आज के दौर में कार केवल एक लग्जरी नहीं, बल्कि हमारी लाइफस्टाइल का एक जरूरी हिस्सा बन गई है. लेकिन कार खरीदने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसका मेंटेनेंस है. अक्सर हम छोटी-छोटी समस्याओं, जैसे ऑयल की चेकिंग, एयर फिल्टर की सफाई या वाइपर बदलने के लिए भी मैकेनिक के पास भागते हैं और भारी-भरकम लेबर चार्ज चुकाते हैं.
क्या आप जानते हैं कि कार की सर्विसिंग का एक बड़ा हिस्सा इतना आसान होता है कि उसे आप अपने गैरेज या पार्किंग में खुद कर सकते हैं? नियमित रूप से छोटी सर्विसिंग घर पर करने से न केवल आपकी मेहनत की कमाई बचती है, बल्कि आपको अपनी गाड़ी की स्थिति के बारे में भी बेहतर जानकारी रहती है. अपने इस आर्टिकल में हम आपको उन 5 ट्रिक्स के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप खुद अपनी कार के ‘डॉक्टर’ बन सकते हैं.
1. इंजन ऑयल और फिल्टर की नियमित जांच
इंजन ऑयल आपकी कार का ‘ब्लड’ है. अगर ये गंदा हो जाए या कम हो जाए, तो इंजन के पुर्जे आपस में रगड़ खाने लगते हैं, जिससे भारी नुकसान हो सकता है. इसे चेक करने के लिए कार के बोनट को खोलें और ‘डिप्स्टिक’ (Dipstick) को निकालें. इसे एक साफ कपड़े से पोंछकर वापस डालें और फिर निकाल कर देखें. घर पर तेल बदलने से आप मैकेनिक के 500 से 1000 रुपये तक के सर्विस चार्ज को आसानी से बचा सकते हैं. ऑयल लेवल ‘मिनियम’ और ‘मैक्सिमम’ के बीच होना चाहिए. अगर तेल का रंग डार्क ब्लैक और चिपचिपा है, तो इसे बदलने का समय आ गया है.
2. एयर फिल्टर की सफाई और बदलाव
एयर फिल्टर इंजन को धूल और गंदगी से बचाता है. अगर ये जाम हो जाए, तो कार का माइलेज तेजी से गिरने लगता है और इंजन पर दबाव बढ़ता है. कार के इंजन के पास एक प्लास्टिक का बॉक्स होता है, जिसमें एयर फिल्टर लगा होता है. क्लिप्स को खोलकर फिल्टर को बाहर निकालें. यदि फिल्टर बहुत गंदा नहीं है, तो उसे जोर से झाड़ें या वैक्यूम क्लीनर/हवा के दबाव से साफ करें. अगर ये काला पड़ गया है, तो नया खरीदकर खुद लगा दें. इससे आपकी कार की फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) 10% तक बढ़ सकती है.
3. कूलेंट और ब्रेक फ्लूइड लेवल बनाए रखना
इंजन को ठंडा रखने के लिए कूलेंट और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए ब्रेक फ्लूइड का सही होना अनिवार्य है. मैकेनिक अक्सर इन फ्लुइड को टॉप-अप करने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं. बोनट के नीचे कूलेंट रिजर्व टैंक को देखें. अगर लेवल कम है, तो इसमें कार के मैनुअल के अनुसार कूलेंट और पानी का मिश्रण डालें. इसी तरह ब्रेक फ्लूइड के कंटेनर की भी जांच करें. कभी भी इंजन गरम होने पर कूलेंट का ढक्कन न खोलें, इससे भाप से जलने का खतरा रहता है.
4. बैटरी टर्मिनल्स की सफाई
अक्सर कार स्टार्ट न होने का कारण बैटरी की खराबी नहीं, बल्कि उसके टर्मिनल्स पर जमी ‘सफेद परत’ (Corrosion) होती है. एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं. एक पुराने टूथब्रश की मदद से बैटरी के टर्मिनल्स को रगड़कर साफ करें. साफ करने के बाद उन पर थोड़ा वैसलीन या ग्रीस लगा दें. इससे बैटरी की लाइफ बढ़ती है और आपको बार-बार बैटरी रिप्लेसमेंट या इलेक्ट्रिशियन के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
5. वाइपर ब्लेड्स और टायर प्रेशर का मैनेजमेंट
बारिश के मौसम में खराब वाइपर दुर्घटना का कारण बन सकता है. इनका बदलना बहुत ही आसान काम है. वाइपर आर्म को उठाएं, पुरानी ब्लेड की क्लिप दबाकर उसे निकालें और नई ब्लेड लगा दें. इसके लिए किसी टूल की जरूरत नहीं होती. महीने में कम से कम दो बार टायर प्रेशर चेक करें. कम हवा होने पर टायर जल्दी घिसते हैं और माइलेज कम होता है. एक सस्ता डिजिटल प्रेशर गेज खरीदकर आप खुद इसकी निगरानी कर सकते हैं.
हमारी सलाह: कार मेंटेनेंस कोई रॉकेट साइंस नहीं है. ऊपर बताए गए 5 कामों को करने में आपको महीने में केवल 30 से 45 मिनट का समय लगेगा. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप न केवल मैकेनिक की लंबी कतारों और फिजूलखर्ची से बचेंगे, बल्कि आपकी कार की रीसेल वैल्यू भी बेहतर बनी रहेगी. तो अगली बार सर्विसिंग का ख्याल आए, तो पहले खुद टूलकिट उठाएं और अपनी कार की देखभाल शुरू करें, पैसा और समय दोनों की बचत होगी.