शोरूम से निकले और हो गया एक्सीडेंट! ऐसे में क्लेम मिलेगा या जेब से जाएगा पैसा? जानिए क्या कहते हैं नियम

नई कार खरीदने की खुशी हर किसी के लिए बेहद खास होती है, लेकिन सोचिए अगर शोरूम के गेट से बाहर कदम रखते ही उस चमचमाती गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाए, तो क्या होगा? हाल ही में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां डिलीवरी लेने के चंद सेकंड के भीतर ही गाड़ी हादसे का शिकार हो गई. ऐसी स्थिति में हर खरीदार के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या इस नुकसान के लिए इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा या नहीं?

कानून और मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के अनुसार, जैसे ही आप डिलीवरी पेपर्स पर साइन करते हैं, गाड़ी की कानूनी जिम्मेदारी आपके पास आ जाती है. नियमों के मुताबिक, शोरूम से गाड़ी तभी बाहर निकल सकती है जब उसका इंश्योरेंस एक्टिव हो. इसलिए, तकनीकी रूप से आपको क्लेम मिलना चाहिए, लेकिन इसमें कुछ पेचीदा पहलू भी हैं! आइए, इनके बारे में भी जान लेते हैं.

इंश्योरेंस कंपनियों के नियम: कब मिलता है क्लेम?

आजकल मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के तहत किसी भी गाड़ी को बिना वैध इंश्योरेंस के शोरूम से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होती है. ज्यादातर डीलर गाड़ी की डिलीवरी से पहले ही जीरो डेप्रिसिएशन (Zero Depreciation) इंश्योरेंस पॉलिसी एक्टिव कर देते हैं.

इसका मतलब ये है कि जैसे ही गाड़ी शोरूम की दहलीज पार करती है, उसका बीमा कवर चालू हो जाता है. अगर इस दौरान कोई हादसा होता है, तो इंश्योरेंस कंपनी नुकसान की भरपाई करने के लिए बाध्य है. ग्राहक को केवल फाइल चार्ज या पॉलिसी के तहत निर्धारित मामूली डिडक्टिबल अमाउंट ही देना होता है.

गाड़ी का रजिस्ट्रेशन होना है सबसे जरूरी शर्त

बीमा होने के बावजूद एक ऐसा नियम है, जिसके कारण आपका क्लेम खारिज हो सकता है और वह है गाड़ी का RTO रजिस्ट्रेशन. कोर्ट और उपभोक्ता आयोगों के फैसलों के अनुसार, बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के गाड़ी को सार्वजनिक सड़क पर चलाना कानूनन अपराध और बीमा शर्तों का गंभीर उल्लंघन है.

हाल ही में एक मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने क्लेम खारिज करने के बीमा कंपनी के फैसले को सही माना, क्योंकि गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं हुआ था. ऐसे मामलों में अगर डीलर ने लापरवाही से बिना रजिस्ट्रेशन गाड़ी सौंपी है, तो कोर्ट डीलर पर जुर्माना लगा सकता है, लेकिन नुकसान का एक बड़ा हिस्सा ग्राहक को भी उठाना पड़ सकता है.

अगर गलती शोरूम के स्टाफ की हो तो?

कई बार गाड़ी को शोरूम के अंदर से बाहर लाने या गेट पास कटवाने के दौरान शोरूम का ड्राइवर या स्टाफ ही उसे चला रहा होता है. अगर डिलीवरी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले या शोरूम स्टाफ की ड्राइविंग के दौरान हादसा होता है, तो उसकी पूरी कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारी शोरूम (डीलर) की होती है. ऐसी स्थिति में ग्राहक से किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई नहीं कराई जा सकती.

हादसा होने पर तुरंत करें ये काम

अगर भगवान न करे ऐसा कोई हादसा हो जाए, तो घबराने के बजाय इन कानूनी स्टेप्स का पालन करें-

  • तुरंत सूचित करें: दुर्घटना के तुरंत बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी और डीलर को घटना की जानकारी दें.
  • सबूत जुटाएं: घटनास्थल और गाड़ी को पहुंचे नुकसान की मोबाइल से तस्वीरें-वीडियो जरूर बना लें.
  • FIR दर्ज कराएं: अगर थर्ड पार्टी डैमेज हुआ है, तो क्लेम के लिए एफआईआर जरूरी है.