Petrol Car to CNG Conversion: पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतें और रोजमर्रा के सफर का खर्च आम कार मालिकों की जेब पर भारी पड़ रहा है. ऐसे में अपनी पेट्रोल कार को CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) में कन्वर्ट कराना एक बेहद किफायती और व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरा है. सीएनजी न केवल पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है, बल्कि ये गाड़ी का माइलेज भी लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा देती है. इसके अलावा, पर्यावरण के लिहाज से भी सीएनजी अधिक सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन माना जाता है, क्योंकि ये पेट्रोल की तुलना में कार्बन एमीशन को काफी हद तक कम करता है.
हालांकि, बाजार में किसी भी वर्कशॉप से किट लगवा लेना समझदारी नहीं है. इंजन की सेफ्टी, कार की परफॉर्मेंस और कानूनी नियमों को ध्यान में रखते हुए सही किट का चुनाव और सर्टिफाइड रेट्रोफिटर से काम कराना जरूरी होता है. अगर आर अपनी पेट्रोल कार को CNG में बदलना चाहते हैं, तो इसकी पूरी प्रोसेस जान लीजिए. साथ में ये भी जानिए कि CNG Kit कितने तरह की होती हैं?
कौन की CNG Kit बेस्ट?
बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार की सीएनजी किट- वेंटुरी किट और सीक्वेंशियल किट उपलब्ध हैं. वेंटुरी किट एक पुरानी तकनीक है, जिसमें गैस एक निश्चित मात्रा में सीधे एयर इनटेक में जाती है. ये सस्ती होती है, लेकिन मॉडर्न कारों के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है.
वहीं, सीक्वेंशियल किट मॉडर्न फ्यूल-इंजेक्टेड कारों के लिए सबसे बेहतर विकल्प है. इसमें एक अलग इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) और गैस इंजेक्टर होते हैं, जो इंजन की जरूरत के हिसाब से सही रेशियो में गैस पहुंचाते हैं. इससे गाड़ी में पिकअप की समस्या कम होती है और माइलेज भी शानदार मिलता है.
कन्वर्जन का सही प्रोसेस
- सर्टिफाइड सेंटर चुनें: हमेशा सरकार द्वारा अधिकृत (RTO Approved) रेट्रोफिटमेंट सेंटर से ही किट लगवाएं. स्थानीय और सस्ते वर्कशॉप से किट लगवाने पर गाड़ी में खराबी या आग लगने का खतरा रहता है.
- ब्रांडेड किट की पहचान: सुनिश्चित करें कि किट Motozen, Lovato, BRC या Tomasetto जैसे सर्टिफाइड ब्रांड्स की हो. सिलेंडर पर बीआईएस (BIS) हॉलमार्क और टेस्ट सर्टिफिकेट जरूर चेक करें.
- फिटिंग और वायरिंग: किट के साथ वायरिंग, गैस पाइपलाइन और बूट स्पेस में सिलेंडर को मजबूत ब्रैकेट के साथ माउंट कराया जाता है. फिटिंग के बाद लीकेज की जांच ज़रूर कराएं.
लीगल प्रोसेस और ज़रूरी डॉक्यूमेंट
कार में सीएनजी किट लगवाना सिर्फ मैकेनिकल काम नहीं है, इसे कानूनी तौर पर दर्ज कराना भी अनिवार्य है. आइए, इसकी स्टेप-बैय-स्टेप प्रोसेस जानते हैं-
- डॉक्यूमेंट जुटाएं: किट इंस्टॉलेशन के बाद सेंटर से किट इनवॉइस, सिलेंडर का टेस्टिंग सर्टिफिकेट और अप्रूवल लेटर लें.
- RTO एंडोर्समेंट: अपनी कार को आरटीओ ले जाकर सीएनजी किट का इंस्पेक्शन कराएं. आरटीओ में फॉर्म भरकर आवेदन करें ताकि आपके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में Petrol/CNG दर्ज हो सके.
- इंश्योरेंस अपडेट: RC अपडेट होते ही अपनी बीमा कंपनी को सूचित करें और पॉलिसी में सीएनजी किट को एंडोर्स कराएं. ऐसा न करने पर किसी दुर्घटना की स्थिति में क्लेम खारिज हो सकता है.
लागत और अनुमानित खर्च
एक अच्छी क्वालिटी वाली सीक्वेंशियल सीएनजी किट लगवाने का कुल खर्च आमतौर पर ₹35,000 से लेकर ₹55,000 के बीच आता है. ये कीमत कार के मॉडल, सिलेंडर के साइज (सामान्यतः 12 से 14 किलोग्राम क्षमता) और किट के ब्रांड पर निर्भर करती है. आरटीओ एंडोर्समेंट और बीमा में बदलाव के लिए ₹2,000 से ₹4,000 का अतिरिक्त सरकारी व कागजी खर्च आता है.
CNG के नफा-नुकसान
फायदे: रनिंग कॉस्ट 50-60% तक कम हो जाती है, माइलेज बढ़ता है और ये एक इको-फ्रेंडली ऑप्शन है.
नुकसान: गाड़ी का बूट स्पेस लगभग खत्म हो जाती है, पिकअप में 10-15% की हल्की गिरावट आती है और अतिरिक्त वजन के कारण रियर सस्पेंशन पर असर पड़ता है.
गाड़ी को हमेशा पहले पेट्रोल पर स्टार्ट करें और इंजन थोड़ा गर्म होने के बाद ही सीएनजी पर स्विच करें. हर 3 साल में सीएनजी सिलेंडर की हाइड्रो-टेस्टिंग कराना न भूलें ताकि आपकी ट्रिप हमेशा सुरक्षित और सस्ती बनी रहे.