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फोन पर रखते ही डिवाइस होने लगता है चार्ज! कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी?

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On September 17, 2026
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आज के समय में स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज करने के लिए केबल लगाना आम बात है. लेकिन क्या हो अगर आपको चार्जिंग के लिए कोई तार ही न लगाना पड़े और सिर्फ फोन को एक खास पैड या चार्जर पर रखते ही बैटरी चार्ज होने लगे? दरअसल, ये कोई जादू नहीं बल्कि वायरलेस चार्जिंग टेक्नोलॉजी का कमाल है. इसमें बिजली बिना किसी फिजिकल केबल कनेक्शन के डिवाइस की बैटरी तक पहुंचाई जाती है. आइए जानते हैं कि कैसे काम करता है वायरलेस चार्जिंग.

आखिर बिना तार कैसे पहुंचती है बिजली?

जानकारी के मुताबिक, वायरलेस चार्जिंग मेनली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के नियम पर काम करती है. वायरलेस चार्जर के अंदर एक कॉइल लगी होती है जिसे ट्रांसमीटर कॉइल कहा जाता है. जब चार्जर को बिजली मिलती है तो ये कॉइल एक बदलता हुआ मैग्नेटिक फील्ड पैदा करती है.

स्मार्टफोन के अंदर भी एक रिसीवर कॉइल मौजूद होती है. जैसे ही फोन को चार्जिंग पैड के ऊपर सही कंडिशन में रखा जाता है, चार्जर की कॉइल से पैदा हुआ मैग्नेटिक फील्ड फोन की कॉइल में इलेक्ट्रिक करंट पैदा करता है. यही करंट आगे बैटरी को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल होता है.

फोन में लगी छोटी कॉइल करती है बड़ा काम

फोन के पीछे दिखाई न देने वाली एक पतली कॉइल वायरलेस चार्जिंग के लिए बेहद जरूरी होती है. इसे आमतौर पर फोन के बैक पैनल के अंदर लगाया जाता है. जब ये कॉइल चार्जिंग पैड के करीब आती है तो दोनों कॉइल के बीच इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी ट्रांसफर होती है.

हालांकि, चार्जर से मिली एनर्जी डायरेक्ट बैटरी में नहीं जाती है. फोन का चार्जिंग सर्किट इसे कंट्रोल करता है और बैटरी के लिए जरूरी वोल्टेज और करंट में बदलता है. इसी वजह से फोन और चार्जर के बीच कम्युनिकेशन भी बहुत जरूरी होता है.

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Qi स्टैंडर्ड ने आसान बनाई वायरलेस चार्जिंग

आपको बता दें कि आपने Qi (ची) नाम जरूर सुना होगा. ये वायरलेस पावर ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाला स्टैंडर्ड है. अलग-अलग कंपनियों के कई स्मार्टफोन और वायरलेस चार्जर इसी तरह के मानकों को सपोर्ट करते हैं.

Qi जैसे स्टैंडर्ड का फायदा ये है कि फोन और चार्जर के बीच पावर ट्रांसफर को एक तय तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है. इससे ओवरहीटिंग या जरूरत से ज्यादा पावर मिलने जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है.

फोन रखते ही चार्जिंग कैसे शुरू होती है?

जब फोन को चार्जिंग पैड पर रखा जाता है तो दोनों डिवाइस एक-दूसरे की मौजूदगी को पहचान लेते हैं. इसके बाद चार्जर पावर ट्रांसफर शुरू करता है. फोन लगातार ये मॉनिटर करता है कि उसे कितनी एनर्जी चाहिए.

इसी वजह से आपको कोई केबल फोन में लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है. बस फोन को चार्जर की कॉइल के ऊपर सही जगह रखना होता है. अगर फोन कॉइल से बहुत दूर या गलत पोजिशन में है तो चार्जिंग स्लो हो जाती है.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।