसमें टाटा नेक्सॉन पेट्रोल (XZ+ वेरिएंट) और नेक्सॉन EV (एम्पावर्ड प्लस) शामिल है. पेट्रोल वाली नेक्सॉन की ऑन-रोड कीमत करीब ₹13-14 लाख, जबकि Nexon EV की कीमत ₹17-18.5 लाख तक जाएगी. यानी EV में शुरुआती ₹4-5 लाख का एक्स्ट्रा खर्च होने वाला है, लेकिन यहीं से असली कहानी शुरू होती है. आइए, दोनों के बीच नफा-नुकसान को समझते हैं.
फ्यूल/चार्जिंग का खर्च
मान लीजिए आप सालाना 15,000 किमी चलाते हैं, तो 5 साल में कुल 75,000 किमी रनिंग हो जाएगी. पेट्रोल नेक्सॉन का रियल-वर्ल्ड माइलेज औसत 15 किमी/लीटर (सिटी-हाईवे मिक्स) मानकर चलते हैं. इस तरह कुल पेट्रोल की खपत 5,000 लीटर होगी ₹95/लीटर के हिसाब से आप 5 साल में ₹4,75,000 का ईंधन खरीदेंगे.
दूसरी ओर, Nexon EV का रियल-वर्ल्ड एफिशिएंसी 7 किमी/यूनिट (घर पर AC चार्जिंग) है. इस तरह 5 साल में 75 हजार किलोमीटर चलने पर ये कुल 10,714 यूनिट खर्च करेगी. यूपी में घरेलू टैरिफ औसत ₹6-8/यूनिट है. राउंड फीगर ₹7/यूनिट मांग लेते हैं. इस तरह 5 साल में कुल खर्च मात्र 75 हजार रुपये के आस-पास ही होगा. दोनों की तुलना करें, तो 5 साल में लगभग 3-3.30 लाख रुपये तक की बचत होगी.
मेंटेनेंस कॉस्ट
पेट्रोल कार में इंजन ऑयल, फिल्टर, टाइमिंग बेल्ट, स्पार्क प्लग और क्लच जैसे पार्ट्स को बदलना होता है. इसके अलावा हर 10,000 किमी पर सर्विस भी करानी जरूरी है. इस तरह 5 साल में कुल मेंटेनेंस ₹60,000-75,000 के बीच में हो सकेगा.
वहीं, EV में कोई इंजन नहीं है. सिर्फ ब्रेक पैड, टायर और सॉफ्टवेयर अपडेट में आपको थोड़ा-मोड़ा खर्च करना है. बैटरी वारंटी 8 साल/1.6 लाख किमी है. कुल मेंटेनेंस सिर्फ ₹15,000-25,000 के बीच है. इस तरह मेंटेनेंस और सर्विस के मोर्चे पर भी इसमें 40-50 हजार रुपये की बचत होती है.
बीमा और टैक्स
EV की ज्यादा एक्स-शोरूम प्राइस की वजह से सालाना इंश्योरेंस ₹10-15% महंगा (पहले साल ₹80,000 vs पेट्रोल ₹50,000) है. 5 साल में EV का कुल इंश्योरेंस ₹3-3.5 लाख, पेट्रोल का ₹2.5-2.8 लाख होगा. हालांकि, कई स्टेट्स में EV को रोड टैक्स में 50-100% छूट मिल रही है. यूपी में भी EV पर रजिस्ट्रेशन चार्ज कम है. कुल मिलाकर ये अंतर ₹50,000-70,000 का रह जाता है.
कुल 5 साल का ओनरशिप कॉस्ट (75,000 किमी)
- पेट्रोल नेक्सॉन: खरीद ₹13.5 लाख + ईंधन ₹4.75 लाख + मेंटेनेंस ₹65,000 + इंश्योरेंस ₹2.7 लाख. इस तरह करीब ₹22 लाख तक आंकड़ा पहुंच जाता है.
- नेक्सॉन EV: खरीद ₹18 लाख + चार्जिंग ₹75,000 + मेंटेनेंस ₹20,000 + इंश्योरेंस ₹3.2 लाख.इसका कुल आंकड़ा भी करीब ₹22 लाख के आस-पास पहुंच ही जाता है.
दोनों के नंबर लगभग बराबर नजर आते हैं, लेकिन 15,000 किमी/साल से ज्यादा चलाने वालों के लिए EV 3-4 साल में ब्रेक-ईवन कर जाती है. 20,000 किमी/साल पर EV 5 साल में ₹2-2.5 लाख सस्ती पड़ती है. अगर आप टैक्सी/कैब चलाते हैं तो बचत और भी ज्यादा होगी.
रीसेल वैल्यू और अन्य फैक्टर
पेट्रोल कार की रीसेल बेहतर मानी जाती है, लेकिन EV की बैटरी टेक्नोलॉजी परफेक्ट हो रही है. 2026 में नेक्सॉन EV की 3 साल बाद रीसेल 55-60% रहने की उम्मीद है और पेट्रोल को भी 60-65% के आस पास रीसेल वैल्यू मिल सकती है.
किसे खरीदना समझदारी?
अगर रोजाना 40-50 किमी से कम चलाते हैं और बजट टाइट है, तो पेट्रोल कार अभी भी सेफ है. 12,000+ किमी/साल, घर पर चार्जिंग सुविधा और 5+ साल रखने का प्लान है, तो EV बिल्कुल स्मार्ट चॉइस होगी. ईवी खरीदकर आप 5 साल में 10 टन CO2 भी बचा सकेंगे. समय के साथ चार्जिंग इंफ्रा भी बेहतर होगा, जिससे EV चलाना काफी बेहतर होने वाला है.

