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भारत में यूज्ड कार खरीदने वालों का भरोसा अब बैंक और NBFC फाइनेंस पर तेजी से बढ़ रहा है. CRIF High Mark की रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल में यूज्ड कार फाइनेंस 26.2% CAGR से बढ़कर ₹1.3 लाख करोड़ हो गया. यह नई कारों समेत ऑटो लोन की ग्रोथ से काफी तेज है. जानिए यूज्ड कार लोन में तेजी की वजह, डिफॉल्ट लेवल और बदलते कार बाजार के बड़े आंकड़े.
Used Car market में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
देश में यूज्ड कार फाइनेंसिंग पिछले पांच सालों में नई कारों के लोन से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी है. Crif High Mark की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2021 में करीब 40,000 करोड़ रुपये के स्तर से जून 2026 में ये आंकड़ा बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इस दौरान इसकी सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 26.2 प्रतिशत रही है. वहीं, ऑटो लोन (नई कारों सहित) की CAGR सिर्फ 17.6 प्रतिशत रही और ये 4.4 लाख करोड़ से 9.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा.
ये आंकड़ा दिखाता है कि ग्राहक अब सेकेंड-हैंड कार खरीदने के लिए ऑफिशियल फाइनेंस संस्थानों का रुख ज्यादा कर रहे हैं. इससे प्री-ओन्ड कार सेगमेंट की मजबूती भी साफ झलकती है. बाजार में यूज्ड कारों की बिक्री नई कारों से आगे निकल चुकी है, जो इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है.
यूज्ड कार फाइनेंस की तेज वृद्धि के कारण
ग्राहकों की बढ़ती जागरूकता और आसान लोन प्रोसेस ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है. पहले लोग नकदी या अनऑफिसियल सोर्सेस पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब बैंक और NBFC बेहतर स्कीम दे रहे हैं. इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ा है.
एसेट क्वालिटी और स्ट्रेस लेवल
रिपोर्ट में बताया गया है कि यूज्ड कार पोर्टफोलियो में 31-90 दिन के बीच बकाया लोन 3.1 प्रतिशत हैं, जबकि ऑटो लोन में ये सिर्फ 2.1 प्रतिशत है. 91-180 दिन के बकाए में भी यूज्ड कार लोन 1 प्रतिशत पर हैं, जबकि ऑटो लोन 0.6 प्रतिशत रहा. इसके बावजूद फाइनेंसर इस सेगमेंट में एक्टिव हैं.
बॉरोअर्स का प्रोफाइल
दोनों सेगमेंट में दो से ज्यादा लोन वाले उधारकर्ताओं की संख्या लगभग समान है. लेकिन यूज्ड कार लोन लेने वालों में अनसिक्योर्ड लोन (पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और क्रेडिट कार्ड) का अनुपात 9.2 प्रतिशत है, जो ऑटो लोन में 6.4 प्रतिशत है.
कमर्शियल व्हीकल और बाजार का बदलता रेशियो
कमर्शियल व्हीकल फाइनेंस की CAGR 20.1 प्रतिशत रही और ये 3 लाख करोड़ से 7.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा. यूज्ड कार मार्केट नई कार सेगमेंट से तेजी से बढ़ा है. अब हर नई कार के मुकाबले लगभग 1.4 यूज्ड कारें बिक रही हैं. सालाना यूज्ड कार वॉल्यूम करीब 60 लाख यूनिट तक पहुंच चुका है, जबकि नई पैसेंजर व्हीकल की बिक्री 42 से 45 लाख यूनिट के आसपास है.
कुल मिलाकर व्हील्स फाइनेंस सेगमेंट में एसेट क्वालिटी स्टेबल हो रही है. ये ट्रेंड बताता है कि भारत का ऑटो फाइनेंस बाजार अब ज्यादा संतुलित और कस्टमर-सेंट्रिक हो गया है.
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राम मोहन मिश्र डिजिटल मीडिया के ऑटोमोटिव जगत में एक जाना-पहचाना नाम हैं, जो 2021 से लगातार इसी फील्ड में एक्टिव हैं. वर्तमान में न्यूज़18 हिंदी में बतौर सीनियर सब-एडिटर ऑटो डेस्क संभालते हुए, वे कार, बाइक और स्…
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