Tech Explained: कैसे बनती है इमोजी? जानें स्टार्ट से लेकर एंड तक का पूरा प्रोसेस

सतीश कुमार
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अगर आपको किसी के मैसेज पर हंसी आई है और आप उसे बताना चाहते हैं तो मैसेज टाइप करने की जरूरत नहीं है. आप एक इमोजी भेजकर बता सकते हैं कि आप उनके मैसेज पर कितना हंसे है. सिर्फ एक इमोजी से पता चल जाएगा कि सामने वाले का मैसेज आपके चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर आया या आप लोटपोट होकर हंसे. टाइप करके यह रिएक्शन देना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन इमोजी ने यह काम एकदम आसान कर दिया. बात सिर्फ हंसी या मुस्कुराहट की नहीं है. आज अगर जेंडर वेरिएशन और स्किन टोन्स को जोड़ लिया जाए तो करीब 4,000 इमोजी यूज में हैं, जो कई सिचुएशन को बिना शब्दों के जाहिर कर देती हैं. हर साल इसमें नया एडिशन भी होता रहता है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि इमोजी बनती कैसे है, कौन इन्हें डिजाइन करता है और कैसे इन्हें फाइनल किया जाता है? आज के एक्सप्लेनर में हम आपके इन सारे सवालों का जवाब लेकर आए हैं.

क्या होती है इमोजी और कब हुई इसकी शुरुआत?

अगर डेफिनेशन देखी जाए तो इमोजी एक छोटी, स्टैंडर्डाइज्ड डिजिटल इमेज, आइकन और पिक्टोग्राम होता है, जो टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया और ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक कम्यूनिकेशन में इमोशन, आईडियाज, ऑब्जेक्ट और सिंबल को एक्सप्रेस करने के लिए यूज होता है. इमोजी एक कंपाउंड वर्ड है, जो जापानी में E (पिक्चर), mo (राइट) और ji (कैरेक्टर) से मिलकर बना है. माना जाता है कि सबसे पहले इमोजी को जापान के ग्राफिक आर्टिस्ट Shigetaka Kurita ने डेवलप किया था. उनके 176 सिंबल वाले ऑरिजनल सेट को 2016 में न्यू यॉर्क मॉडर्न आर्ट म्यूजियम ने खरीद लिया था. 2000 के बाद स्मार्टफोन के आने के बाद इमोजी जापान से निकलकर दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच गईं और आज लगभग 92 प्रतिशत ऑनलाइन आबादी इमोजी का यूज करती है.

कैसे बनती है इमोजी?

इमोजी भले ही देखने में इमेज की तरह दिखती हैं, लेकिन हर इमोजी यूनिकोड से बनी होती है. हर इमोजी के लिए एक असाइन्ड कोड प्वाइंट होता है. इमोजी बनने की प्रोसेस की बात करें तो कोई भी व्यक्ति नई इमोजी का प्रस्ताव रख सकता है. हालांकि, इसके लिए कुछ क्राइटेरिया बने हुए हैं. मसलन क्या यह छोटे साइज में समझ आ जाएगी, क्या यह मौजूदा इमोजी सेट में नया परस्पेक्टिव जोड़ सकती है और क्या इसे पहले से ही बड़ी संख्या में लोग यूज कर रहे हैं? अगर आपको लगता है कि आपकी इमोजी इन क्राइटेरिया को पूरा करती है तो आप इमोजी का नाम, कीवर्ड, कैटेगरी, कलर, इमोजी के सपोर्ट में रीजनिंग और एविडेंस यूनिकोड कंसोर्टियम को भेज सकते हैं. आपके इसके सपोर्ट में बताना होगा कि क्या आपकी प्रस्तावित इमोजी मल्टीपल कॉन्सेप्ट को सपोर्ट करती है, क्या यह मैसेज कन्वे करने के लिए दूसरी इमोजी के साथ यूज हो सकती है, क्या यह किसी अधूरी कैटेगरी को पूरा करती है और क्या यह मौजूदा सिस्टम के साथ कंपैटिबल है? इन सारी रीजनिंग के साथ आप अपना प्रस्ताव भेज सकते हैं.

कौन अप्रूव करता है इमोजी?

आपके प्रस्ताव को यूनिकोड कंसोर्टियम की इमोजी सब कमेटी के पास भेजा जाएगा. यूनिकोड कंसोर्टियम अमेरिका के कैलिफॉर्निया स्थित एक नॉन-प्रोफिट ऑर्गेनाइजेशन है. इसका मिशन हर लैंग्वेज के टेक्स्ट को दुनिया के सारे कंप्यूटर पर काम करने लायक बनाना है. इस ऑर्गेनाइजेशन में बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के साथ-साथ टाइपोग्राफी, लिंग्विस्टिक और टेक पर काम करने वाले लोग शामिल हैं. यह पिछले कई सालों से इमोजी पर काम करते हुए आ रहा है. 

अप्रूवल के बाद क्या होता है?

प्रस्तावों पर विचार करने के बाद यूनिकोड नई इमोजी को कोड प्वाइंट असाइन कर देता है. यहां से हरी झंडी मिलने के बाद ऐप्पल, सैमसंग और गूगल आदि वेंडर उन इमोजी के स्टाइलिश वर्जन तैयार करते हैं. हर वेंडर स्टैंडर्ड इमोजी को अपने इन-हाउस डिजाइन के हिसाब से तैयार करता है. इसी वजह से गूगल, ऐप्पल और फेसबुक आदि पर एक ही इमोजी अलग-अलग तरीके से नजर आती है.

इमोजी पर विवाद भी हो चुके हैं

ऑनलाइन वर्ल्ड में किसी भी चीज का विवादों से दूर रहना काफी मुश्किल होता है और इमोजी के साथ भी ऐसा हो चुका है. 2015 में यूनिकोड ने बर्गर इमोजी को अप्रूव किया था. करीब 2 साल बाद अक्टूबर, 2017 में कुछ यूजर्स ने ऐप्पल और गूगल की बर्गर इमोजी में अंतर को नोटिस किया. दरअसल, गूगल की इमोजी में चीज को ऊपर रखा गया था, जबकि ऐप्पल की इमोजी में इसे नीचे रखा गया था. इसे लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा चली थी. मामला इतना वायरल हो गया था कि खुद गूगल के सीईओ सुंदर पिचई को इस पर बयान देना पड़ा था.

क्या है इमोजी का फ्यूचर?

दुनियाभर में रोजाना करोड़ों लोग इमोजी को सेंड और रिसीव करते हैं. इसे देखते हुए आसानी से कहा जा सकता है कि इमोजी अभी कहीं नहीं जाने वाली है. एडोबी के टाइपफेस डिजाइनर और यूनिकोड कंसोर्टियम की सबकमेटी में रह चुके पॉल डी हंट कहते हैं कि ग्लोबल क्रिएटिविटी और कम्यूनिकेशन में इमोजी बड़ा बदलाव लेकर आई है. इमोजी के साथ आप भाषा और इमेज दोनों को यूज करते हैं. इससे कम्यूनिकेशन का संतुलन बना रहता है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.