GNCAP क्रैश टेस्ट प्रक्रिया और स्कोरिंग स्टेप्स की पूरी जानकारी.

सतीश कुमार
4 Min Read

Global NCAP एक स्वतंत्र संस्था है, जो गाड़ियों की सेफ्टी टेस्ट करती है. भारत में बिक रही कई कारों का यहां टेस्ट होता है और 1 से 5 स्टार रेटिंग मिलती है. प्रोसेस में रैंडम गाड़ी चुनना, डमी लगाना, क्रैश करना और स्कोरिंग शामिल है. ये पूरी तरह ट्रांसपेरेंट होता है, ताकि कस्टमर अपने लिए सेफ कार चुन सकें. आइए, जानते हैं GNCAP में गाड़ी का टेस्ट कैसे होता है.

Global NCAP

स्टेप 1- गाड़ी का चयन (Vehicle Selection): टेस्ट के लिए गाड़ी मैन्युफैक्चरर खुद नॉमिनेट करता है या GNCAP रैंडम तरीके से फैक्ट्री/डीलरशिप से चुनता है. VIN नंबर सील किया जाता है, ताकि कोई बदलाव न हो. ये सुनिश्चित करता है कि टेस्ट वाली कार बाजार में बिकने वाली असली कार हो, कोई चीटिंग न हो सके.

Global NCAP Dummy Installation

स्टेप 2- डमी इंस्टॉलेशन (Dummy Placement): क्रैश लैब में Adult (Hybrid III) डमी ड्राइवर और पैसेंजर सीट पर लगाए जाते हैं. बच्चे के लिए अलग डमी इस्तेमाल होता है। बेल्ट, सीट पोजिशन, हेड-नेक-चेस्ट सेंसर सब सही से चेक किए जाते हैं. ये स्टेप बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि डमी इंसानों की बॉडी की तरह व्यवहार करते हैं.

Global NCAP front offset test

स्टेप 3- फ्रंट ऑफसेट टेस्ट: पहले टेस्ट में गाड़ी 64 km/h की स्पीड से deformable barrier से 40% ओवरलैप पर टकराती है. ये हेड-ऑन एक्सीडेंट सिमुलेट करता है. हाई-स्पीड कैमरे और सेंसर से डेटा रिकॉर्ड होता है. Adult और Child प्रोटेक्शन यहां सबसे ज्यादा पॉइंट्स देते हैं.

Global NCAP Side Offset Test

स्टेप 4- साइड इम्पैक्ट टेस्ट: 50 km/h की स्पीड पर मोबाइल डिफॉर्मेबल बैरियर (MDB) से साइड में हिट होता है. ये साइड से आने वाली गाड़ी से टक्कर का सिमुलेशन है. साइड एयरबैग, स्ट्रक्चर और डमी की इंजरी चेक होती है. ये टेस्ट भी Adult प्रोटेक्शन में अहम रोल निभाता है.

Global NCAP Side Pole Test

स्टेप 5- साइड पोल इम्पैक्ट: 29-32 km/h पर रिजिड रोल से साइड क्रैश होता है. ये पेड़ या बिजली के खंभे से टकराव दिखाता है. हेड इंजरी बहुत ज्यादा चेक होती है, क्योंकि साइड एयरबैग और स्ट्रक्चर यहां फेल हो सकते हैं. कई कारों में य् टेस्ट अलग से किया जाता है.

Global NCAP Post Test Analysis

स्टेप 6- पोस्ट क्रैश इंस्पेक्शन: क्रैश के बाद कार की डिफॉर्मेशन, फुटवेल, डोर ओपनिंग और पैनीट्रेशन चेक होता है. डमी को निकालकर इंजरी वैल्यू (HIC, chest, neck, femur) एनालाइज की जाती है. अगर डोर खुल जाए या ज्यादा क्रश हो तो स्कोर कम होता है.

Global NCAP Crash Test Scoring

स्टेप 7- स्कोरिंग (Adult + Child + Safety Assist): एडल्ट ऑक्यूपेंट को 17 पॉइंट, चाइल्ड ऑक्यूपेंट को 49 पॉइंट और सेफ्टी असिस्ट (ESC, belt reminder आदि) से अतिरिक्त पॉइंट मिलते हैं. कुल स्कोर के आधार पर 1-5 स्टार दिए जाते हैं. इसलिए ही ज्यादातर गाड़ियों में ESC और स्टैंडर्ड 6 एयरबैग होते हैं.

Global NCAP Crash test result analysis

स्टेप 8- रिजल्ट एनालिसिस: हाई-स्पीड वीडियो (1000+ फ्रेम/सेकंड) और सेंसर डेटा से इंजरी रिस्क कैलकुलेट होता है. स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी, एयरबैग टाइमिंग सब देखा जाता है. मैन्युफैक्चरर को रिपोर्ट दिखाई जाती है और सुधार के लिए समय दिया जा सकता है. इसके बाद रिजल्ट पब्लिक किया जाता है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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