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New Traffic Rule- नए मोटर वाहन नियमों के अनुसार, अब आरटीओ और जिला परिवहन कार्यालय को यह शक्ति दी गई है कि वे बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों के लाइसेंस पर निलंबन की कार्रवाई शुरू कर सकें. हालांकि, ऐसा करने से पहले लाइसेंस धारक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा.
सरकार का साफ संदेश है कि अब चालक नियम तोड़ने पर जुर्माना भरकर नहीं बच सकते.नई दिल्ली. सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने और आदतन यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब यदि कोई वाहन चालक एक साल के भीतर पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसे तीन महीने के लिए वाहन चलाने से रोका जा सकता है. 1 जनवरी से प्रभावी हुए ये नियम भारतीय सड़कों पर अनुशासन लाने की दिशा में एक कड़ा कदम माना जा रहा है. सरकार का साफ संदेश है कि अब चालक नियम तोड़ने पर जुर्माना भरकर नहीं बच सकते, बल्कि उन्हें अपने लाइसेंस को बचाने के लिए हर छोटे-बड़े नियम का सख्ती से पालन करना ही होगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए मोटर वाहन नियमों के अनुसार, अब आरटीओ और जिला परिवहन कार्यालय को यह शक्ति दी गई है कि वे बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों के लाइसेंस पर निलंबन की कार्रवाई शुरू कर सकें. हालांकि, ऐसा करने से पहले लाइसेंस धारक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा. अधिसूचना में कहा गया है कि उल्लंघनों की गणना एक साल की अवधि के भीतर की जाएगी. राहत की बात यह है कि पिछले साल के उल्लंघन अगले साल की गिनती में नहीं जोड़े जाएंगे, यानी हर साल उल्लंघन का रिकॉर्ड स्वतः शून्य (Reset) माना जाएगा.
हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनना पडेगा भारी
अब तक ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन की प्रक्रिया मुख्य रूप से 24 गंभीर अपराधों तक सीमित थी, जिनमें वाहन चोरी, अपहरण, यात्रियों पर हमला, ओवरलोडिंग और अत्यधिक तेज गति (Overspeeding) जैसे मामले शामिल थे. लेकिन नए प्रावधान ने इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है. अब अगर कोई चालक साल में पांच बार रेड लाइट जंप करता है, हेलमेट नहीं पहनता या सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करता है तो उसे ‘आदतन अपराधी’ की श्रेणी में रखकर उसका लाइसेंस छीना जा सकता है. सरकार का मानना है कि ये छोटी दिखने वाली गलतियां ही अक्सर बड़ी सड़क दुर्घटनाओं और सार्वजनिक खतरे का कारण बनती हैं.
निष्पक्षता पर सवाल
इस नए कानून पर विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है. कुछ जानकारों का मानना है कि यह नियम सड़क पर अनुशासन लाने के लिए बेहद जरूरी है. दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा के अनुसार, पांच उल्लंघनों की सीमा सही है, लेकिन चुनौती इसे लागू करने में है. अक्सर खतरनाक ड्राइविंग करने वाले सीसीटीवी और पुलिस की पकड़ से बच निकलते हैं. वहीं, रोहित बलूजा जैसे विशेषज्ञों ने इस संशोधन को काफी कठोर और वैचारिक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है. उनका तर्क है कि बिना मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचे के सीसीटीवी कैमरों से दर्ज चालान को अदालतों में चुनौती देना आसान होगा.