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वंदे भारत कवच ब्रेकिंग सिस्टम से लैस, 160 की स्पीड में खुद कैसे रुकेगी ट्रेन?

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On September 8, 2026
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वंदे भारत ट्रेनें अब 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ने लगी हैं और इसी के साथ भारतीय रेलवे ने अपना स्वदेशी सुरक्षा कवच सिस्टम भी और मजबूत कर दिया है. यह सिस्टम अब इतना तेज और भरोसेमंद बना दिया गया है कि तेज रफ्तार में भी अगर कोई खतरा दिखे तो ट्रेन खुद ही ब्रेक लगा लेगी, चाहे ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया दे या नहीं.

हाल ही में रेलवे ने इसका एक बड़ा और सफल ट्रायल पूरा किया है, जिसमें ट्रेन ने एक नया रिकॉर्ड बनाया. आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है, यह कैसे काम करती है और इसके आने से रेल यात्रियों का सफर कितना सुरक्षित होने वाला है.

कवच सिस्टम आखिर है क्या?

कवच भारतीय रेलवे का बनाया हुआ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन यानी ATP सिस्टम है. इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया है. इसका मकसद ट्रेन हादसों को कम से कम करना है. खासकर सिग्नल पार करने की गलती और तय सीमा से ज्यादा स्पीड की वजह से होने वाले हादसों को कम रोकना. अब इसका नया वर्जन कवच 4.0 तैयार किया गया है, जो खासतौर पर हाई स्पीड ट्रेनों के लिए बनाया गया है. 

160 की स्पीड में कैसे लगेगा ब्रेक?

कवच सिस्टम ट्रेन, पटरी और सिग्नल के बीच लगातार डिजिटल तरीके से जानकारी का आदान-प्रदान करता है. अगर कोई ट्रेन तय स्पीड से ज्यादा तेज चल रही हो, या खतरे वाले सिग्नल के पास पहुंच रही हो और ड्राइवर ने समय पर ब्रेक नहीं लगाया, तो यह सिस्टम खुद-ब-खुद ट्रेन की ब्रेक प्रणाली को सक्रिय कर देता है. यानी 160 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी तेज रफ्तार में भी अगर इंसानी चूक हो जाए तो मशीन खुद संभाल लेती है और ट्रेन को सुरक्षित रूप से रोक देती है. 

टक्कर रोकने की तकनीक कैसे काम करती है?

इस सिस्टम को काम करने के लिए पटरियों पर हजारों की संख्या में RFID टैग लगाए जाते हैं. साथ ही टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल और खास कवच हट भी बनाई जाती हैं. ट्रेन में लगा उपकरण अल्ट्रा हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो के जरिए पटरी और सिग्नल सिस्टम से लगातार जुड़ा रहता है. इससे यह पता चलता रहता है कि आगे या पीछे कोई दूसरी ट्रेन तो नहीं आ रही. इसी वजह से यह सिस्टम आमने-सामने की टक्कर और पीछे से होने वाली टक्कर, दोनों तरह के हादसों को रोकने में सक्षम है. 

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कितना भरोसेमंद है यह सिस्टम

कवच को सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 यानी SIL-4 मानक पर बनाया गया है. इसका मतलब है कि इस सिस्टम में गलती होने की संभावना 10,000 साल में सिर्फ एक बार जितनी कम है. यह दुनिया के सबसे ऊंचे सुरक्षा मानकों में गिना जाता है. इसके अलावा यह सिस्टम रेलवे कंट्रोल रूम को हर ट्रेन की लाइव लोकेशन और स्पीड की जानकारी भी लगातार भेजता रहता है, जिससे पूरे नेटवर्क की निगरानी करना आसान हो जाता है.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।