पहाड़ों में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जरूरी टिप्स और सावधानियां


How to Drive Safely in Hills: वीकेंड आते ही दिल्ली-एनसीआर की जनता पहाड़ो की ओर रुख कर देती है. खासकर कार्पोरेट लाइफ जीने वाले लोग अपनी गाड़ियां उठाकर हिल ड्राइविंग के लिए निकल जाते हैं. कई बार बिना तैयारी और जानकारी के साथ जल्दबाजी में कार ट्रिप प्लान करना हमारे लिए परेशानी का सबब बन जाता है. अगर आप आने वाले कुछ दिनों में कार से पहाड़ी सड़क नापने का प्लान बना रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके काम का है.

भारत में हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम या कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में घुमावदार रास्ते, तीखे मोड़, खड़ी चढ़ाई-उतार, लैंडस्लाइड का खतरा और बदलता मौसम ड्राइविंग को जोखिम भरा बना देते हैं. कई बार छोटी-छोटी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है. इसलिए सेफ ड्राइविंग के लिए सही तैयारी, सावधानी और तकनीक बहुत जरूरी है. आइए पहाड़ी ड्राइविंग के लिए टॉप-5 टिप्स जानते हैं.

1. ट्रिप से पहले इंस्पेक्शन
पहाड़ी यात्रा शुरू करने से पहले गाड़ी की पूरी सर्विसिंग करवाएं. ब्रेक, टायर (ट्रेड डेप्थ कम से कम 3 मिमी), बैटरी, कूलेंट, इंजन ऑयल, ब्रेक फ्लूइड और स्पेयर टायर जरूर चेक करें. पहाड़ों में ब्रेक फेल होना सबसे बड़ा खतरा है, इसलिए ब्रेक पैड और डिस्क की कंडीशन देखें. जरूरी टूल्स जैसे जैक, व्हील स्पैनर, टायर इनफ्लेटर, टॉर्च, वाटर बॉटल, स्नैक्स और फर्स्ट एड किट साथ रखें. फ्यूल टैंक भी फुल रखें, क्योंकि पहाड़ों में पेट्रोल पंप दूर-दूर तक नहीं मिलते.

2. स्पीड लिमिट का खास ख्याल
पहाड़ी रोड पर कभी भी 40-50 किमी/घंटा से ज्यादा स्पीड न रखें. चढ़ाई पर लो गियर (दूसरा या तीसरा) इस्तेमाल करें, ताकि इंजन को ज्यादा ताकत मिले और गाड़ी आसानी से चढ़ सके. उतरते समय भी लो गियर में रखें और इंजन ब्रेकिंग का उपयोग करें. ब्रेक को लगातार दबाकर न रखें, वरना ब्रेक फेड (ओवरहीटिंग) हो सकता है. उतरते समय गियर डाउनशिफ्ट करके इंजन की मदद से स्पीड कंट्रोल करें. न्यूट्रल गियर में कभी भी गाड़ी न उतारें.

3. मोड़ पर अलर्ट रहें
पहाड़ी रोड पर ज्यादातर जगह सिंगल लेन होती है और ब्लाइंड कॉर्नर बहुत होते हैं. हर ब्लाइंड कॉर्नर या हेयरपिन बेंड पर हॉर्न जरूर बजाएं. इससे सामने से आने वाली गाड़ी को पता चल जाता है कि कोई आ रहा है. मोड़ पर स्पीड पहले से कम कर लें, ब्रेक लगाकर नहीं बल्कि गियर डाउन करके ऐसा करें. अपनी लेन (बाईं तरफ) में ही रहें और सेंटर लाइन क्रॉस न करें.

4. ओवरटेकिंग से बचें
पहाड़ों में ओवरटेकिंग बहुत जोखिम भरी है. जहां तक संभव हो ओवरटेक न करें. अगर जरूरी हो तो स्ट्रेट रोड पर ही ओवरटेक करें, जहां अच्छी विजिबिलिटी मिल रही हो. अगर सामने से कोई न आ रहा हो तब ही ओवरटेक करें. ओवरटेक करते समय हॉर्न बजाएं और जल्दी से काम पूरा करें. सामने वाली गाड़ी को स्पेस देकर ही चलें.

5. रोड कंडीशन पर नजर रखें
पहाड़ों में मौसम अचानक बदल जाता है. बारिश, कोहरा, बर्फबारी या लैंडस्लाइड का खतरा रहता है. बारिश में रोड फिसलन भरा हो जाता है, इसलिए स्पीड हमेशा कम रखें. कोहरे में लो बीम लाइट और फॉग लाइट इस्तेमाल करें. लैंडस्लाइड वाले इलाकों में साइन बोर्ड देखें और अगर पत्थर गिर रहे हों, तो तुरंत सुरक्षित जगह पर रुक जाएं. रात में ड्राइविंग से बचें क्योंकि विजिबिलिटी कम होती है.

बोनस टिप
हमेशा अपनी साइड (बाईं ओर) में ही चलें और गार्ड रेल की तरफ नजर रखें.
बैटरी पर ज्यादा लोड न डालें – एसी, हीटर, लाइट आदि कम इस्तेमाल करें.
थकान महसूस हो, तो सुरक्षित जगह रुककर आराम करें.
सामने वाली गाड़ी से सुरक्षित दूरी बनाकर चलें.
बच्चों और यात्रियों को सीट बेल्ट जरूर लगवाएं.



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